Netzero

जलवायु निष्क्रियता की कीमत नेट ज़ीरो होने के खर्चे से कहीं ज़्यादा

in Op-ed

मौजूदा वार्मिंग प्रवृत्ति जारी रहने पर जलवायु परिवर्तन से आर्थिक नुकसान 2025 तक प्रति वर्ष $ 1.7 ट्रिलियन तक पहुंच जाएगा, और 2075 तक लगभग 30 ट्रिलियन डॉलर प्रति वर्ष (अनुमानित GDPका 5%) तक पहुंच जाएगा। जलवायु कार्रवाई को रोकने या टालने के इरादे से राजनेता अक्सर तर्क देते हैं कि इसमें बहुत अधिक लागत आएगी। कभी-कभी वे उन आर्थिक मॉडलों का उल्लेख करते हैं जो 1990 के दशक से जलवायु बेहतर करने के लिए उठाये कदमों के सापेक्ष वार्मिंग के विभिन्न स्तरों के "लागत बनाम लाभ" को निर्धारित करने के लिए विकसित किए गए हैं।

Climate Change

Climate Change: जलवायु परिवर्तन पर केन्‍द्रीय बैंकों की कथनी और करनी में फ़र्क

in Op-ed

जी20 देशों के केंद्रीय बैंकों में है उच्‍च प्रभावशीलता वाली जलवायु सम्बन्धी नीतियों का गहरा अभाव, कहना है इस महत्वपूर्ण रिपोर्ट का

जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर लम्‍बे-लम्‍बे भाषण देने वाले दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के शीर्ष वित्तीय और मौद्रिक इकाइयों के जिम्मेदार लोग अपनी ही कही बात पर अमल नहीं कर रहे हैं। शोध एवं अभियानकर्ता समूह‘पॉजिटिव मनी’ द्वारा आज प्रकाशित रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है।

Coalpower

बिजली की मांग और कोयला बिजली उत्पादन में भी पिछले साल चीन रहा नम्बर एक

in Op-ed

जहाँ पूरी दुनिया में पिछले साल लगे लॉक डाउन और मंदी के चलते बिजली की मांग घट गयी थी, वहीँ चीन में न सिर्फ बिजली की मांग बढ़ी, बल्कि कोयले से बनी बिजली के उत्पादन में भी चीन में बढ़त दर्ज की गयी। और फ़िलहाल चीन अब दुनिया के कुल कोयला आधारित बिजली उत्पादन के आधे से भी ज़्यादा, 53 फ़ीसद, के लिए ज़िम्मेदार है।

इन तथ्यों का ख़ुलासा एनर्जी थिंक टैंक एम्बर ने अपनी ताज़ा रिसर्च रिपोर्ट के ज़रिये किया। रिपोर्ट की मानें तो चीन ही G20 का अकेला देश था जिसने महामारी वर्ष के दौरान कोयला उत्पादन में बड़ा इजाफा देखा । वहीँ 2020 में पूरी दुनिया में कोयला उत्पादन में रिकॉर्ड गिरावट दर्ज की गई, जिसमें भारत और उसके अलावा अन्य देश भी शामिल हैं जो कोयला ऊर्जा शक्ति के रूप में जाने जाते थे ।

Windenergy

विंड एनर्जी ने एशिया पैसिफिक को 110 मिलियन कारों के धुंए से दी निजात

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उम्मीद है कि एशिया पैसिफिक क्षेत्र अगले पांच सालों में विंड एनर्जी उत्पादन क्षमता विकास को यूँ ही गति देता रहेगा और 2021-2025 दुनिया की अनुमानित विंड एनर्जी क्षमता की आधी से ज़्यादा अपने नाम कर लेगा, लेकिन GWEC की ताज़ा रिपोर्ट चेतावनी देती है कि वैश्विक जलवायु लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए अगले दशक में तीन गुना तेज़ी से नई पवन ऊर्जा क्षमता स्थापित करनी होगी।

Netzero

Climate Change: दुनिया के आधे से ज़्यादा देश नेट ज़ीरो होने के लिए तैयार

in Op-ed

दुनिया के 61 प्रतिशत देश, दुनिया के सबसे ज़्यादा प्रदूषण करने वाले देशों में 9 प्रतिशत राज्य और 50 लाख की आबादी से अधिक वाले 13 प्रतिशत शहर अब नेट जीरो कार्बन एमिशन के लिए प्रतिबद्ध हैं। यही नहीं, लगभग 14 ट्रिलियन डॉलर का कारोबार करने वाली दुनिया की 2,000 सबसे बड़ी सार्वजनिक कंपनियों में से हर पांचवी कम्पनी (21% कंपनियां) ने भी नेट ज़ीरो कार्बन एमिशन का लक्ष्य हासिल करने का इरादा कर लिया है।