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Diwali 2021: लक्ष्मी पूजा का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व

शरद ऋतु की हवा में एक अलग तरह की महक होती है जो पूरे देश में उत्सवों और समारोहों की शुरुआत की खुशबू पूरे देश में फैलाती है। दिवाली का हिंदू त्योहार या रोशनी का त्योहार 2,500 साल से अधिक पुराना है। यह हर साल दुनियाभर के हिंदू समुदायों द्वारा धूमधाम से मनाया जाता है। हर साल कार्तिक माह की अमावस्या को मनाई जाने वाली दिवाली इस साल 4 नवंबर, वीरवार को मनाई जाएगी।

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Dhanteras 2021: जानिए! पूजा विधि, शुभ मुहूर्त, यम दीपदान विधि और पौराणिक कथा

कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि के दिन भगवान धनवन्तरि अमृत कलश के साथ सागर मंथन से उत्पन्न हुए हैं। इसलिए इस तिथि को धनतेरस के नाम से जाना जाता है। धन्वन्तरी जब प्रकट हुए थे तो उनके हाथो में अमृत से भरा कलश था। भगवान धन्वन्तरि कलश लेकर प्रकट हुए थे, इसलिए ही इस अवसर पर बर्तन खरीदने की परम्परा है। मान्यता के अनुसार यह भी कहा जाता है कि इस दिन कोई भी वस्तु खरीदने से उसमें 13 गुणा वृद्धि होती है। इस अवसर पर धनिया के बीज खरीद कर भी लोग घर में रखते हैं। दीपावली के बाद इन बीजों को लोग अपने बाग-बगीचों में या खेतों में बोते हैं।

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चमत्कार! इस डॉक्टर हनुमान मंदिर में हर असाध्य रोगों का होता है इलाज

मध्यप्रदेश के भिंड जिले के मेहगांव मार्ग स्थित डाक्टर हनुमान का प्रसिद्ध मंदिर है। इस मंदिर की एक खास बात यह है कि यहां हजारों भक्त अपनी जानलेवा बीमारियों का इलाज कराने आते हैं। बतातें है कि यहां कैंसर तक के मरीज भी अपना इलाज कराने आते है। 

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मधुबनी जिले का अद्भुत ‘रूद्र महादेव मंदिर’

बिहार की मधुबनी जिले के मंगरौनी ग्राम में ऐसा अद्भुत श्री श्री 108 एकादश रूद्र महादेव मंदिर है। यह मधुबनी बस स्टैंड से मात्र 3 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। कराची पीठ के शंकराचार्य जयेंद्र सरस्वती जब आए थे तो एक ही शक्तिपीठ वेदी पर भगवान शंकर के 11 अलौकिक रुप को देखकर भावुक हो गए और कह उठे कि इस तरह का मंदिर विश्व में एकमात्र है। यहां तांत्रिक विधि से शिव के 11 लिंग रूपों को स्थापित किया गया है।

Nageshwarnathtemple

अयोध्या की पहचान है भगवान राम के पुत्र राजा कुश का बनवाया नागेश्वरनाथ मंदिर

पुण्य सलिला सरयू नदी के किनारे स्थापित प्राचीन नागेश्वरनाथ मंदिर इस बात का द्योतक भी है कि जिस स्थान पर भगवान नागेश्वरनाथ का मंदिर है वही प्राचीन अयोध्या है। इस पौराणिक नगरी को राजा विक्रमादित्य ने बसाया था और इस प्राचीन मंदिर का जीर्णोद्धार भी उन्हीं के द्वारा कराया गया था। धार्मिक मान्यताओं में आज भी बाबा नागेश्वरनाथ अयोध्या की पहचान के रुप में जाने जाते हैं और देश के कोने कोने से आने वाले भक्त श्रद्धालुओं के लिए आस्था और श्रद्धा का केंद्र है।