Swastik

स्वास्तिक को क्यों माना जाता है मंगल प्रतीक, जानिए! इसके लाभ, प्रभाव और महत्त्व

किसी भी शुभ कार्य को आरंभ करने से पहले हिन्दू धर्म में स्वास्तिक का चिन्ह बनाकर उसकी पूजा करने का महत्व है। मान्यता है कि ऐसा करने से कार्य सफल होता है। स्वास्तिक के चिन्ह को मंगल प्रतीक भी माना जाता है।

स्वास्तिक शब्द को ‘सु’ और ‘अस्ति’ का मिश्रण योग माना जाता है। यहां ‘सु’ का अर्थ है शुभ और ‘अस्ति’ से तात्पर्य है होना। अर्थात स्वास्तिक का मौलिक अर्थ है ‘शुभ हो’, ‘कल्याण हो’। विवाह, मुंडन, संतान के जन्म और पूजा पाठ के विशेष अवसरों पर स्वस्तिक का चिन्ह बनता है।

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राहु गोचर 2020ः जानिए इसका आपकी राशि पर क्या पड़ेगा प्रभाव

23 सितंबर, 2020 को सुबह लगभग 5 बजकर 28 मिनट पर राहु मिथुन से वृषभ राशि में गोचर करेगा और 12 अप्रैल, 2022 तक रहेगा, लगभग 18 महीने। वैदिक ज्योतिष में राहु को छाया ग्रह के रूप में माना जाता है, लेकिन इसका प्रभाव हर राशि पर देखा जाता है। आमतौर पर, यह उस ग्रह के अनुसार परिणाम दिखाता है जिसमें इसे रखा गया है। हालांकि, अगर इसे अकेले रखा गया है, तो यह शनि के परिणाम को ही दर्शाता है। यदि राहु सकारात्मक है तो राज योग, वित्तीय लाभ और विदेश यात्रा देने की क्षमता रखता है। लेकिन अगर यह नकारात्मक है, तो यह निराशा, भ्रम, आलस्य, वासना देगा। राहु के इस गोचर का प्रभाव सभी राशियों पर शुभ-अशुभ रूप में पड़ेगा। 8 राशियों पर राहु का गोचर लाभकारी रहने के प्रबल संकेत दे रहा है, लेकिन 4 राशियों के लिए राहु का परिवर्तन कष्टकारी रहने के संकेत है। ये राशियां इस प्रकार हैं...

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बुधवार के लिए आपका लकी नंबर और शुभ रंग

अंक ज्योतिष की गणना में किसी व्यक्ति का मूलांक उस व्यक्ति की तारीख का योग होता है। उदाहरण के लिए समझिए यदि किसी व्यक्ति का जन्म 23 अप्रैल को हुआ है तो उसकी जन्म तारीख के अंकों का योग 2+3=5 आता है। यानि 5 उस व्यक्ति का मूलांक कहा जाएगा। अगर किसी की जन्मतिथि दो अंकों यानि 11 है तो उसका मूलांक 1+1= 2 होगा। वहीं जन्म तिथि, जन्म माह और जन्म वर्ष का कुल योग भाग्यांक कहलाता है। जैसे अगर किसी का जन्म 22- 04- 1996 को हुआ है तो इन सभी अंकों के योग को भाग्यांक कहा जाता है।

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ज्योतिषः घर पर रंगाई-पुताई जन्म कुंडली में शुभ ग्रह देखकर ही करवाएं


कई बार वास्तु व ग्रह अनुकूल होने पर भी मन अशांत, भ्रमित और व्याकुल हो जाता है। इसका कारण का रंग भी हो सकता है। रंगों का अपना सिद्धांत होता है। प्रकृति ने हमें अनेक रंग प्रदान किए हैं परंतु वे सभी अलग-अलग प्रभाव हमारे जीवन में डालते हैं। भवन का रंग-रोगन करवाने से पूर्व कुंडली के ग्रहों पर भी विचार अवश्य करना चाहिए। वास्तु शास्त्र के अंतर्गत इस विषय में कुछ ध्यान रखने योग्य बाते हैं, जो इस प्रकार हैं