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साइकिल से डर नहीं लगता साहब, ट्रैफिक से लगता है!

in Op-ed

बात गाड़ियों के धुंए से पर्यावरण बचाने की हो तो सबसे पहला ख्याल साईकिल का आता है। लेकिन साइकिल चलायें भी तो भला कैसे? एक तरफ तेज़ रफ्तार गाड़ियों की चपेट में आने का डर तो दूसरी तरफ गड्ढों और नालियों में गिर कर चोटिल होने की आशंका - कुल मिलाकर भारत में हालत कतई मुफ़ीद नहीं सायकलिंग के लिए। ऐसा मानना है भारत की जनता का, अगर एक ताज़ा सर्वे की मानें तो।

Trump

ट्रम्प हारे नहीं, पर्यावरण की हुई है जीत

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तीन साल पहले डोनाल्ड ट्रम्प ने जब पैरिस समझौते से हाथ पीछे खींचे थे तब उन्होंने न महज़ एक प्रशासनिक फ़ैसला नहीं लिया था। उन्होंने असल में पूरी दुनिया को जलवायु संकट में झोंका था। उसका असर कुछ ऐसा हुआ कि दुनिया भर में जलवायु नीति पर काम करने वालों में हताशा, और मायूसी ने घर कर लिया।

लेकिन तीन साल बाद, डोनाल्ड ट्रम्प की हार के साथ ही आज उन सभी में जीत की ख़ुशी है। और ये ख़ुशी जो बिडेन की जीत से ज़्यादा इस बात पर है कि अब बिडेन के नेतृत्व में जलवायु परिवर्तन के ख़िलाफ़ वैश्विक जंग में जीत सम्भावना बढ़ गयी है।

Joe Biden

जलवायु परिवर्तन रोकने के लिए व्हाइट हाउस में जो बिडेन की आमद जरूरी

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विश्व इतिहास में शायद पहली बार अमेरिकी चुनावी नतीजे इस कदर फंसे हैं कि उस पर चुटकुले तक बन रहे हैं। मसलन किसी ने सोशल मीडिया पर कहा कि जब तक अमेरिका में राष्ट्रपति चुना जायेगा तब तक अपने बिहार का मुख्यमंत्री चुन लिया जायेगा। स्थिति हास्यास्पद सी लग ज़रूर सकती है लेकिन है नहीं।

Green

क्या ग्रीन रिकवरी दे पा रही है एवरग्रीन रोज़गार के अवसर?

in Op-ed

भारत की ग्रीन रिकवरी से बने रोजगार अवसरों के स्‍थायित्‍व और भौगोलिक स्थिति के लिहाज से उनकी उपलब्‍धता को लेकर सामने हैं कई सवाल

दुनिया में अक्षय ऊर्जा को बढ़ावा दिये जाने के रुख में लगातार तेजी आ रही है मगर इसके कारण उत्‍पन्‍न होने वाले रोजगार अवसरों के स्‍थायित्‍व और भौगोलिक स्थिति के लिहाज से उनकी उपलब्‍धता को लेकर कई सवाल अब भी बने हुए हैं। विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि भारत में अक्षय ऊर्जा पर 100 प्रतिशत निर्भरता के हालात अगले दो दशक तक बनते नजर नहीं आ रहे हैं। सतत विकास के लिए हमें अक्षय ऊर्जा में निवेश करना अनिवार्य है। इससे रोजगार के काफी ज्यादा अवसर बन सकते हैं। ग्रिड से जुड़ी बड़ी अक्षय ऊर्जा परियोजनाओं की संख्या यह तय करेगी कि कितने रोजगार बन सकते हैं और कहां बन सकते हैं। अगर हमें इसका पूरा फायदा उठाता उठाना है तो हमें ग्रामीण कौशल पर पूरा ध्‍यान देने के साथ-साथ घरेलू मैन्‍यूफैक्‍चरिंग और नई प्रौद्योगिकियों को बढ़ावा देना होगा और सतत रूपांतरण के लिए सुस्‍पष्‍ट खाका तैयार करना होगा। एक बड़ा सवाल यह भी है कि पूरे क्षेत्र खास तौर पर अक्षय ऊर्जा में हम सामाजिक सुरक्षा को कैसे सुनिश्चित करें।

Pollution

ग्लोबल दृष्टिकोण में बदलाव के बिना महामारियों के युग से बचना मुश्किलः विशेषज्ञ

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संक्रामक बीमारियों से लड़ने के लिये ग्लोबल दृष्टिकोण में अगर आमूल-चूल बदलाव नहीं किये गये तो भविष्य में महामारियां जल्दी-जल्दी उभरेंगी। साथ ही वे ज्यादा तेजी से फैलेंगी, दुनिया की अर्थव्यवस्था को और ज्यादा नुकसान पहुंचाएंगी और कोविड-19 के मुकाबले ज्यादा तादाद में लोगों को मारेंगी। ऐसा दावा है दुनिया के 22 शीर्ष विशेषज्ञों का जिन्होंने आज जैव-विविधता और महामारियों को लेकर एक रिपोर्ट जारी कर यह चेतावनी दी है।