पैनल डिस्कशन उच्च शिक्षा में ट्रांसजेंडर का समावेशन

विशाल कुमार गुप्ता

प्रौढ़, सतत् शिक्षा एवं प्रसार विभाग, दिल्ली विश्वविद्यालय ने उच्च शिक्षा में ट्रांसजेंडर समुदाय को मुख्य धारा में लाने के उद्देश्य से मार्च 2018 में एक ट्रांसजेंडर रिसोर्स सेंटर की स्थापना की। इसका मुख्य ध्येय ट्रांसजेडर्स को एक खुशहाल जीवन उपलब्ध कराने एवं इस संदर्भ में उन्हें कौशल शिक्षा तथा अन्य माध्यमों के द्वारा उन्हें बेहतर एवं सम्मानीय आजीविका के अवसर प्राप्त करने में सक्षम बनाना है। साथ ही इस सेंटर का दूसरा प्रमुख उद्देश्य  ट्रांसजेंडर लोगों के प्रति हमारे समाज के दृष्टिकोण को परिवर्तित कर मानवतावादी दृष्टिकोण का प्रचार प्रसार करना है, जिससे इन बहिष्कृत समूह का हमारे समाज में समावेशन हो सके तथा इन्हें भी समाज में पुरुष-स्त्री की तरह सम्मानीय दर्जा प्राप्त हो सके।

अपनी स्थापना के समय से ही है यह सेंटर ट्रांसजेंडर से संबंधित विभिन्न विषयों, उनकी समस्याओं के संदर्भ में शोध गतिविधियों, चर्चा- परिचर्चा, वाद-विवाद के माध्यम से क्रियाशील है। शोध छात्र डॉ. असलम ने अभी पिछले दिनों ही प्रो. राजेश के मार्गदर्शन पर ट्रांसजेंडर लोगों के संदर्भ में अपनी पीएचडी पूरी की है। इसी विभाग के दो अन्य छात्र आकांक्षा और विशाल ट्रांसजेंडर के उच्च शिक्षा तथा प्राथमिक एवं माध्यमिक शिक्षा में उनकी दशा और दिशा के विषय में अध्ययन कर रहे हैं।

दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रौढ़ शिक्षा विभाग की ट्रांसजेंडर रिसोर्स सेंटर में ट्रांसजेंडर के संदर्भ में 15 फरवरी को एक पैनल डिस्कशन हुआ। इस चर्चा में मुख्य अतिथि अमृता सरकार (ट्रांस महिला) वरिष्ठ कार्यक्रम अधिकारी लिंग और लैंगिकता; सॉलिडेरिटी एंड एक्शन अगेंस्ट द एचआईवी इंफेक्शन इन इंडिया (SAATHII) थी। प्रो. राजेश द्वारा पैनल की अध्यक्षता की गई। इस चर्चा में भाग लेने वाले प्रतिभागियों में ट्रांसजेंडर समुदाय के साथी एवं विभाग के एम.ए., एम.फिल और पीएचडी  के छात्र थे। पैनल डिस्कशन का सह संचालन डॉ.असलम और आंकाक्षा ने किया।

इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य छात्रों के बीच संवेदनशीलता का प्रसार करना था और उन्हें समाज के सबसे बहिष्कृत समुह यानी ट्रांसजेंडर के प्रति अपने दायित्वों का एहसास करना था।

सरकार द्वारा कई पहलों के बावजूद ट्रांसजेंडर के प्रति समाज का नजरिया अभी भी भेदभाव पूर्ण है। नालसा फैसला (2014)  ट्रांसजेंडर्स को बेहतर एवं सम्मानीय जीवन उपलब्ध कराने के संदर्भ में आया एक सकारात्मक और स्वागत योग्य फैसला था, लेकिन यह है अभी भी ट्रांसजेंडर के अधिकारों की रक्षा करने में नाकाफी सिद्ध हुआ है। क्योंकि अभी भी यह ट्रांसजेंडर्स को  सम्मानपूर्ण जीवन उपलब्ध करावा पाने में असक्षम है। इस फैसले का व्यवहार में आना अभी तक बाकी है। (अमृता सरकार)

