Suryadev

रविवार को सूर्यदेव की पूजा से मिलेगी मनचाही सफलता

सूर्य और चंद्र इस पृथ्वी के साक्षात देवता हैं जो हमें प्रत्यक्ष स्वरूप में दिखाई देते हैं। वेदों में सूर्य को जगत की आत्मा कहा गया है। सूर्य से ही इस पृथ्वी पर जीवन है। वैदिक काल से ही भारत में सूर्योपासना का प्रचलन रहा है। पुराणों में सूर्य की उत्पत्ति, प्रभाव स्तुति, मन्त्र इत्यादि विस्तार से मिलते हैं। ज्योतिष शास्त्र में नवग्रहों में सूर्य को राजा का पद प्राप्त है। हिंदू धर्म में सूर्य की पूजा की परंपरा काफी पुरानी है।

Dhanteras

धनतेरस का व्यावहारिक तथा आध्यात्मिक महत्व और पूजा विधि

दिवाली से जुड़े इस त्योहार के अवसर पर नए आभूषण खरीदने की प्रथा है। व्यापारी भी इस दिन अपने तिजोरी की पूजा करते हैं। धनत्रयोदशी अर्थात देवताओं के वैद्य धन्वंतरि देवता का जन्म दिवस। आइए इस लेख के माध्यम से हम इस दिन का महत्व तथा इस दिन किए जाने वाले कृतियों का शास्त्र समझ कर लेते हैं। 

AhoiAshtami

Ahoi Ashtami 2021: जानिए महत्त्व, पूजा मुहूर्त, विधि और व्रत कथा

अहोई अष्टमी एक हिंदू त्योहार है जो माताओं द्वारा अपने बच्चों के लिए मनाया जाता है। यह करवा चौथ के चार दिन बाद और दिवाली से आठ दिन पहले मनाया जाता है। इस वर्ष यह पर्व 28 अक्टूबर 2021 गुरुवार को मनाया जा रहा है। पूर्णिमांत कैलेंडर के अनुसार यह कार्तिक माह में पड़ता है, जबकि दक्षिण भारत में पालन किए जाने वाले अमंता कैलेंडर के अनुसार यह अश्विन के महीने में आता है। यह केवल महीनों के नाम से भिन्न है, हालांकि अहोई अष्टमी एक ही दिन पड़ती है। अहोई अष्टमी करवा चौथ के समान है क्योंकि महिलाएं पूरे दिन भोजन और पानी का सेवन नहीं करती हैं। आसमान में तारे देखने के बाद व्रत तोड़ा जाता है। अहोई अष्टमी को 'अहोई आठ' भी कहा जाता है क्योंकि उपवास महीने के आठवें दिन होता है।

Religious

जब गणेश जी पिता महादेव का अति सुंदर रूप देख रह गए दंग

एक बार गणेशजी ने भगवान शिवजी से कहा-पिताजी आप यह चिताभस्म लगाकर, मुण्डमाला धारणकर अच्छे नहीं लगते। मेरी माता गौरी अपूर्व सुंदरी और आप उनके साथ इस भयंकर रूप में! अतरूपिताजी, आप एक बार कृपा करके अपने सुंदर रूप में माता के सम्मुख आएं जिससे हम आपका असली स्वरूप देख सकें। भगवान शिवजी मुस्कुराये और गणेशजी की बात मान ली।

Diwali

दीपावली विशेषः हिन्दुओं का एक महत्वपूर्ण त्यौहार, जिससे विश्व भर में फैली हिंदू संस्कृति!

विश्व में कई संस्कृतियां उभरी और उनका लय हो गया; परंतु प्राचीन हिंदू संस्कृति ही एकमात्र ऐसी संस्कृति है जो समय की कसौटी पर खरी उतरी है;  तथा आज भी टिकी हुई है और उसका दूर तक प्रसार भी हो रहा है। इसका एक उदाहरण है 'योग'! भारतीय ऋषियों ने प्राचीन काल में योग-साधना सिखाई ; परंतु पिछले कुछ वर्षों में, इसका प्रसार बहुत अधिक प्रमाण में बढ़ गया है और विश्व भर में मान्यता प्राप्त कर रहा है। भारत में ऐसे कई महाभाग हैं जिन्होंने योग का अभ्यास करना तब आरम्भ कर दिया जब योग, योगा बनकर भारत में आया। आयुर्वेद के साथ भी यही स्थिति है ! ऐसा कहा जाता है, 'जहां की पैदावार है वहाँ नहीं बिकती ! परंतु, हिन्दू संस्कृति मूलत: चैतन्य का उद्गम स्थान है इसमें बताए गए व्रत, त्यौहार व उत्सव चैतन्य से संबंधित हैं इसलिए हमेशा ही ये उत्सव व त्यौहार उत्साह का वातावरण निर्माण हैं ।