Karwachauth

जानिये! करवाचौथ पूजा का शुभ मुहूर्त, कौन सा योग बना रहा है इस दिन को शुभ

करवाचौथ हर साल पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है। इस दिन, विवाहित महिलाएं पूरे दिन निराजल उपवास रखती हैं और अपने पति की लंबी आयु और खुशहाल विवाहित जीवन के लिए प्रार्थना करती हैं। यह दिन, जो कार्तिक माह में पूर्णिमा के चौथे दिन आता है, भगवान शिव और देवी पार्वती के मिलन का उत्सव भी है। यह त्योहार देश के उत्तरी और उत्तर-पश्चिमी हिस्सों में बहुत महत्व रखता है। महिलाएं अपना उपवास तोड़ती हैं, जो सूर्याेदय से पहले शुरू होता है, एक बार शाम को चंद्रमा दिखाई देता है। इस वर्ष करवा चौथ का व्रत 24 नवंबर दिन रविवार को निर्धारित है।

Oct

जानिये! 23 अक्टूबर की महत्त्वपूर्ण घटनाएँ

1707 - ग्रेट ब्रिटेन साम्राज्य की संसद को पहली बार लंदन में मिलाया गया
1760 - उत्तर अमेरिका में यहूदी प्रार्थना की पहली किताब मुद्रित हुई
1764 - मीर कासिम बक्सर की लड़ाई में पराजित हुआ
1814 -  विश्व की पहली प्लास्टिक सर्जरी इंग्लैंड में की गयी

Triyugi Narayan Temple

त्रियुगीनारायण मंदिर भगवान शिव और देवी पार्वती के विवाह के लिए क्यों है प्रसिद्ध?

उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले के त्रियुगीनारायण गांव में स्थित एक हिंदू मंदिर है। प्राचीन मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित है। त्रियुगीनारायण मंदिर को स्थानीय लोगों के बीच त्रिजुगी नारायण मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। त्रियुगी नारायण मंदिर एक शांतिपूर्ण और सुरम्य शाम प्रदान करता है। त्रियुगीनारायण मंदिर की सुंदरता आंखों को काफी ठंडक देती है। वेदों में उल्लेख है कि इस त्रिजुगीनारायण मंदिर की स्थापना त्रेता युग में हुई थी, जबकि केदारनाथ और बद्रीनाथ की स्थापना द्वापर युग में हुई थी।

SharadPurnima

Sharad Purnima: शरद पूर्णिमा में चंद्रमा 16 कलाओं से युक्त पृथ्वी पर करता है अमृत वर्षा: आचार्य शुभ दर्शन

आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की जो पुर्णिमा होती है उसे शरद् पुर्णिमा कहा जाता है। शरद् पूर्णिमा को हरियाणा व अन्य कुछ क्षेत्रों में महारास पूर्णिमा के नाम से जाना जाता है, तो वहीं उत्तर मध्य भारत में कोजागर पुर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है।

युं तो वर्षभर में बारहों पुर्णिमा का का अपना अलग शास्त्रीय और पौराणिक महत्त्व है, किन्तु शरद् पुर्णिमा का हमारे शास्त्रों में विशेष महत्व बताया गया है।

Horrormovie

‘हॉरर’ चलचित्र देखने से व्यक्ति की नकारात्मकता में होती है प्रचंड वृद्धि: शोध

हम मनोरंजन के लिए चलचित्र देखते हैं; परंतु भयदायक चलचित्र (‘हॉरर’) देखने के उपरांत उस चलचित्र का हम पर आध्यात्मिकदृष्टिसे क्या परिणाम हुआ है, इसका विचार न करते हुए हम अपना काम प्रारंभ कर देते हैं; परंतु भयदायक चलचित्र का परिणाम व्यक्ति पर बडी मात्रा में होता है और व्यक्ति की नकारात्मकता प्रचंड मात्रा में बढती है, ऐसा प्रतिपादन महर्षि अध्यात्म विश्‍वविद्यालय के श्री. शॉन क्लार्क ने किया । श्रीलंका के ‘इंटरनेशनल इन्स्टिट्यूट ऑफ मैनेजमेंट’ ने श्रीलंका में आयोजित की हुई 8 वीं ‘सामाजिक विज्ञान परिषद’ में वे बोल रहे थे । उन्होंने भयदायक चलचित्र (हॉरर मूवी) सूक्ष्म परिणाम’ यह शोधनिबंध प्रस्तुत किया । महर्षि अध्यात्म विश्‍वविद्यालय के संस्थापक परात्पर गुरु डॉ. जयंत बाळाजी आठवलेजी इस शोधनिबंध के लेखक तथा श्री. शॉन क्लार्क सहलेखक हैं ।