प्रो. राजेश ने कहा है कि हम ट्रांसजेंडर को समाज की मुख्यधारा में लाने हेतु इनसे संबंधित विभिन्न मुद्दों पर काम कर रहे हैं। और भविष्य में भी इस समुदाय के कल्याण हेतु अपना सर्वश्रेष्ठ देने की कोशिश करेंगे ताकि वह सम्मान पूर्ण जीवन व्यतीत कर सके। हम ट्रांसजेंडर्स पर अधिक से अधिक शोध करने और ट्रांसजेंडर समुदाय के लिए विभिन्न सेवाएं उपलब्ध कराने हेतु ट्रांसजेंडर रिसोर्स सेंटर का विस्तार करने की योजना बना रहे हैं। करियर काउंसलिंग और उचित मार्गदर्शन जैसी सेवाएं यहां प्रदान की जाएगी ताकि वे आत्मनिर्भर बन सम्मानीय जीवन जी सके।

राम्या गोस्वामी (ट्रांसजेंडर)  ने कहा कि वह समाज की मुख्यधारा में शामिल होना चाहती हैं और वह यह भी चाहती है कि समाज भी उनके साथ वैसा ही व्यवहार करे जैसा वह अन्य दुसरे समुहो के लोगों के साथ करता है। उन्हें भी समाज में अन्य समूहों की तरह बराबरी का अधिकार और अवसर मिलनी चाहिए।

संक्षेप में, यह कहा जा सकता है कि समाज को संवेदनशील बनाने और इसे जागरुक करने के लिए लिंग संवेदीकरण की आवश्यकता है। ट्रांसजेंडर समुदाय का कहना है कि न्याय में देरी का होना न्याय न मिलने के समान है। समुदाय की मांग है कि अब आधुनिक और वैज्ञानिक 21 वीं शताब्दी में उनका शोषण बंद होना चाहिए और सरकार एवं समाज को इनके विरूद्ध होने वाले भेदभाव और शोषण को मिटाने के लिए सकारात्मक प्रयास किया जाना चाहिए।

पैनल डिस्कशन की सिफारिशें……..

विभिन्न लक्षित समूहों (शिक्षक, छात्र, गैर शिक्षण कर्मचारी और कॉलेज के प्राचार्य एवं विश्वविद्यालय के अधिकारी) हेतु लिंग संवेदीकरण कार्यक्रम का संचालन किया जाना चाहिए।

ट्रांसजेंडर के घरानों, गुरुओं और ट्रांसजेंडर से संबंधित विभिन्न नेताओं, विद्वानों के माध्यम से इस समुदाय को शिक्षा और समाजिक समावेशन की ओर उन्नमुखिकरण हेतु प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।

स्नातक छात्रों के लिए कॉलेज परिसर में लिंग संवेदीकरण कार्यक्रम एवं उनके प्रशिक्षण कार्यक्रमों का संचालन करना।

ट्रांसजेंडर्स के शैक्षिक विकास हेतु एक ब्रिज पाठ्यक्रम की रुपरेखा का निर्माण करना।

ट्रांसजेंडर्स में कौशल वृद्धि के लिए एक सटिफिकेट को शुरू करना।

ट्रांसजेंडर्स के लिए एक काउंसिलिंग सेंटर कि स्थापना करना, जिसमें इस समुदाय के लोगों के जीवन से संबंधित विभिन्न क्षेत्रों के विषय में निशुल्क सेवाएं प्रदान की जा सके।

दिल्ली सरकार, नेको और सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय भारत सरकार के बीच परस्पर और सकारात्मक संबंध स्थापित किया जाना चाहिए।

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