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Chhath Puja 2021: लोक आस्था का पर्व छठ आज से शुरू

हमारे देश में सूर्योपासना के लिए प्रसिद्ध पर्व है छठ। मूलत: सूर्य षष्ठी व्रत होने के कारण इसे छठ कहा गया है । यह पर्व वर्ष में दो बार मनाया जाता है । पहली बार चैत्र में और दूसरी बार कार्तिक में । चैत्र शुक्लपक्ष षष्ठी पर मनाए जाने वाले छठ पर्व को चैती छठ व कार्तिक शुक्लपक्ष षष्ठी पर मनाए जानेवाले पर्व को कार्तिकी छठ कहा जाता है । पारिवारिक सुख-स्मृद्धि तथा मनोवांछित फलप्राप्ति के लिए यह पर्व मनाया जाता है । इस पर्व को स्त्री और पुरुष समानरूप से मनाते हैं । छठ व्रत के संबंध में अनेक कथाएं प्रचलित हैं; उनमें से एक कथा के अनुसार जब पांडव अपना सारा राजपाट जुए में हार गए, तब द्रौपदी ने छठ व्रत रखा । तब उसकी मनोकामनाएं पूरी हुईं तथा पांडवों को राजपाट वापस मिल गया। लोक परंपरा के अनुसार सूर्य देव और छठी मइया का संबंध भाई-बहन का है । लोक मातृका षष्ठी की पहली पूजा सूर्य ने ही की थी ।

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जानिए! पुराण के अनुसार महापर्व छठ पूजा की कथा

कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को महापर्व छठ का पर्व मनाया जाता है। इस दिन सूर्यदेव की बहन छठ मैया और सूर्यदेव की पूजा करने का विधान है।      

धार्मिक मान्यता के अनुसार छठ का व्रत संतान की प्राप्ति, कुशलता और उसकी दीर्घायु की कामना के लिए किया जाता है। चतुर्थी तिथि पर नहाय-खाय से इस पर्व की शुरुआत हो जाती है और षष्ठी तिथि को छठ व्रत की पूजा, व्रत और डूबते हुए सूरज को अर्घ्य के बाद अगले दिन सप्तमी को उगते सूर्य को जल देकर प्रणाम  करने के बाद व्रत का समापन किया जाता है। इस बार 8 नवंबर को नहाय-खाय से छठ व्रत शुरू हो गया है। अगले दिन कल 9 नवंबर को खरना किया जाएगा और 10 नवंबर षष्ठी तिथि को मुख्य छठ पूजन किया जाएगा और अगले दिन 11 नवंबर सप्तमी तिथि को छठ पर्व के व्रत का पारणा किया जाएगा।

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Bhaidooj 2021: जानें भाईदूज का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और पौराणिक कथा

कार्तिक के हिंदू महीने में शुक्ल पक्ष के दूसरे चंद्र दिवस के रूप में मनाया जाता है। भाईदूज का पर्व भाई-बहन के स्नेह, त्याग और समर्पण का प्रतीक है। इस दिन बहनें अपने भाई को टीका कर उनकी लंबी उम्र और समृद्धि की कामना करती है। भाई-बहन के प्यार के प्रतीक भाईदूज का पर्व दीपावली के तीसरे दिन पड़ता है। 6 नवंबर को पड़ने वाले भाईदूज के साथ ही दीपोत्सव के पर्व का भी समापन हो जाएगा। 

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Chhath Puja 2021: श्रद्धा भक्ति और लोक आस्था का प्रतीक महापर्व 'छठ'

भारतीय संस्कृति के दो पहलू हैं- आध्यात्मिकता और पर्व त्यौहार। पर्व त्यौहार हमें एक दूसरे की परम्पराओं से जोड़े रहते हैं। आपसी प्रेम व् भाईचारे की भावना को सुदृढ़ करते हैं। त्यौहार हमारी गंगा यमुना तहजीब के प्रतीक हैं, हमारी संस्कृति के पोषक व रक्षक हैं।

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Diwali 2021: लक्ष्मी पूजन का अध्यात्मशास्त्रीय महत्व

दिवाली का हिंदू त्योहार या रोशनी का त्योहार 2,500 साल से अधिक पुराना है। यह हर साल दुनियाभर के हिंदू समुदायों द्वारा धूमधाम से मनाया जाता है। हर साल कार्तिक माह की अमावस्या को मनाई जाने वाली दिवाली इस साल 4 नवंबर, वीरवार को मनाई जाएगी। दिवाली देवी लक्ष्मी को समर्पित एक उत्सव है। इस दिन, उपासक समृद्धि और धन की देवी लक्ष्मी की पूजा-प्रार्थना करते हैं। किंवदंतियों के अनुसार, इस दिन, देवी लक्ष्मी अपने उपासकों के पास जाती हैं और उन्हें उपहार देती हैं।