Green

क्या ग्रीन रिकवरी दे पा रही है एवरग्रीन रोज़गार के अवसर?

in Op-ed

भारत की ग्रीन रिकवरी से बने रोजगार अवसरों के स्‍थायित्‍व और भौगोलिक स्थिति के लिहाज से उनकी उपलब्‍धता को लेकर सामने हैं कई सवाल

दुनिया में अक्षय ऊर्जा को बढ़ावा दिये जाने के रुख में लगातार तेजी आ रही है मगर इसके कारण उत्‍पन्‍न होने वाले रोजगार अवसरों के स्‍थायित्‍व और भौगोलिक स्थिति के लिहाज से उनकी उपलब्‍धता को लेकर कई सवाल अब भी बने हुए हैं। विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि भारत में अक्षय ऊर्जा पर 100 प्रतिशत निर्भरता के हालात अगले दो दशक तक बनते नजर नहीं आ रहे हैं। सतत विकास के लिए हमें अक्षय ऊर्जा में निवेश करना अनिवार्य है। इससे रोजगार के काफी ज्यादा अवसर बन सकते हैं। ग्रिड से जुड़ी बड़ी अक्षय ऊर्जा परियोजनाओं की संख्या यह तय करेगी कि कितने रोजगार बन सकते हैं और कहां बन सकते हैं। अगर हमें इसका पूरा फायदा उठाता उठाना है तो हमें ग्रामीण कौशल पर पूरा ध्‍यान देने के साथ-साथ घरेलू मैन्‍यूफैक्‍चरिंग और नई प्रौद्योगिकियों को बढ़ावा देना होगा और सतत रूपांतरण के लिए सुस्‍पष्‍ट खाका तैयार करना होगा। एक बड़ा सवाल यह भी है कि पूरे क्षेत्र खास तौर पर अक्षय ऊर्जा में हम सामाजिक सुरक्षा को कैसे सुनिश्चित करें।

Pollution

ग्लोबल दृष्टिकोण में बदलाव के बिना महामारियों के युग से बचना मुश्किलः विशेषज्ञ

in Op-ed

संक्रामक बीमारियों से लड़ने के लिये ग्लोबल दृष्टिकोण में अगर आमूल-चूल बदलाव नहीं किये गये तो भविष्य में महामारियां जल्दी-जल्दी उभरेंगी। साथ ही वे ज्यादा तेजी से फैलेंगी, दुनिया की अर्थव्यवस्था को और ज्यादा नुकसान पहुंचाएंगी और कोविड-19 के मुकाबले ज्यादा तादाद में लोगों को मारेंगी। ऐसा दावा है दुनिया के 22 शीर्ष विशेषज्ञों का जिन्होंने आज जैव-विविधता और महामारियों को लेकर एक रिपोर्ट जारी कर यह चेतावनी दी है।

Environment

भारत के 2 बड़े बैंक भी जैव-विविधता को नुकसान के लिए ज़िम्मेदार

in Op-ed

‘बैंकरोलिंग एक्‍सटिंक्‍शन’ नामक जारी एक ताज़ा रिपोर्ट की मानें तो भारत के दो सबसे बड़े बैंक, स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया और HDFC बैंक, लगभग 6984 मिलियन डॉलर ऐसे क्षेत्र में निवेश कर चुके हैं जिनसे जैव विविधता को नुकसान हो रहा है।

दरअसल पोर्टफोलियो अर्थ नामक संस्था द्वारा इस अपनी तरह की इस पहली रिपोर्ट में दुनिया के 50 सबसे बड़े बैंकों और उनके द्वारा उन निवेशों पर गौर किया गया है, जिन्‍हें सरकारें और वैज्ञानिक जैव-विविधता को हो रहे नुकसान के लिये बड़ा जिम्‍मेदार ठहराते हैं। जैव-विविधता  को नुकसान पहुँचाने वाले जिन क्षेत्रों में इन बैंकों ने वित्त पोषण किया है उनमें मुख्य रूप से खनन, कोयला उत्पादन और ऐसे इन्फ्रास्ट्रक्चर का निर्माण जिससे जैव विविधता को नुकसान होता है, शामिल हैं।

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कच्चे तेल के रिसाव का खतरा, पर्यावरणीय आपदा के मुहाने पर दुनिया

in Op-ed

नई दिल्ली: एक ताज़ा मिली जानकारी के मुताबिक़ वेनेजुएला और त्रिनिदाद के बीच, पारिया की खाड़ी में, एक ख़राब और लगभग डूबते तेल टैंकर से 1.3 मिलियन बैरल के करीब कच्चे तेल के समुद्र में गिरने का ख़तरा बन गया है। अगर इस मात्रा में कच्चा तेल समुद्र में गिरता है तो यह मात्रा 1989 के बहुचर्चित एक्सॉन वाल्डेज़ स्पिल के लगभग पांच गुना के बराबर है। टैंकर पेट्रोसुक्रे नामक कंपनी के स्वामित्व में है, जिसका मालिकाना हक वेनेजुएला की राष्ट्रीय तेल कंपनी पेट्रोलिओस डी वेनेजुएला (PDVSA) के पास है, जिसकी 74% हिस्सेदारी है, और इटली की ईनी बाकी 25% की मालिक है।

Pollution

पिछले साल भारत में वायु प्रदूषण से एक मिनट में 3 लोगों की जान गईः रिपोर्ट

in Op-ed

आज जारी वैश्विक रिपोर्ट के अनुसार भारत में पिछले साल 16,70,000 हजार मौतों का सीधा सम्बन्ध वायु प्रदूषण से था। घरेलू वायु प्रदूषण में तो कमी आयी है, मगर बाहर पीएम लेवल 2.5 का चिंताजनक स्तर बरकरार है। अब देश में सेहत के लिये वायु प्रदूषण बना गया है सबसे बड़ा खतरा।

पिछले साल, वायु प्रदूषण के चलते हर मिनट, औसतन, तीन लोगों ने अपनी जान गँवा दी। बात बच्चों की करें तो साल 2019 में हर पन्द्रह मिनट पर तीन नवजात अपने जन्म के पहले महीने ही इन जहरीली हवाओं की भेंट चढ़ गए।