Bden

बाइडेन की क्लाइमेट समिट तय करेगी दुनिया में जलवायु परिवर्तन की दशा और दिशा

in Op-ed

जलवायु परिवर्तन के खिलाफ कार्रवाई के प्रति अमेरिका एक बार फिर संजीदा है। यही वजह है कि अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने उन 40 देशों के नेताओं को आमंत्रित किया है जो कार्बन उत्सर्जन में सबसे ज्यादा योगदान करते हैं। इसके अलावा आमंत्रितों में कुछ ऐसे देश भी शामिल हैं जो जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के लिहाज से सबसे ज्यादा खतरे में हैं। दुनिया के इन नेताओं का जमावड़ा आगामी 22-23 अप्रैल को ‘लीडर्स समिट ऑन क्लाइमेट’ नामक वर्चुअल बैठक में होगा। इस समिति को जलवायु संबंधी महत्वाकांक्षा को पुनर्जीवित करने के एक बड़े मौके के तौर पर देखा जा रहा है, क्योंकि अनेक देश बदतर होती जा रही कोविड-19 महामारी और अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर पैदा हो रही कठिनाइयों का हल निकालने के लिए योजना तैयार करने में मसरूफ हैं। इस साल नवंबर में स्कॉटलैंड के ग्लासगो में जलवायु परिवर्तन के विषय पर आयोजित होने जा रही महत्वपूर्ण बैठक से पहले राष्ट्रपति बाइडन द्वारा बुलाई गई यह बैठक इस बात का लिटमस टेस्ट होगा कि अमेरिका जलवायु परिवर्तन पर वैश्विक कार्रवाई को किस तरह से प्रेरित करता है।

ClimateChange

प्रदूषण मुक्‍त स्‍वास्‍थ्‍य व्‍यवस्‍था के लिये जारी हुआ वैश्विक रोड मैप

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स्‍वास्‍थ्‍य क्षेत्र को पैरिस समझौते के तहत वैश्विक तापमान में वृद्धि को 1.5 डिग्री सेल्सियस से नीचे रखने के महत्‍वाकांक्षी लक्ष्‍य के अनुरूप बनाने के लिये अपनी तरह के पहले मार्गदर्शक निर्देश

प्रदूषण से पूरी तरह मुक्‍त स्‍वास्‍थ्‍य व्‍यवस्‍था के लिये, हेल्‍थ केयर विदआउट हार्म और अरूप नामक संस्थाओं ने एक रोड मैप जारी किया है। यह रोड मैप 2021 स्‍कोल वर्ल्‍ड फोरम में जलवायु सततता और स्‍वास्‍थ्‍य समानता के साथ शून्‍य उत्‍सर्जन के लक्ष्‍य को हासिल करने के लिहाज से एक नेविगेशनल टूल है।

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कार्बन-सघन वस्तुओं के आयात को दंडित करेगा यूरोपीय संघ, प्रस्तावित नियम को लेकर विशेषज्ञों में संशय

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जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए सबसे महत्वाकांक्षी सरकारी योजनाओं में से एक, यूरोपीय संघ की ग्रीन डील साल 2050 तक यूरोपीय देशों के इस समूह की अर्थव्यवस्था को नेट ज़ीरो उत्सर्जन तक पहुँचाने के उद्देश्य से बनी नीतियों का एक सेट है। यह अपनी तरह की एक अनूठी और पहली पहल है। लेकिन किसी भी ऐसे महत्वकांक्षी लक्ष्य की ओर पहली बार बढ़ना आसान नहीं। आसान इसलिए नहीं क्योंकि सब कुछ नया और पहली बार होगा।

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भारत का नेट-ज़ीरो होना संभव, लेकिन जटिल भी!

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जिस जलवायु परिर्वतन को अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के दौरान ठंडे बस्ते में डाल दिया गया था, उसे जो बिडेन के नेतृत्व में अमेरिका की ओर से दुनिया की सबसे बड़ी प्राथमिकता के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है। इसी सिलसिले में जॉन केरी, जो कि जो बाइडेन के क्लाइमेट दूत हैं, तीन दिन के लिए भारत में रहे। उनकी मौजूदगी की वजह थी क्लाइमेट लीडरसमिट से पहले भारत को नेट ज़ीरो होने या कोई मिलते जुलते महत्वकांक्षी जलवायु लक्ष्य के लिए कायल करना। पीएम नरेंद्र मोदी को भी इस समिट में आमंत्रित किया गया है।

Climate Change

Climate Change: प्राकृतिक अजूबों को भी नष्ट कर सकता है जलवायु परिवर्तन

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यदि ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में वृद्धि जारी रहती है तो दुनिया के सबसे आश्चर्यजनक प्राकृतिक स्थानों के अद्वितीय जानवर और पौधे विलुप्त हो सकते हैं। यह चेतावनी सामने आई है जर्नल बायोलॉजिकल संरक्षण में प्रकाशित एक नए वैज्ञानिक अध्ययन में। हालाँकि पेरिस समझौते के जलवायु लक्ष्यों के भीतर शेष है - जिसका उद्देश्य वैश्विक तापमान को 2°C से नीचे रखना है, आदर्श रूप से 1.5°C पर - बहुसंख्यक प्रजातियों को बचाएगा।