Climate Change

सिर्फ़ पौधे लगाने से ग्लोबल वार्मिंग नहीं रुकेगी: नेचर

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‘नेचर-बेस्ड सॉल्यूशंस' (NBS) सदी के अंत तक ही जलवायु परिवर्तन के खिलाफ हमारी लड़ाई में योगदान कर सकते हैं। नेट ज़ीरो होने की चर्चाओं में अमूमन कार्बन को कम करने के लिए 'नेचर-बेस्ड सॉल्यूशंस' (NBS) या प्राकृति पर निर्भर तरीकों का ज़िक्र होता है। जैसे जंगलों की रक्षा और उनको बढ़ाना क्योंकि वो कार्बन सोखते हैं या इसी वजह से बड़े पैमाने पर पेड़ पौधे लगाने की पहल आदि।

COAL

इस स्विस बैंक से जुड़े कोयला संयंत्रों की वजह से रोज़ 51 मौतें होंगी

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सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर (CREA) के नए शोध के अनुसार, HSBC बैंक के स्वामित्व हिस्सेदारी वाली कंपनियों द्वारा निर्मित और नियोजित नए कोयला संयंत्रों से प्रति वर्ष वायु प्रदूषण अनुमानित 18,700 मौतों का कारण बनेगा। दूसरे शब्दों में, हर रोज़ लगभग 51 लोगों की मौतों का कारण बनेंगे ये संयंत्र।

इन कोयला संयंत्रों के पूरे होने पर इनसे वायु प्रदूषण के कारण अस्थमा से  29,000 अस्पताल के आपातकालीन दौरे, 25,000 असामयिक प्रसव जन्म और प्रति वर्ष 14 मिलियन दिनों की रोज़गार कार्य अनुपस्थिति होगी। स्वास्थ प्रभाव की प्रति वर्ष लागत 6.2 बिलियन अमरीकी डालर की गणना से मेल कहती है, और अनुमानित मौतें भारत में सबसे ज़्यादा  (प्रति वर्ष 8,300 मौतें), इसके बाद चीन (4,200), बांग्लादेश (1,200), इंडोनेशिया (1,100), वियतनाम (580) और पाकिस्तान (450) हैं।

Kivuwatt

मीथेन मिटिगेशन हर साल ढाई लाख से ज़्यादा मौतों को रोक सकता है: संयुक्त राष्ट्र

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संयुक्त राष्ट्र की नेतृत्व में क्लाइमेट एंड क्लीन एयर कोएलिशन (जलवायु और स्वच्छ वायु गठबंधन) द्वारा जारी एक नई रिपोर्ट के अनुसार, हमारे लिए मौजूदा मीथेन मिटिगेशन के उपाय 2045 तक ग्लोबल वार्मिंग को 0.3 डिग्री सेल्सियस तक सीमित कर सकते हैं। इतना ही नहीं, मीथेन मिटिगेशन प्रत्येक वर्ष 255000 समय से पहले होने वाली मौतों, 775000 अस्थमा से संबंधित अस्पताल के दौरों, अत्यधिक गर्मी से 73 अरब घंटो के खोये हुए श्रम, और विश्व भर में 26 मिलियन टन फसल के नुकसान को भी रोकेगा।

Climate Change

यूँ ही हाथ पर हाथ धरे बैठे रहे तो जलवायु परिवर्तन 18% तक घटाएगा वैश्विक GDP

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जिस रफ़्तार पर फ़िलहाल दुनिया चल रही है, उस रफ़्तार और इरादों से पैरिस समझौते के लक्ष्यों को हासिल कर पाना संभव नहीं और साथ ही, जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के परिणामस्वरूप, वर्तमान उत्सर्जन योजनाओं के तहत, 2050 तक विश्व अर्थव्यवस्था 7-10% छोटी हो जाएगी और अगर कार्रवाई धीमी  हुई तो दुनिया की जीडीपी 2050 तक 18% कम हो जाएगी।

Lpg

क्या मौजूदा एलपीजी सब्सिडी व्यवस्था से गरीबों को हो रहा है नुकसान?

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जहाँ लाखों भारतीय तरलीकृत पेट्रोलियम गैस (LPG) (एलपीजी) की कीमत में रिकॉर्ड वृद्धि के लिए सरकार की प्रतिक्रिया का इंतजार कर रहे हैं, विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि अगर सरकार LPG सब्सिडी नीति के डिजाइन में बदलाव नहीं करती है तो गरीब परिवारों को LPG समर्थन से, संपन्न उपभोक्ताओं की तुलना में, 2 गुना कम लाभ हो सकता है।

एक नई रिपोर्ट के अनुसार (जॉन्स हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी में इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर सस्टेनेबल डेवलपमेंट एंड द इनिशिएटिव फॉर सस्टेनेबल एनर्जी पॉलिसी से भारत में LPG सब्सिडियों को कैसे लक्षित किया जाए), जब केंद्र सरकार की सभी ऊर्जा सब्सिडी का लगभग 28% LPG सब्सिडी में शामिल था, तब झारखंड के ग्रामीण और शहरी हिस्सों में सबसे गरीब 40% परिवारों को FY (वित्त वर्ष) 2019 में सरकार LPG सहायता का 30% से कम प्राप्त हुआ ।