दून के आसपास अब भी छिपे हैं तमाम बांग्लादेशी

देहरादून, 04 जनवरी। उत्तराखंड की राजधानी देहरादून बारूद की ढेर पर बैठी हुई है। मतों की राजनीति के कारण राजनेताओं ने जिस ढंग से अल्पसंख्यकों विशेषकर बांग्लादेशियों को भी यहां बसाने का काम किया है, वह अपने आप में किसी बड़ी अनियमितता से कम नहीं है। यूं तो पुलिस बार-बार सत्यापन का दावा करती है, लेकिन सत्यापन में केवल धींगामुश्ती और टाल मटोल होती है। इसका प्रमाण बंजारावाला में कुछ बांग्लादेशियों का राशन कार्ड तक बन जाना है। बंजारावाला के कई क्षेत्रों में अल्पसंख्यक समाज के तमाम बांग्लादेशी चाहे-अनचाहे रह रहे हैं। उनमें से कइयों ने तो अपने मकान भी बना लिए है। लेकिन लीपापोती और जांच के अभाव में धीरे-धीरे सब भारत के नागरिक बन गए है। माजरा में पकड़े गए दोनों बांग्लादेशी लंबे अर्से से यहां रह रहे हैं जिनमें नजरूल इस्लाम 20 साल से तथा सहसफुल हसन 19 वर्ष से रह रहा है। दोनों ने स्थानीय युवतियों से शादी भी कर ली है। कई बार बांग्लादेश जा चुके दोनों शातिर भले ही पकड़ लिए गए पर ऐसे दर्जनों नाम है जो आज भी बाकयदा ठेकेदार, मजूदर तथा कबाड़ी तथा अन्य कारोबारी के रूप में रह रहे है। इसी वर्ष 13 अगस्त 2018 को रूड़की में नासिर पुत्र अब्बुल निवासी इमली कोला, चौक बाजार ढाका पुलिस की पकड़ में आया। इसी प्रकार कलियर से मोहम्मद इस्लाम पुलिस द्वारा पकड़ा गया जो मुकदा सहजबाग ढाका का रहने वाला था। इससे पहले विकासनगर में दो बांग्लादेशी पकड़े गए। यह गिरतारियां भले पुलिस को अपनी पीठ ठोकने का मौका दें लेकिन स्थिति काफी भयावह है। मलिन नालों-खालों में रह रहे हैं तमाम बंग्लादेशी वरिष्ठ अधिवक्ता एवं बार एसोसिएशन देहरादून के पूर्व उपाध्यक्ष आलोक घिल्डियाल का कहना है कि बंजारावाला में कबाड़ी का काम करने वाले कुछ बांग्लादेशी जो चांचक के पास रहते थे, अपना राश्न कार्ड बनवाने के लिए उनके पास आए थे लेकिन बांग्लादेशी होने के कारण उन्होंने इस मामले की जानकारी खुफिया इकाई को दे दी थी। उनके द्वारा दिए गए कागज भी सौंप दिए थे लेकिन बाद में पता चला कि आर्थिक लाभ लेकर उनके राशन कार्ड बना दिए गए हैं। घिल्डियाल का कहना है कि इसी तरह के कई लोग नालों खालों में घर बनाकर रह रहे हैं। घिल्डियाल ने कहा है कि देहरादून में आसपास अवैध रूप से बांग्लादेशी रह रहे हैं, जिनके खिलाफ सख्त कार्यवाही होनी चाहिए। पिछले दिनों मुख्यमंत्री ने भी इस संदर्भ में कठोर निर्देश दिए थे लेकिन अब तक सघन जांच नहीं हो पाई है। अल्पसंख्यक संप्रदाय का होने के कारण सपा, बसपा और कांग्रेस जैसी राजनीतिक दलों के लोग इन्हें चाहे-अनचाहे प्रश्रय दे रहे हैं, जिसके कारण कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है। इस संदर्भ में पुलिस को सघन जांच करनी चाहिए और इन लोगों पर सख्त कार्यवाही करनी चाहिए जो मजदूर, ठेकेदार, कबाड़ी तथा अन्य रूपों में अपनी पहचान टुपा कर उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में रह रहे है। लगातार जांच जारी रहती है: कुमार पुलिस महानिदेशक कानून व्यवस्था अशोक कुमार से चर्चा की गई तो उनका कहना था कि पुलिस तथा गुप्तचर इकाइयों को निरंतर निर्देश है कि वह सघन निरीक्षण करते रहें, किसी भी क्षेत्र में ऐसे अवांछित तत्वों को घुसपैठ का मौका न मिले। अपर पुलिस महानिदेशक अशोक का कहना है कि विदेशी नागरिकों पर हमारी कड़ दृष्टि रहती है और हम उन्हें हर हालत में पकड़ेंगे।

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