Vijayadashami

जानिए! नवरात्रि के बाद क्यों मनाया जाता है विजयादशमी का पर्व

देवी दुर्गा के नौ स्वरूपों को मनाने वाला त्योहार नवरात्र अब समाप्त होने वाला है। लेकिन इसका समापन दशहरा या विजया दशमी के साथ होता है जो नवरात्रि के अंत में मनाया जाता है। यह त्योहार देशभर में हिंदू भक्तों द्वारा मनाया जाता है। विजयादशमी हर साल हिंदू कैलेंडर के अनुसार अश्विन महीने के दसवें दिन मनाया जाता है। इस दिन को बुराई पर अच्छाई की जीत के रूप में भी मनाया जाता है।

Maa Kalratri

नवरात्र का सातवां दिन: मां कालरात्रि की कथा, मंत्र व पूजा विधि

नवरात्रि के सातवें दिन यानी महासप्तमी को माता कालरात्रि की पूजा की जाती है। जैसा उनका नाम है, वैसा ही उनका रूप है। खुले बालों में अमावस की रात से भी काली, मां कालरात्रि की छवि देखकर ही भूत-प्रेत भाग जाते हैं। मां वर्ण काला है। खूले बालों वाली यह माता गर्दभ पर बैठी हुई है। इनकी श्वास से भयंकर अग्नि निकलती है। इतना भयंकर रूप होने के बाद भी वे एक हाथ से भक्तों को अभय दे रही है। मधु कैटभ को मारने में मां का ही योगदान था। मां का भय उत्पन्न करने वाला रूप केवल दुष्टों के लिए है। अपने भक्तों के लिए मां अंत्यंत ही शुभ फलदायी है। कई जगह इन्हें शुभकंरी नाम से भी जाना जाता है।

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नवरात्रि आपकी आत्मा के विश्राम, शरीर में पुनः ऊर्जा भरने का समय

आप अपने शरीर को तो रोज ही आराम देते हैं, लेकिन मन और आत्मा को कभी आराम नहीं देते। जिसके चलते आप अपने आपको मानसिक रूप से थका हुआ महसूस करते हैं और आपका मन किसी भी काम के लिए एकाग्रचित नहीं हो पाता। मन और आत्मा को एकाग्र करने के लिए आपको इन्हें भी आराम देना चाहिए। अब आपके मन में ये ख्याल आयेगा कि ऐसा कैसे संभव है। तो आज हम आपको बताते हैं कि कैसे आप अपने मन और आत्मा को शांत और एकाग्रचित कर सकते हैं। इसके लिए आपको भक्ति भाव से व्रत का पालन करना होगा और इसके लिए नवरात्रि से बेहतर समय कोई नहीं है। एक वर्ष में दो नवरात्रि मनाई जाती हैं। पहला ‘चैत्र नवरात्रि’ उत्सव तब होता है जब गर्मी शुरू होती है (मार्च-अप्रैल) और दूसरी ‘शरद नवरात्रि’ तब होती है जब सर्दी शुरू होती है (अक्टूबर-नवंबर)। आप चैत्र और शरदीय नवरात्रि में भक्ति भाव से व्रत के नियमों का पालन करें। इससे आपके तन, मन और आत्मा को विश्राम भी मिलेगा और आप अपनी इन्द्रियों पर काबू भी पा सकेंगे।

Navratri

आपातकालीन स्थिति में नवरात्र उत्सव कैसे मनाना चाहिए?

आश्विन शुक्ल प्रतिपदा के दिन घटस्थापना करके नवरात्रि का आरंभ होता है I  नवरात्रि महिषासुर मर्दिनी मां श्री दुर्गा देवी का त्यौहार है । देवीने महिषासुर नामक असुर के साथ नौ दिन अर्थात प्रतिपदा से नवमी तक युद्ध कर, नवमी की रात्रि उसका वध किया । उस समय से देवीको ‘महिषासुरमर्दिनी’ के नाम से जाना जाता है । इस वर्ष 7 अक्टूबर से 14 अक्टूबर की अवधि में नवरात्र उत्सव मनाया जाएगा । कोरोना महामारी की पृष्ठभूमि पर लागू की गई  यातायात बंदी कुछ स्थानों पर उठाई गई है तथा जनजीवन सामान्य  हो रहा है I जहां प्रशासन के सभी नियमों का पालन कर सामान्य की भांति यह उत्सव मनाना संभव है, ऐसे स्थानों पर सामान्य की भांति कुलाचार अवश्य करें । किंतु अभी भी कुछ स्थानों पर प्रतिबंधों के कारण सामान्य की भांति नवरात्र उत्सव मनाने पर मर्यादाएं आ सकती हैं । ऐसे समय में अनेक लोगों के मन में ‘नवरात्रोत्सव किस प्रकार मनाना चाहिए?’, यह प्रश्‍न उठ रहा है । इस परिप्रेक्ष्य में हम यहां कुछ उपयुक्त सूत्र और उचित दृष्टिकोण दे रहे हैं   I 

Devi

देवी पूजन से संबंधित कुछ सर्वसामान्य कृत्यों की अध्यात्मशास्त्र की दृष्टि से उचित पद्धतियां

प्रत्येक देवता का एक विशिष्ट उपासनाशास्त्र है। इसका अर्थ है कि प्रत्येक देवता की उपासना के अंतर्गत प्रत्येक कृत्य विशिष्ट प्रकार से करनेका अध्यात्मशास्त्रीय आधार है । आदिशक्ति श्री दुर्गा देवी एवं उनके सर्व रूपों के (सर्व देवी के) पूजन से संबंधित सर्वसाधारण की कृत्यके विषय में जानकारी, आगे दी है।