स्वर्ण समाज को सरकार द्वारा मिलने वाले 10% आरक्षण से होगा देश का उत्थान।

बसंत झा

मोदी सरकार द्वारा 7 जनवरी को अचानक जनता के समक्ष घोषित किये गए तथा 9 जनवरी तक संसद के दोनों सदनों में पास करके क़ानूनी रूप बना देने वाले इस अत्यंत महत्पूर्ण एवं आवश्यक आरक्षण बिल के द्वारा मोदी जी ने अपनी कम होती लोकप्रियता को न सिर्फ बहाल करने की कामयाब कोशिश की है बल्कि इस लंबित मांग के द्वारा उन्होंने सबका साथ सबका विकास के नारे को भी पूरा करने का प्रयास किया है।इस से पहले पूर्व प्रधानमंत्री नरसिंह राव ने ग़रीब स्वर्णो को अलग से 10% रिजर्वेशन देने की बात कही थी किन्तु 1995 में उनकी सरकार के चले जाने के बाद कांग्रेस ने 2004 में लगभग 9 वर्ष बाद वापसी की किन्तु तब तक ये मुद्दा कांग्रेसी मैनिफेस्टो से ग़ायब नज़र आया जिसे एक लंबे अंतराल के बाद मोदी सरकार द्वारा 2019 यानी नव वर्ष के पहले संसदीय सत्र (जनवरी के महीने में )राजनीतिक उबाल पैदा करने तथा स्वर्ण समाज को साथ मिलाने के लिए 2 दिन में ही पूरा कर लिया गया।निसंदेह इस विधेयक द्वारा सरकार ग़रीब सवर्णों को मुख्य धारा से जोड़ कर देश हित में उनकी क्षमताओं का खुल कर और जम कर उपयोग करने का मौक़ा प्रदान करना चाहती है।इस बिल द्वारा हाशिये पर पड़े हर उस व्यक्ति का लाभ होगा जो योग्य होने के बावजूद खुद को तरक़्क़ी की दौड़ में शामिल नही करा पा रहा था।यह बिल सही समय पर मोदी सरकार द्वारा भारतीय स्वर्ण समाज को दिए जाने वाला वो तोहफा है जिस की चमक बहुत देर तक बरक़रार रहेगी और मोदी जी को स्वर्ण समाज के ग़रीबों के मसीहा के तौर पर हमेशा याद किये जाने के लिए मजबूर करती रहेगी।

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