'सजग अभियान' से कोरोना काल में बच्चों के विकास को मिली गति

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सुकमा: बच्चों के विकास में उनके जीवन के शुरुआती सात-आठ साल बहुत महत्वपूर्ण होते हैं। पिछले साल 22 मार्च को देश भर में कोविड के चलते लॉक डाऊन की घोषणा के फलस्वरुप प्रदेश के आंगनबाड़ी और ऐसी सभी संस्थाएं बंद करनी पड़ीं जहां बच्चों को सीखने-जानने के अवसर मिलते थे। बड़े, बच्चे सभी घरों में बंद हो गए। ये स्थिति कब तक बनी रहने वाली है, अनुमान लगाना कठिन था। पर बच्चों के लिए ये समय बहुत महत्वपूर्ण था। अब बच्चों के लिए जानने-समझने का एक ही जरिया बाकी था, उनके पालक जो उनके साथ थे। कोरोना काल के इस विकट दौर में सजग कार्यक्रम से बच्चों के विकास के गति अवरुद्ध नहीं हुई। इस कार्यक्रम के तहत महिला एवं बाल विकास विभाग के साथ समाज सेवी संस्था सेंटर फॉर लर्निंग रिसोर्सेस (सी.एल.आर.) द्वारा यूनिसेफ के सहयोग से बच्चों के लालन पालन से जुड़ी जरूरी बातों पर आधारित छोटे-छोटे ऑडियो संदेश तैयार किए। जिन्हें लेकर आंगनबाड़ी कार्यकर्ताएँ परिवारों तक पहुँची और उन्हें जरूरी जानकारी उपलब्ध कराती गई।

हर पंद्रह दिनों में किसी एक जरूरी जानकारी पर आधारित लगभग पाँच मिनट का संदेश सी.एल.आर. द्वारा तैयार किया जाता है। ये संदेश डायरेक्ट्रेट महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा सभी जिलों के कार्यक्रम अधिकारियों को व्हाट्सएप के जरिए भेजा जाता है। जिसे वो अपने सीडीपीओ को और फिर सभी सीडीपीओ अपने पर्यवेक्षिकाओं को भेजते हैं। पर्यवेक्षिकाएं संदेश आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को भेजती हैं।

जिले में कठिनाईयों के बावजूद कार्यकर्ताएं घर-घर पहुंचा रहीं संदेश

जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारी श्री अतुल परिहार ने बताया कि सुकमा जिले में अधिकांश कार्यकर्ताओं के पास मोबाइल नहीं होने, नेटवर्क नही होने के बावजूद सेक्टर सुपरवाइजर द्वारा मीटिंग में चर्चा कर संदेश की साझा समझ प्रसारित करने का कार्य किया गया। महिला एवं बाल विकास विभाग ने संदेशों को सिर्फ आगे भेजने का काम नहीं किया बल्कि उसे खुद सुना, समझा और फिर पालकों को समझाया। डायरेक्ट्रेट से संदेश जिले के कार्यक्रम अधिकारियों तक पहुँचने के बाद संभाग स्तर पर ऑन लाईन चैपाल का आयोजन के माध्यम से संदेश में कही गई बातों पर गहराई से समझ बनाने का कार्य किया गया। इस तरह सभी स्तरों पर आॅनलाईन चैपाल के माध्यम से अमले के लोग एक दूसरे के अनुभव से सीख पाते हैं और कार्यकर्ता की समझ तैयार कर पाते हैं ताकि वो पालकों को बातें भली-भांति समझा सके। पोषण आहार वितरण के दौरान आंगनबाड़ी कार्यकर्ता पालकों के घरों में जाकर इन संदेशों को उन्हें सुनाकर जरूरी बातें समझातीं हैं। कार्यकर्ताएँ पालकों से मिलकर उनकी अपनी बोली भाषा में संदेशों को समझाने बात-चीत करती हैं। इसके साथ ही जिन पालकों के पास स्मार्टफोन और व्हाट्सएप जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं, उन पालकों के ग्रुप के जरिए भी संदेश पहुंचाया जाता हैं।

सजग अभियान को पूर्ण हुए एक साल

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल द्वारा गत वर्ष अप्रैल में छतीसगढ़ राज्य में डिजिटल प्लेटफार्म पर सजग कार्यक्रम की शुरुआत की गई ताकि कोरोना महामारी की स्थिती में भी बच्चों के विकास की प्रकिया निरंतर जारी रहे। महिला एवं बाल विकास विभाग के साथ समाज सेवी संस्था सेंटर फॉर लर्निंग रिसोर्सेस (सीएलआर) द्वारा यूनिसेफ के सहयोग से चलाए जा रहे इस कार्यक्रम के जरिए छोटे बच्चों के लालन-पालन से जुड़ी जरूरी बातों की जानकारी साल भर ऑडियो श्रृंखला के रूप में पालकों तक पहुंचाई गई। कोविड के कठिन दौर में सजग ऑडियो की ये कड़ियां माता-पिता और अन्य परिजनों के लिए बच्चे के विकास में सहायक घर का वातावरण बनाने और बच्चों में भावी जीवन को गढ़ने की क्षमता तैयार करने में मददगार साबित हुई है।

सजग ऑडियो संदेशों ने पालकों को खुद को संभालने के तरीके सुझाए। परिवार में तनावमुक्त वातावरण तैयार करने की समझ दी। बच्चों को कैसे संभालें, उनके जीवन की नीव को कैसे मजबूत करें, इसकी जानकारी पालकों को मिली। छत्तीसगढ़ राज्य में करीब सात लाख अभिभावकों तक यह संदेश पहुंच रहे हैं। एक साल बाद अब सजग अभियान अपने दूसरे साल में प्रवेश कर गया है। कार्यक्रम के अंतर्गत अब अभिभावक कैसे बच्चों के लिए छोटे-छोटे खेल, ढेर सारी बातचीत और प्यार-दुलार का वातावरण बना सकते हैं इस संबध में सजग संदेश भेजे जाएंगे।

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