नीति आयोग और पिरामल फाउंडेशन ने बालिका दिवस पर मेरी बिटिया मेरी पहचान का किया आयोजन

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दंतेवाड़ा: जिला प्रशासन दंतेवाड़ा और जिला शिक्षा विभाग के सहयोग से आकांक्षी जिला कार्यक्रम के तहत नीति आयोग की सहयोगी संस्था पिरामल फाउंडेशन ने जिले की बालिकाओं में सामाजिक, नैतिक और भावनात्मक विकास के लिए सक्षम बिटिया अभियान की शुरुआत की है। यह कार्यक्रम जिले के सभी सरकारी स्कूलों में चलाया गया। 11 अक्टूबर को विश्व भर में अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस के रूप में मनाया जाता है। इसी के तहत दंतेवाड़ा जिले के सभी स्कूलों में 8 से 11 अक्टूबर तक चार दिवसीय कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिसमें जिले के 910 विद्यालयों के छात्र, छात्राओं, शिक्षकों और अभिभावकों ने बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया।

बालिकाओं को शिक्षा के महत्व के प्रति जागरूक किया। कार्यक्रम का शुभारंभ 8 अक्टूबर को किया गया था। जिसमें विद्यालय स्तर पर शिक्षकों, अभिभावकों, समुदाय और एसएमडीसी सदस्यों की बैठक हुई। जिसमें छात्रों की कक्षा में अनियमितता, छात्रों के पठन कौशल एवं लेखन शैली पर जोर एवं कमजोर तथा होशियार छात्रों के प्रदर्शन और बालिका शिक्षा पर विशेष ध्यान को लेकर अभिभावकों से चर्चा की गई। 9 अक्टूबर को सभी विद्यालयों में क्रीड़ा प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। जिसमें छात्रों और अभिभावकों ने हिस्सा लिया और विद्यालय स्तर पर उन्हें पुरस्कृत किया गया।

10 अक्टूबर को सभी छात्रों को घर पर चित्रकला एवं शिल्पकला तैयार करने को कहा गया। जिसमें बालिकाएं अपनी कला का प्रदर्शन कर सकें। चित्रकला का विषय मेरा परिवार या मेरा गांव या मेरा विद्यालय रखा गया था। 11 अक्टूबर अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस पर मेरी बिटिया मेरी पहचान का आयोजन किया गया। जिसमें अभिभावकों से अपने घरों के बाहर बिटिया के नाम के साथ मेरी बिटिया मेरी पहचान लिख कर अपनी बेटियों के लिए एक बेहतर भविष्य चुनने, उनका सम्मान करने और उनमें आत्मविश्वास की भावना जगाने के लिए प्रेरित किया गया।

साथ ही शिक्षकों द्वारा विद्यालय स्तर पर विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन जिसमें बच्चों द्वारा लोक नृत्य, लोक गीत, नाट्यकला की प्रस्तुती दी गई एवं वृक्षारोपण किया गया, साथ ही बालिकाओं द्वारा तैयार किए गए चित्रकला एवं शिल्पकला की प्रदर्शनी लगाई गई। बच्चों, बालिकाओं व अभिभावकों को प्रेरित करने हेतु भारत की प्रसिद्ध महिला हस्तियों की जीवन गाथा सुनाई गई साथ ही शिक्षा से प्राप्त की गई उनकी उपलब्धियों की जानकारी दी गई। कार्यक्रम के अंत में बालिकाओं और उनके अभिभावकों ने नियमित स्कूल आने, उच्च शिक्षा ग्रहण करने एवं अपना भविष्य उज्जवल बनाने के लिए शपथ ग्रहण किया।

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