FossilFuel

क्या अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी ने जीवाश्म ईंधन युग के अंत की शुरुआत घोषित कर दी है?

in Op-ed

जीवाश्म ईंधन पर अंकुश लगाने की अब तक की सबसे बड़ी चेतावनी देते हुए ऊर्जा क्षेत्र की शीर्ष वैश्विक निगरानी संस्था अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (आईईए) ने साफ़ कर दिया है कि अगर दुनिया मध्य शताब्दी तक नेट ज़ीरो उत्सर्जन के स्तर तक पहुंचना चाहती है तो निवेशकों को तेल, गैस और कोयले की आपूर्ति परियोजनाओं में नया वित्त पोषण नहीं करना चाहिए।

Fossilfuel

इन 11 देशों के धार्मिक संगठनों ने किया जीवाश्‍म ईंधन कारोबार से हर नाता तोड़ने का ऐलान

in Op-ed

दुनिया के 11 देशों के 36 धार्मिक संगठनों ने आज खुद को जीवाश्‍म ईंधन के कारोबार से अपना हर नाता तोड़ने का ऐलान किया। इन ११ देशों में भारत समेत ब्राज़ील, अर्जेंटीना, फिलीपींस, उगांडा, इटली, स्‍पेन, स्विटजरलैंड, आयरलैंड, ब्रिटेन और अमेरिका के संगठन शामिल हैं। यह ऐलान जी7 शिखर बैठक को लेकर विभिन्न देशों के नेताओं की तैयारियों के बीच 36 और धार्मिक संगठनों द्वारा किया गया है। भारत के तमिलनाडु में कैथोलिक यूथ मूवमेंट जीवाश्‍म ईंधन से मुक्ति पाने के अभियान में शामिल हो गया है।

Tauktea

लगातार चौथे साल अरब सागर में आया चक्रवाती तूफ़ान, तौकते भी साफ़ तौर पर जलवायु परिवर्तन की पहचान

in Op-ed

फ़िलहाल जो तौकते नाम के तूफ़ान से जाना जा रहा है, अगले कुछ घंटों में "गंभीर चक्रवाती तूफान" की शक्ल ले सकता है, ये कहना है भारतीय मौसम विभाग का । इस बात का भी अंदेशा है कि यह गंभीर चक्रवाती तूफ़ान मंगलवार तक गुजरात तट से टकरा सकता है।

बाहरहाल, यह तूफ़ान दरअसल जलवायु परिवर्तन की चीख ही है क्योंकि लगातार चार सालों से अरब सागर में, मानसून से पहले, भीषण चक्रवाती तूफ़ान जन्म ले रहे है। फ़िलहाल यह तूफान मज़बूत होता जा रहा है और अपनी गति से गुजरात एवं केंद्र शासित प्रदेश दमन-दीव एवं दादरा-नगर हवेली की ओर बढ़ रहा है। इस तूफ़ान ने रौद्र रूप धारण कर लिया है और गुजरात और महाराष्ट्र के तटीय इलाकों में तमाम अस्पतालों से कोरोना के मरीजों को किसी भारी आपदा के डर से  सुरक्षित स्थानों पर ले जाया गया है।

Climate Change

सिर्फ़ पौधे लगाने से ग्लोबल वार्मिंग नहीं रुकेगी: नेचर

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‘नेचर-बेस्ड सॉल्यूशंस' (NBS) सदी के अंत तक ही जलवायु परिवर्तन के खिलाफ हमारी लड़ाई में योगदान कर सकते हैं। नेट ज़ीरो होने की चर्चाओं में अमूमन कार्बन को कम करने के लिए 'नेचर-बेस्ड सॉल्यूशंस' (NBS) या प्राकृति पर निर्भर तरीकों का ज़िक्र होता है। जैसे जंगलों की रक्षा और उनको बढ़ाना क्योंकि वो कार्बन सोखते हैं या इसी वजह से बड़े पैमाने पर पेड़ पौधे लगाने की पहल आदि।

COAL

इस स्विस बैंक से जुड़े कोयला संयंत्रों की वजह से रोज़ 51 मौतें होंगी

in Op-ed

सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर (CREA) के नए शोध के अनुसार, HSBC बैंक के स्वामित्व हिस्सेदारी वाली कंपनियों द्वारा निर्मित और नियोजित नए कोयला संयंत्रों से प्रति वर्ष वायु प्रदूषण अनुमानित 18,700 मौतों का कारण बनेगा। दूसरे शब्दों में, हर रोज़ लगभग 51 लोगों की मौतों का कारण बनेंगे ये संयंत्र।

इन कोयला संयंत्रों के पूरे होने पर इनसे वायु प्रदूषण के कारण अस्थमा से  29,000 अस्पताल के आपातकालीन दौरे, 25,000 असामयिक प्रसव जन्म और प्रति वर्ष 14 मिलियन दिनों की रोज़गार कार्य अनुपस्थिति होगी। स्वास्थ प्रभाव की प्रति वर्ष लागत 6.2 बिलियन अमरीकी डालर की गणना से मेल कहती है, और अनुमानित मौतें भारत में सबसे ज़्यादा  (प्रति वर्ष 8,300 मौतें), इसके बाद चीन (4,200), बांग्लादेश (1,200), इंडोनेशिया (1,100), वियतनाम (580) और पाकिस्तान (450) हैं।