रणवीर सिंह : बैण्ड बाजा बारात से सिम्बा तक

पदमावती में अलाउददीन खिलजी की वहशियत को पर्दे पर उतारने वाले रणवीर सिंह अब एकदम नए अवतार में हैं। वे रोहित शेट्टी कैंप की फिल्म में सिंघम अवतार में जरुर हैं मगर अजय देवगन की छाया से बचते हुए सिंघम की जगह सिम्बा बनकर। रणवीर सिंह की यह शादी के बाद एक्शन से लबरेज पहली फिल्म है। बॉलीवुड की सितारा दीपिका को हमसफर बनाने वाले रणवीर सिंह इस मसाला फिल्म से नए कैंप में अपना झंडा गाड़ने जा रहे हैं।

रनवीर भम्बानी की राह राजकपूर के पोते रणवीर कपूर की तरह आसान नहीं थी। ऋषि कपूर और नीतू कपूर के चाकलेटी इमेज बेटे ने पैदा होते ही बाप दादा का स्टारडम देखा था जो अब कपूर खानदान के रुप में उनके चारों तरफ आज भी बरकरार है। रणवीर से इतर मुंबई के बिजनैस फैमिली के बेटे रनवीर भम्बानी के लिए कुछ पुराना नहीं था। रनवीर के लिए मुंबई सिने जगत की चुनौतियां हर बार नयी थीं मगर वे इनके बीच अवसर निकालने वाले फिल्मी खिलंदड़ बनने में कामयाब रहे।

याद कीजिए निर्देशक मनीष शर्मा की 2010 में आयी फिल्म बैंड बाजा बारात के बिट्टू शर्मा को। अनुभवी अनुष्का शर्मा के साथ रंगरुट रनवीर सिंह तब फिल्मी कदमताल में पहली फिल्म में ही कामयाब हुए थे। उन्हें सामान्य से कॉलेज गोइंग वेडिंग प्लानर बने बिट्टू शर्मा का किरदार मिला था जिसमें वे अपनी संवाद शैली और नटखटपन के कारण जान डाल गए। रणवीर की गाड़ी अनुष्का के साथ फिल्मी रोमांच करते चल निकली।

रणवीर ने इसके बाद हालांकि लेडीज वर्सेस रिक्की बहल, लुटेरा किल दिल आदि तमाम फिल्में की मगर यशराज की बैण्ड बाजा बारात जैसा चमत्कार किसी फिल्म ने नहीं किया। इन फलॉप फिल्मों के बाबजूद रनवीर सिंह मीडिया की चर्चे में बने रहे ये उनकी बड़ी सफलता है।

विवेक ओबरॉय जैसे संभावनाशील अभिनेता रामगोपाल वर्मा की चर्चित फिल्म कंपनी की कामयाबी के बाद ट्रैक से उतरे तो संभल नहीं पाए। दरअसल खबरों और कैमरों को अपनी तरह बनाए रखने का हुनर विवेक नहीं रनवीर सबसे बेहतर जानते हैं।

ये हुनर काम भी आया और ट्रैक से उतरे रनवीर नामी निर्देशकों की निगाह में बने रहे। अपनी निरंतरता और उर्जा के कारण वे संजय लीला भंसाली की निगाह में आए और इसमें दीपिका के साथ उनकी दोस्ती भी कम मददगार नहीं रही। रणवीर से पर्दे पर समांतार मुकाबला करते करते रनवीर पहले दोनों के फ्रेंड बने और बाद में केवल दीपिका पादुकोण के क्लोज फ्रेंड।

फिल्मी दुनिया में कलाकारों की अंतरंगता भी बॉक्स ऑफिस पर सोना बरसाती है बशर्ते ऐसी जमावट ईमानदारी से हो जाए।

संजय लीला भंसाली ने गोलियों की रासलीला से इसकी शुरुआत की मगर बाजीराव मस्तानी इसका अगला भाग नहीं रही। ये विशुद्ध डूबने वाला प्रयास रही। पर्दे का नटखट रनवीर सिंह भंसाली की रचनाधर्मी फिल्म में अपने को खपा गया। बाजीराव पेशवा के वजनदार किरदार में रनवीर ने वो सब डाल दिया जो भंसाली उन्हें सिखाते रहे। रनवीर सिंह ने इसी फिल्म से सह कलाकार दीपिका पादुकोण के बराबर स्टारडम मुंबई सिनेमा में दर्ज किया। इस फिल्म के पहले तक भले ही रनवीर अपने अन्य गुणों के कारण कामयाबी पाते रहे हों मगर बाजीराव मस्तानी में उनकी कामयाबी उनके अभिनय को भंसाली से लेकर करोड़ो सिनेप्रेमियों का सर्टिफेकट थी। रनवीर ने इसके बाद मुड़कर नहीं देखा। अब उनके साथ स्टारडम, भंसाली और दीपिका पादुकोण तीनों साथ थे। इस तिहरी ताकत की बदौलत बाजीराव ने कालजयी पदमावत् में वहशी आक्रांता अलाउद्दीन खिलजी बनकर भी प्रशंसकों से नायक शाहिद कपूर से कहीं अधिक तारीफ बटोरीं। फिल्म पर विवादित का टैग लगने के कारण देश दुनिया में पदमावती बनी दीपिका के साथ अलाउददीन बने रनवीर सिंह की फुर्सत से साल भर तक बंपर पब्लिसिटी हुई।

पदमावत करनी सेना के विरोध के प्रतिउत्तर में न देखने वालों तक ने भी देखी और कोई शक नहीं कि पदमावती के जरिए रनवीर सिंह समकालीन अभिनेताओं से स्टारडम में बहुत आगे निकल गए हैं।

रनवीर सिंह निरंतरता में महारथी हैं। उनके साथ अब शिखर सितारा पत्नी दीपिका पादुकोण, संजय लीला भंसाली जैसे रचनाधर्मी निर्देशक हैं मगर वे फिर भी नहीं रुकते।

वे एक तरफ या दो तरफ शॉट नहीं मारना चाहते। वे मास्टर ब्लॉस्टर सचिन की तरह चौतरफा खेलना चाहते हैं। पीरियड फिल्मों के शिरोमणि भंसाली के बाद रोहित शेट्टी की तरफ आगाज यही कहानी कहती है। वे भी उड़ती कारों और कॉमेडी विद एक्शन के साथ अजय जैसे सिंघम बनना चाहते हैं। इसकी शुरुआत हो चुकी है। पुलिस ऑफीसर सिम्बा बनकर बनकर मसाला फिल्मों की ओर मुड़े रनवीर सारा खान के साथ नजर आने वाले हैं। देखिए और तय कीजिए पदमावती में जी भरकर घृणा पाने वाला वाला अलाउद्दीन क्या सिम्बा के जरिए सिंघम को टक्कर दे पाता है या नहीं।

(लेखक स्वतंत्र पत्रकार है)

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