Virus

अल्फा वैरियंट से डेल्टा वैरियंट 40-60 प्रतिशत अधिक संक्रामक: डॉ. एन के अरोड़ा

नई दिल्ली: हाल के एक साक्षात्कार में इंडियन सार्स-कोव-2 जेनोमिक्स कॉन्सॉर्टियम (आईएनएसएसीओजी) के सह-अध्यक्ष डॉ. एनके अरोड़ा ने वैरियंट की जांच और उसके व्यवहार के हवाले से मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी)के बारे में चर्चा की। यह जांच यह जानने के लिये की जाती है कि डेल्टा वैरियंट इतना संक्रामक क्यों है। उन्होंने यह भी बताया कि किस तरह जेनोमिक निगरानी के जरिये इसे फैलने से रोका गया। उन्होंने फिर जोर देकर कहा कि कोविड उपयुक्त व्यवहार बहुत अहमियत रखता है।

Monsoon

मानसून में क्या बरतें सावधानियां, ताकि निरोग रहे काया!

वायरल संक्रमण, गले में खराश, खांसी और सर्दी को छोड़कर, मानसून के बारे में लगभग सब कुछ सुखद है। गर्मी और ताजगी से राहत के साथ-साथ मानसून कई बीमारियां भी साथ लाता है। मानसून में कीटाणु तेजी से पनपते हैं, इस कारण वायरल बुखार, पेट की समस्याएं और स्वाइन फ्लू जैसे रोग हो सकते हैं। बुखार वायरल संक्रमण का सबसे आम लक्षण है। बुखार आमतौर पर इस बात का संकेत होता है कि आपका शरीर किसी तरह के बैक्टीरिया या वायरल संक्रमण से लड़ने की कोशिश कर रहा है। आज हम बता रहे हैं कि इस मानसून में कैसे रहें निरोग।

Deep Vein Thrombosis

कई कारणों से होता है डीप वेन थ्राम्बोसिस : शिवराज इंगोले

मुंबई: मुंबई के जे जे अस्पताल एवं ग्रांट मेडिकल कॉलेज के प्रोफेसर और इंटरवेंशनल रेडियोलाजिस्ट  डॉक्टर शिवराज इंगोले का कहना है कि डीप वेन थ्राम्बोसिस एक ऐसी स्थिति है जिसमें शरीर में कहीं किसी एक नस के भीतर रक्त का थक्का बन जाता है। डीप वेन थ्राम्बोसिस ज्यादातर निचले पैर या जांघ में होता है हालाँकि यह कभी-कभी शरीर के अन्य भागों में भी हो सकता है। रक्त का थक्का जमा हुआ रक्त है जो रक्त के साथ दूसरे स्थानों तक स्थानांतरित हो सकता है। यह ऑपरेटिव प्रक्रिया की जटिलता के रूप में सामने आता है। ज्यादातर मामलों में इसकी पहचान तब तक नहीं हो पाती जब तक किसी व्यक्ति को पुल्मनेरी एम्बोलिज़म से निदान के लिए आपातकालीन सेवा में ना जाना पड़े। इसका मतलब यह होता है कि रक्त का थक्का पैर से होकर फेफड़ों में जाकर किसी महत्वपूर्ण धमनी में रूकावट पैदा कर रहा हो। जब एक थक्का बनता है, तो यह शिरा के आस-पास के क्षेत्रों तक फैल सकता है, जिससे एक स्थानीय सूजन हो सकती है जो अतिरिक्त रक्त के थक्के के विकास को प्रोत्साहित कर सकती है।

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स्तनपान कराने वाली माताओं को बिना किसी झिझक कोविड-19 टीका लगवाना चाहिए: डॉ. समीरन पांडा

नई दिल्ली: भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के महामारी विज्ञान एवं संक्रामक रोग संभाग के प्रमुख डॉ. समीरन पांडा ने कहा कि स्तनपान कराने वाली माताओं को बिना किसी झिझक के खुद को कोविड-19 प्रतिरोधी टीका लगवाना चाहिए। टीके की वजह से माताओं में विकसित होने वाली एंटी-बॉडीज स्तनपान कराते समय धीरे-धीरे शिशु में चले जाते हैं और यह शिशुओं के लिए लाभदायक हो सकता है।

Giloy

गिलोय को लिवर की खराबी से जोड़ना बिलकुल भ्रामक हैः आयुष मंत्रालय

नई दिल्ली: आयुष मंत्रालय ने गौर किया है कि मीडिया में कुछ ऐसी खबरे आईं हैं, जिन्हें जर्नल ऑफ क्लीनिकल एंड एक्सपेरीमेंटल हेपेटॉलॉजी में छपे एक अध्ययन के आधार पर पेश किया गया है। यह इंडियन नेशनल एसोसियेशन फॉर दी स्टडी ऑफ दी लिवर (आईएनएएसएल)की समीक्षा पत्रिका है।इस अध्ययन में उल्लेख किया गया है कि टिनोसपोरा कॉर्डीफोलिया (टीसी) जिसे आम भाषा में गिलोय या गुडुची कहा जाता है, उसके इस्तेमाल से मुम्बई में छह मरीजों का लीवर फेल हो गया था।