भारतीय आईटी प्रोफेशनल्स के लिए बड़ा झटका, ट्रंप ने H-1B Visa पर लगाई रोक

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नई दिल्लीः ट्रम्प प्रशासन ने सोमवार को वर्तमान कैलेंडर वर्ष में सभी एच-1बी और एच-4 सहित विदेशियों के लिए, नए प्रवासियों और निलंबित वीजाधारकों के लिए ‘ग्रीन कार्ड’ जारी करने पर रोक लगा दी। यह रोक उन वीजाधारकों के लिए नहीं जो पहले से ही अमेरिका में रह रहे हैं। ऑप्शनल प्रैक्टिकल ट्रेनिंग (OPT) के तहत जो विदेशी छात्र अमेरिका में स्नातक होने के बाद योग्य होगें, वो छात्र भी इस समस्या से प्रभावित नहीं होंगे। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के इस फैसले से भारत समेत दुनिया के आईटी प्रोफेशनल को बड़ा झटका लगेगा। 

डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को कहा कि अमेरिका में रहने वाले उन लोगों की मदद करने के लिए यह निर्णय आवश्यक था। इसका उद्देश्य उन स्थानीय वर्कस को प्रोटेक्ट करना है जो कोविड-19 के फैलने के कारण बेरोजगारी का सामना कर रहे हैं। उन्होंने कहा, ट्रम्प ने एक बयान में कहा, ‘‘हमारे पास एक आव्रजन प्रणाली बनाने का नैतिक कर्तव्य है जो हमारे नागरिकों के जीवन और नौकरियों की रक्षा करता है। यह निलंबन दिसंबर तक प्रभावी रहेगा।’’

ट्रंप का ये ऐलान नवंबर में होने जा रहे राष्ट्रपति चुनावों के मद्देनज़र देखा जा रहा है। राष्ट्रपति चुनावों से ठीक पहले ये ऐलान करते हुए ट्रंप ने विभिन्न व्यापारिक संगठनों, कानूनविदों और मानवाधिकार निकायों द्वारा आदेश के बढ़ते विरोध की अनदेखी की है।

एच-1बी वीजा पर रोक 24 जून से लागू होगी। इससे बड़ी संख्या में भारतीय आईटी पेशेवरों के प्रभावित होने की संभावना है। अब उन्हें स्टैम्पिंग से पहले कम से कम इस साल के खत्म होने का इंतजार करना पड़ेगा। ये कदम उन भारतीय आईटी पेशेवरों को बड़ी संख्या में भी प्रभावित करेगा जिनका एच-1बी वीजा खत्म होने वाला है और वो उसे रिन्यू कराना चाहते हैं।

आज तक के हवाले से डोनाल्ड ट्रंप के इस ऐलान से दुनियाभर से अमेरिका में नौकरी करने का सपना देखने वाले लाखों लोगों के लिए परेशानी का सबब बन सकता है। यहां बता दें कि अमेरिका में काम करने वाली कंपनियों को विदेशी कामगारों को मिलने वाले वीजा को एच-1बी वीजा कहते हैं। इस वीजा को एक तय अवधि के लिए जारी किया जाता है।

क्या है एच-1बी वीजा
एच-1बी वीजा एक गैर-प्रवासी वीजा है। अमेरिका में कार्यरत कंपनियों को यह वीजा ऐसे कुशल कर्मचारियों को रखने के लिए दिया जाता है जिनकी अमेरिका में कमी हो। इस वीजा की वैलिडिटी छह साल की होती है। अमेरिकी कंपनियों की डिमांड की वजह से भारतीय आईटी प्रोफेशनल्स इस वीजा को सबसे ज्यादा संख्या में हासिल करते हैं।

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