कोरोना वैक्सीन Sputnik V के उत्पादन में, भारत अदा करेगा महत्त्वपूर्ण भूमिका

Covid Vaccine

नई दिल्लीः दुनियाभर में कोरोना वैक्सीन का इंतजार करने वाले लाखों लोगों को रूस की स्पुतनिक वी (Sputnik V) वैक्सीन का बेसब्री से इंतजार है। हालांकि इस वैक्सीन का इसी सप्ताह तीसरे चरण का क्लिनिकल ट्रायल शुरू होने जा रहा है। रूस के स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, रूसी क्षेत्रों में दवा की आपूर्ति जल्द ही होने की उम्मीद है। रूस अपनी वैक्सीन के लिए भारत से सहयोग चाहता है। भारत भी इसे अपने लिए फायदे का सौदा मान रहा है। भारत के सहयोग से रूस इस वैक्सीन का ज्यादा से ज्यादा उत्पादन कर पाएगा।

बीबीसी के मुताबिक, भारत में कोविड-19 वैक्सीन संबंधी राष्ट्रीय विशेषज्ञ समूह के प्रमुख और नीति आयोग के सदस्य (स्वास्थ्य) डॉक्टर वी के पॉल ने कहा है कि भारत बड़ी मात्रा में उस (स्पूतनिक-5) वैक्सीन का उत्पादन कर सकता है जो रूस के लिए तो फायदे का सौदा होगा ही, साथ ही भारत के लिए भी यह एक जबरदस्त मौका होगा। इसके साथ ही हम पूरी दुनिया को भी ये वैक्सीन उपलब्ध करा पायेंगे।

उन्होंने बताया कि ‘‘रूस ने कोरोना की वैक्सीन ‘स्पूतनिक-5’ के तीसरे चरण के परीक्षण और भारतीय कंपनियों द्वारा इसके उत्पादन के लिए उचित माध्यमों के जरिये भारत सरकार से बात शुरू की, और अच्छी बात ये है कि दोनों पक्षों के बीच इसे लेकर पाॅजीटिव बातें हो रही हैं।’’

उन्होंने बताया कि ‘‘भारतीय वैज्ञानिक स्पूतनिक-5 के पहले दो ट्रायल्स के डाटा का अध्ययन कर रहे हैं, जिसके बाद जरूरत के आधार पर तीसरे चरण के ट्रायल की कार्यवाही शुरू की जायेगी।’’

भारतीय कंपनियों से चाहते है मदद
रूस ने स्पूतनिक-5 को बाजार में लाने के लिए ‘फास्ट-ट्रैक’ तरीका आजमाया है, जिसके तहत पुतिन प्रशासन ने इस वैक्सीन को कुछ आपातकालीन स्वीकृतियां दी हैं। हालांकि लेंसेट हेल्थ जर्नल में छपी रिपोर्ट के अनुसार, स्पूतनिक-5 के नतीजे कोरोना से लड़ने में बढ़िया पाये गए हैं।

रूस चाहता है कि इस वैक्सीन को जल्द से जल्द सभी स्वीकृतियां दिलाकर बाजार में लाया जाये, मगर फिर भी रूस के सामने जो एक सबसे बड़ी चुनौती है, वो इस वैक्सीन के उत्पादन की है और इसी के लिए रूस की सरकार ने भारत सरकार के जरिये भारतीय दवा कंपनियों से सहयोग मांगा है।

डॉक्टर पॉल के अनुसार, ‘‘भारत सरकार ने कई भारतीय कंपनियों से पूछा है कि कौन-कौन इस रूसी वैक्सीन को तैयार करने की इच्छुक हैं? इस पर तीन भारतीय कंपनियां अभी तक सामने आयी हैं, जिन्होंने इसकी इच्छा जाहिर की है। कई कंपनियां रूसी सरकार के प्रस्ताव का अध्ययन कर रही हैं और कई अपनी रूसी समकक्षों से इस बारे में चर्चा कर रही हैं।

पूरी दुनिया को है इस वैक्सीन का इंतजार
पूरी दुनिया में अब तक कोरोना संक्रमण के लगभग 2 करोड़ 75 लाख से ज्यादा मामले दर्ज हो चुके हैं और करीब 9 लाख लोगों की कोरोना से मौत हो गई है। पूरी दुनिया में संक्रमण के मामले में अमेरिका के बाद अब भारत दूसरे स्थान पर आ गया है। इन परिस्थितियों में जाहिर है कि सबकी निगाहें इस वैक्सीन पर टिकी हैं, जिसे भारत समेत कई देश बनाने की कोशिश कर रहे हैं।

वैक्सीन के इंतजार के बीच यह काफी हद तक स्पष्ट हुआ है कि महज वैक्सीन बन जाने से लोगों की मुश्किलें रातों-रात खत्म नहीं हो जायेंगी, क्योंकि आम लोगों तक इसे पहुंचाने की एक लंबी और जटिल प्रक्रिया का पालन करना होता है।

ग्लोबल इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी राइट (वैश्विक बौद्धिक संपदा अधिकार) के तहत वैक्सीन बनाने वाली कम्पनी को 14 साल तक डिजाइन और 20 साल तक पेटेंट का अधिकार मिलता है, लेकिन इस अप्रत्याशित महामारी के प्रकोप को देखते हुए सरकारें ‘अनिवार्य लाइसेंसिंग’ का जरिया भी अपना रही हैं ताकि कोई थर्ड-पार्टी इसे बना सके। 

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