Ganesh Chaturthi 2

कोरोना संकटकाल में गणेशोत्सव कैसे मनायें, आइये जानते हैं...

आजकल पूरे विश्‍व में कोरोना महामारी के कारण सर्वत्र ही लोगों के बाहर निकलने पर अनेक बंधन लगे हैं । भारत के विविध राज्यों में भी यातायात बंदी (लॉकडाउन) लागू है। कुछ स्थानों पर कोरोना का प्रकोप भले ही अल्प हो; परंतु वहां भी लोगों के घर से बाहर निकलने पर अनेक बंधन हैं । इसके कारण हिन्दुओं के विविध त्योहारों, उत्सवों एवं व्रतों को सामान्य की भांति सामूहिक रूप से मनाने पर बंधन लगाए गए हैं। कोरोना जैसे संकटकाल की पृष्ठभूमि पर हिन्दू धर्म में धर्माचरण के शास्त्र में कुछ विकल्प बताए हैं, जिन्हें‘आपद्धर्म’ कहा जाता है। ‘आपद्धर्म’ का अर्थ ‘आपदिकर्तव्यो धर्मः।’ अर्थात‘संकटकाल में धर्मशास्त्र सम्मत कृत्य’। इसीअवधि में श्री गणेशचतुर्थी का व्रत तथा गणेशोत्सव के आने से संपतकाल में बताई गई पद्धति के अनुसार अर्थात सामूहिक स्वरूप में इस उत्सव को मनाने के लिए मर्यादाएं हैं। इस दृष्टि से प्रस्तुत लेख में‘वर्तमान दृष्टि से धर्माचरण के रूप में गणेशोत्सव किस प्रकार मनाया जा सकता है?’ इसका विचार किया गया है। यहां महत्त्वपूर्ण सूत्र यह है कि इसमें ‘हिन्दूधर्म ने किस स्तर तक जाकर मनुष्य का विचार किया है’,यह सीखने को मिलता है तथा हिन्दू धर्म की व्यापकता ध्यान में आती है।

Hartalikateej

Hartalika Teej: पति की लम्बी उम्र के लिए रखा जाता है ये उपवास, जानें इस व्रत की महिमा...

भाद्रपद माह में शुक्ल पक्ष की तृतीया को हरतालिका तीज मनाई जाती है। हरतालिका तीज इस साल 21 अगस्त, शुक्रवार को मनाई जायेगी। इस दिन माता पार्वती और भोलेनाथ की पूजा की जाती है। भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित यह व्रत भगवान शिव को अमरता प्रदान कराने वाले व्रत के रूप में माना जाता है। सभी सुहागनें इस दिन अपने पति की लम्बी उम्र और स्वास्थ्य की कामना के लिए व्रत रखती हैं। मान्यता है कि इस दिन भगवान शिव और देवी पार्वती व्रत रखनें वाली स्त्रियों को सुख-संपत्ति, धन-धान्य, पुत्र-पौत्र और स्वस्थ जीवन का वरदान देते हैं।

Vaishno Devi Bhawan

नए दिशानिर्देश के साथ माँ वैष्णो देवी का दरबार आज से भक्तों के लिए खुला

जम्मूः कोरोना के कारण लाॅकडाउन के चलते बंद हुआ माँ वैष्णो देवी का दरबार आज से भक्तों के लिए खोल दिया गया है। जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने रविवार 16 अगस्त से मां वैष्णो देवी की यात्रा को शुरू करने की अनुमति दी थी। हालांकि सरकार ने मंगलवार 16 अगस्त से सभी धार्मिक स्थानों को खोलने के लिए दिशानिर्देश और निर्देश जारी किए हैं। आदेश में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि इस आदेश का पालन न करने पर आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के तहत दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।

Jana

JANMASHTAMI: इस वर्ष जन्मोत्सव-पूजा 11, 12 और 13 अगस्त को मनाई जाएगी, ऐसा क्यों....

