अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के प्रतिनिधिमंडल

बसंत झा

अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के प्रतिनिधिमंडल ने आज विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के अध्यक्ष प्रोफेसर डी पी सिंह, उपाध्यक्ष प्रोफेसर भूषण पटवर्धन, सचिव प्रोफ़ेसर रजनीश जैन तथा यूजीसी रेगुलेशन विसंगति निवारण समिति के अध्यक्ष प्रोफेसर आर पी तिवारी से विस्तृत भेंट वार्ता कर उन्हें यूजीसी रेगुलेशन 2018 में रही विसंगतियों के संबंध में विस्तार से अवगत कराते हुए व्यापक हित में उनके निराकरण की मांग की।
महासंघ द्वारा निश्चित समय सीमा के भीतर संपूर्ण देश में यूजीसी रेगुलेशन 2018 को एक समान रूप से लागू करने की मांग की गई। एसोसिएट प्रोफेसर व चयनित वेतनमान में असिस्टेंट प्रोफेसर पद पर पदोन्नति के लिए पीएचडी की अनिवार्यता तथा जुलाई 2021 से विश्वविद्यालयों में असिस्टेंट प्रोफेसर पद पर सीधी नियुक्ति हेतु पीएचडी अनिवार्य किए जाने का संगठन द्वारा विरोध किया गया। महासंघ द्वारा बताया गया कि देश भर के उच्च शिक्षा संस्थानों में सभी जगह समान रूप से शोध की सुविधाएं उपलब्ध नहीं है ऐसी स्थिति में पीएचडी को अनिवार्य करना भेदभावपूर्ण व अन्यायकारी होगा।
महासंघ ने फैकल्टी द्वारा शोध अवकाश अवधि को पदोन्नति हेतु शिक्षण अनुभव के रूप में नहीं जोड़े जाने पर भी गंभीर आपत्ति की। संगठन ने इसे शोध को हतोत्साहित करने वाला कदम बताते हुए वापस लेने की मांग की।
महासंघ में करियर एडवांसमेंट योजना में विश्वविद्यालयों एवं मान्यता प्राप्त शिक्षा बोर्डौं सहित अन्य प्रकाशकों के पुस्तक लेखक होने, कॉन्फ्रेंस में भाग लेने एवं पोस्टर प्रस्तुत करने, शोध जनरल्स के एडिटर होने वालों लोकप्रिय लेख लिखने आदि के लिए भी रिसर्च स्कोर दिए जाने की मांग की।
महासंघ ने असिस्टेंट प्रोफेसर पद पर सीधी नियुक्ति हेतु शॉर्टलिस्टिंग प्रक्रिया पर भी प्रश्न खड़े किए। प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि स्नातक और स्नातकोत्तर अंकों के आधार पर शॉर्टलिस्टिंग करना भेदभावपूर्ण होगा क्योंकि देश भर की उच्च शिक्षा संस्थानों में परीक्षा एवं अंकन की योजनाओं में भारी अंतर है। संगठन ने देश के उच्च शिक्षा संस्थानों में स्वीकृत पदों को नियमित एवं स्थाई फैकेल्टी द्वारा भरे जाने की मांग भी की।
यूजीसी रेगुलेशन 2018 की विसंगतियां के संबंध में लगभग डेढ़ घंटे चली चर्चा के अन्य विषयों में विश्वविद्यालयों द्वारा ‌पीएचडी रेगुलेशन लागू करने की तिथि तक पंजीकृत शोधार्थियों को नेट से छूट देने, कुलपति पद हेतु 25 वर्ष के कुल शिक्षण अनुभव के साथ प्रोफेसर को योग्य मानने, शारीरिक शिक्षकों एवं पुस्तकालयाध्यक्षों के वेतनमान एवं अन्य सेवा शर्तें शिक्षकों के समान ही रखने, राज्य पोषित उच्च शिक्षा संस्थानों में यूजीसी वेतनमान लागू करने पर आने वाले अतिरिक्त व्यय का 80% केंद्र सरकार द्वारा वहन करने, उचित शिक्षक शिक्षार्थी अनुपात सुनिश्चित करने आदि विषय शामिल थे।

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यूजीसी अध्यक्ष, विसंगति निवारण समिति के अध्यक्ष तथा अन्य उपस्थित अधिकारियों ने महासंघ के प्रत्येक बिंदु को ध्यान से सुना एवं समझा तथा समुचित रूप से परीक्षण कर उचित कदम उठाने का विश्वास दिलाया ।
महासंघ के प्रतिनिधिमंडल में अध्यक्ष प्रो जगदीश प्रसाद सिंघल, संगठन मंत्री महेंद्र कपूर, उच्च शिक्षा संवर्ग सचिव डॉ मनोज सिन्हा तथा सह सचिव डॉ नारायण लाल गुप्ता शामिल थे।Dr.sanjay Kumar Media prabhari ABRSM

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