1857rebellion

जब शिमला में हुआ करता था आंतक और कत्लेआम का माहौल

हिमाचल प्रदेश में गोरों के विरूद्व सैनिकों द्वारा विद्रोह का झंडा बुलन्द कर देने की शुरूआत कसौली से मानी जाती है। 20 अप्रैल 1857 में कसौली पुलिस चौकी में देशी सैनिकों द्वारा आग लगा दी गई। ऐंतिहासिक दस्तावेज इस बात की पुष्टि करते हैं कि अंग्रेजों के विरूद्व कसौली में बगावत करने वाले सैनिकों में अम्बाला रार्ईफल डिपो के 6 देशी सैनिक शामिल थे। खास बात यह है कि 1857 में कसौली एक ऐसा स्थान रहा है जहां पहाड़ी क्षेत्राों पर नियन्त्राण रखने के लिए गोरों द्वारा सैंकड़ों ब्रिटिश सैनिकों के अलावा पुलिस और देशी सैनिकों की नियुक्ति भी की गई थी। चंद सैनिकों द्वारा इस मजबूत छावनी में पुंलिस चौकी को आग लगा देना ऐसी आम घटना नहीं थी जिसे अंग्रेजी शासन खतरे की घंटी के रूप में न मानता। कसौली पुलिस चौकी फूको कांड के बाद अन्य छावनियों में भी विद्रोह उभरने लगा। परिणाम स्वरूप के कसौली के अतिरिक्त स्पाटू, डगशाई और शिमला की निकटवर्ती छावनी जतोग में जो भारतीय सैनिक गोरों की सेवा में थे, ने भी विद्रोह के स्वर उठाने आरम्भ कर दिये।

PateshwariTemple

मां पाटेश्वरी मंदिर: यहीं पर धरती में समाईं थी माता सीता

भारत के धार्मिक स्थल विशेषकर मंदिर एक से बढ़कर एक रहस्य अपने में समेटे हुए हैं। ऐसा ही एक मंदिर है उत्तर प्रदेश के बलरामपुर जनपद के पाटन गांव में सिरिया नदी के तट पर स्थित मां पाटेश्वरी का मंदिर। इस मंदिर के कारण ही इस पूरे मंडल का नाम देवीपाटन पड़ा हुआ है। मंदिर से कई पौराणिक कहानियां तो जुड़ी ही हैं साथ ही यहां की मान्यता को हर साल यहां मां के दर्शन के लिये आने वाले लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ से समझा जा सकता है। आइये आपको बताते हैं मां पाटेश्वर के इस पौराणिक इतिहास की गाथा कहते मंदिर की कहानी।

Goverdhanpuja

Govardhan Pooja 2021: क्यों की जाती है गोवर्धन पूजा; जानिए! शुभ मुहूर्त, इतिहास और महत्व

गोवर्धन पूजा इस साल 5 नवंबर को पूरे देश में भक्तों द्वारा मनाई जाएगी। आमतौर पर यह विशेष आयोजन दिवाली के अगले दिन पड़ता है। इस पूजा को अन्नकूट पूजा के रूप में भी जाना जाता है। यह एक ऐसा दिन है जब भगवान कृष्ण के भक्त भगवान इंद्र पर उनकी जीत को याद करते हैं और उनका सम्मान करते हैं। बहुत से लोग अपने घर में भगवान कृष्ण की पूजा भी करते हैं। हिंदू कैलेंडर के अनुसार, गोवर्धन पूजा कार्तिक के महीने में प्रतिपदा तिथि, शुक्ल पक्ष (चंद्र चरण) पर की जाती है। कई राज्यों में, महाराष्ट्र में लोग गोवर्धन पूजा को बाली प्रतिपदा कहते हैं। देश के बाकी हिस्सों की तरह, वे भी इस त्योहार को समान प्रेम और उत्साह के साथ मनाते हैं।

Laxmiji

झाड़ू को लक्ष्मी क्यों कहा जाता है?

झाड़ू को लक्ष्मी जी इसलिए कहते हैं क्योंकि झाड़ू को लक्ष्मी का वरदान मिला हुआ है, झाड़ू का स्थान हमारे घर में बहुत ही महत्वपूर्ण होता है वह हमारे घर मैं बहुत अधिक महत्व रखती है उसी के बारे में मैं कुछ बातें बताने जा रहा हूं।

अगर कोई व्यक्ति घर से बाहर जा रहा होता है ,तो उसके बाद में झाड़ू नहीं लगानी चाहिए ।झाड़ू को घर में छुपा कर रखना चाहिए ,इधर उधर कहीं भी नहीं रखनी चाहिए,किसी भी बाहर वाले व्यक्ति को आने पर झाड़ू नहीं देखनी चाहिए ।

Wedding

जानें! हिन्दू पंचांग के अनुसार साल 2022 में​ विवाह के शुभ मुहूर्त

अगर आपको कोई भी शुभ कार्य करना होता है तो हिंदू धर्म में पंचांग देखना बहुत जरूरी है, खासकर शादी के मामले में। इसके साथ ही तिथि, पक्ष, हिंदी महीने का माह, नक्षत्र भी देखना जरुरी होता है। क्योंकि हर एक शुभ कार्य के लिए अलग-अलग नक्षत्र होता है। इसलिए पंचाग के साथ-साथ नक्षत्र का ध्यान रखना बहुत जरुरी है।