इस वर्ष देशभर में जन्माष्टमी 11 और 12 कुछ जगहों पर 13 अगस्त, अर्थात् तीन दिन मनाई जा रही है। इस बार भाद्रपद मास की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि 11 अगस्त को है, परन्तु इस दिन सूर्योदय के समय सप्तमी तिथि थी। अष्टमी तिथि का प्रवेश 11 अगस्त को सुबह 9 बजकर 6 मिनट सुबह में हुआ। यह अष्टमी तिथि 12 अगस्त को 11 बजकर 16 मिनट सुबह को समाप्त होगी। उसके बाद नवमी तिथि का प्रवेश होगा। 

तिथि और नक्षत्र 
इस साल 11 तारीख को अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र का संयोग नहीं बन पा रहा है। अष्टमी तिथि यानी 11 अगस्त को भरनी नक्षत्र है, 12 अगस्त को कृतिका नक्षत्र होगा, वहीं 13 अगस्त को रोहिणी नक्षत्र रहेगा।

Janamastmi

कोरोना वायरस के प्रभाव में उत्पन्न आपातकालीन स्थिति में ‘श्रीकृष्ण जन्माष्टमी’ की पूजा कैसे करें: सनातन संस्था

‘कोरोना विषाणुओं से प्रभावित क्षेत्रों में जहां संचार बंदी (लॉकडाउन) है, वहां एकत्र आकर पूजा करना संभव नहीं होगा । प्रति वर्ष अनेक स्थानों पर ‘श्रीकृष्ण जन्माष्टमी’ का उत्सव धूमधाम से मनाया जाता है। इसलिए एकत्र न आते हुए अपने-अपने घरों में ही श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की पूजा कैसे कर सकते हैं, इसका इस लेख में प्रमुख रूप से विचार किया है ।  

भगवान श्रीकृष्ण के पूजन का समय
भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का समय रात्रि 12 होता है। इसलिए उससे पहले ही पूजन की तैयारी करके रखें। संभव हो, तो रात्रि 12 बजे श्रीकृष्ण जन्म का सोहर लगाएं।

श्रीकृष्ण का पूजन

श्रीकृष्ण जन्म का सोहर समाप्त होने पर श्रीकृष्ण की मूर्ति अथवा चित्र की पूजा करें।

षोडशोपचार पूजन: जिनके लिए भगवान श्रीकृष्ण की ‘षोडशोपचार पूजा’ करना संभव है, वे उस प्रकार पूजा करें।  

पंचोपचार पूजन: जिनके लिए भगवान श्रीकृष्ण की ‘षोडशोपचार पूजा’ करना संभव नहीं है, वे ‘पंचोपचार पूजा’ करें। पूजा करते समय ‘सपरिवाराय श्रीकृष्णाय नमः’ यह नाममंत्र बोलते हुए एक-एक उपचार भगवान श्रीकृष्ण को अर्पण करें। भगवान श्रीकृष्ण को दही-चिवडा और माखन का भोग लगाएं  तत्पश्‍चात भगवान श्रीकृष्ण की आरती करें। (पंचोपचार पूजा : गंध/चंदन, हलदी-कुमकुम, पुष्प, धूप, दीप और नैवेद्य, इस क्रम से  पूजा करें।)

श्रीकृष्ण की मानसपूजा

जो किसी कारणवश भगवान श्रीकृष्ण की प्रत्यक्ष पूजा नहीं कर सकते, वे भगवान श्रीकृष्ण की ‘मानसपूजा’ करें। (‘मानसपूजा’ का अर्थ प्रत्यक्ष पूजा करना संभव न हो, तो पूजन के सर्व उपचार मानस रूप से (मन से) भगवान श्रीकृष्ण को अर्पण करना।)

पूजन के उपरांत नामजप करना

पूजन होने के उपरांत कुछ समय तक भगवान श्रीकृष्ण का नामजप ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः’ करें।  

अर्जुन के समान निस्सीम भक्ति निर्माण करने के लिए भगवान श्रीकृष्ण को मनःपूर्वक प्रार्थना करना

इसके पश्‍चात भगवान श्रीकृष्ण ने श्रीमद्भगवद्गीता में दिए हुए वचन ‘न मे भक्तः प्रणश्यति।’ अर्थात ‘मेरे भक्त का नाश नहीं होता’ का स्मरण कर हममें अर्जुन के समान असीम भक्ति निर्माण होने के लिए भगवान श्रीकृष्ण को मनःपूर्वक प्रार्थना करें।