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संगम के किनारे आखिर क्‍यों लेटे हैं हनुमानजी, जानिए इस मंदिर का रहस्‍य

                   

उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में हनुमान जी की प्रतिमा वाला एक छोटा किन्तु प्राचीन मंदिर है। यह एकमात्र मंदिर है जिसमें हनुमान जी लेटी हुई मुद्रा में हैं। यहां पर स्थापित हनुमान जी की प्रतिमा 20 फीट लम्बी है। संगम किनारे बना ये एक अनूठा मन्दिर है, जहां हनुमानजी की लेटी हुई प्रतिमा को पूजा जाता है। हनुमानजी की यह विचित्र प्रतिमा दक्षिणाभिमुखी और 20 फीट लंबी है। माना जाता है कि यह धरातल से कम से कम 6 7 फीट नीचे है। संगम नगरी में इन्‍हें बड़े हनुमानजी, किले वाले हनुमानजी, लेटे हनुमानजी और बांध वाले हनुमानजी के नाम से जाना जाता है।    

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जानें! विष्णु पुराण के अनुसार भगवान शिव का जन्म कैसे हुआ


विष्णु पुराण में वर्णित भगवान शिव के जन्म की कहानी शायद महादेव का एकमात्र बाल रूप वर्णन है। यह कहानी बेहद मनभावन है। इसके अनुसार ब्रह्मा को एक बच्चे की जरूरत थी। उन्होंने इसके लिए तपस्या की। तब अचानक उनकी गोद में रोते हुए बालक शिव प्रकट हुए। ब्रह्मा ने बच्चे से रोने का कारण पूछा तो उसने बड़ी मासूमियत से जवाब दिया कि उसका नाम ‘ब्रह्मा’ नहीं है इसलिए वह रो रहा है। तब ब्रह्मा ने शिव का नाम ‘रूद्र’ रखा जिसका अर्थ होता है ‘रोने वाला’। शिव तब भी चुप नहीं हुए। इसलिए ब्रह्मा ने उन्हें दूसरा नाम दिया पर शिव को नाम पसंद नहीं आया और वे फिर भी चुप नहीं हुए। इस तरह शिव को चुप कराने के लिए ब्रह्मा ने 8 नाम दिए और शिव 8 नामों (रूद्र, शर्व, भाव, उग्र, भीम, पशुपति, ईशान और महादेव) से जाने गए। शिव पुराण के अनुसार ये नाम पृथ्वी पर लिखे गए थे।

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न्याय के देवता शनि देव के हैं 9 वाहन, जानिए इनका महत्व

शनिदेव को हिंदू धर्म में कर्म फल दाता माना जाता हैं, इसलिए इन्हे कठोर भी माना जाता है। दरअसल शनि देव न्याय के देवता हैं और जब न्याय निष्पक्ष होगा तो दंड भी मिलता हैं। शनि देव 9 वाहनों की सवारी करते हैं। जानिए  इनका क्या महत्व है।                   

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देवों के देव महादेव के 108 नामों का जप करने से मिलता है मोक्ष

सभी देवों में महादेव का स्थान सबसे ऊंचा माना गया है। संहार के देवता भगवान शिव को सनातन धर्म के आदि पंच देवों में से एक प्रमुख देव माना जाता है। वहीं त्रिदेवों में भी भगवान शिव एक हैं। सप्ताह में सोमवार का दिन भगवान शिव को समर्पित है। भगवान भोलेनाथ बड़े ही भोले और दयालु हैं। शिवलिंग पर सिर्फ एक लोटा जल चढ़ाने से ही ये खुश हो जाते हैं और भक्त की मनोकामना पूर्ण करते हैं।

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Dev Diwali 2021: क्यों मनाई जाती है देव दीपावली? जानिए इसका महत्व

देव दिवाली या देव दीपावली हर साल हिंदू कैलेंडर के कार्तिक महीने के 15 वें चंद्र दिवस, यानी कार्तिक पूर्णिमा को मनाई जाती है। कार्तिक पूर्णिमा, जिसे देव दिवाली के नाम से भी जाना जाता है, कार्तिक माह में पूर्णिमा के दिन मनाई जाती है और यह दिन हिंदू समुदाय के लिए बहुत महत्व रखता है। ग्रेगोरियन कैलेंडर के अनुसार यह नवंबर-दिसंबर में पड़ता है। दिवाली के 15 दिन बाद यह त्योहार मनाया जाता है। इस वर्ष यह पर्व (19 नवंबर - शुक्रवार) को मनाया जा रहा है।