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Sharad Purnima: जानें क्या है शरद पूर्णिमा का शुभ मुहुर्त और महत्व

अश्विन मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को शरद पूर्णिमा के नाम से जाना जाता है। इस दिन चंद्रमा अपनी समस्त कलाओं से पूर्ण होता है। माना जाता है कि इस दिन चंद्रमा कि किरणों से अमृत बरसता है। इस दिन की चांदनी सबसे ज्यादा तेज प्रकाश वाली होती है। इतना ही देवी और देवताओं को सबसे ज्यादा प्रिय पुष्प ब्रह्मकमल भी शरद पूर्णिमा की रात को ही खिलता है। शास्त्रों के अनुसार, इस दिन किए गए धार्मिक अनुष्ठान कई गुना फल देते हैं।

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इन तारीखों पर लगेगा चारधाम यात्रा पर विराम, जानें पूरा शेड्यूल

नई दिल्लीः विजयदशमी के शुभ अवसर पर, चारों धामों के कपाट बंद करने का शुभ मुहूर्त तय किया गया है। कोरोना काल के प्रकोप के दौरान भी केदारनाथ धाम (Kedarnath Temple) में भक्तों का काफी आना-जाना लगा रहा। हालांकि अब मंदिर बंद होने में कुछ दिन शेष रह गए हैं। बता दें कि चारों धामों के कपाट शीतकाल में भारी बर्फबारी के कारण बंद कर दिए जाते हैं। गंगोत्री धाम (Gangotri Temple) के कपाट बंद होने के बाद श्रद्धालु मुखीमठ (मुखवा) में अपने शीतकालीन प्रवास के लिए विदेशों में माँ गंगा के दर्शन कर सकेंगे।

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जानें कैसे करें कंजक पूजन, क्या है इसका शास्त्रीय आधार, महत्त्व एवं नियम

नवरात्रि के 9 दिनों में मां दुर्गा के अलग-अलग 9 स्वरूपों की भक्त आराधना करते हैं। भक्त मां दुर्गा की विशेष कृपा पाने के लिए इन 9 दिनों का व्रत रखते हैं। व्रत के दौरान अष्टमी यानी कि व्रत के आठवें दिन 9 कन्याओं का पूजन करने का विधान है। वैसे कुछ लोग नवमीं भी पूजते हैं। अष्टमी और नवमीं को कुमारिकाओं की पूजा कर उन्हें शुद्ध घी का बना भोजन करवाएं। सुहागिन अर्थात प्रकट शक्ति व कुमारिका अर्थात अप्रकट शक्ति। प्रकट शक्ति का कुछ अपव्यय हो जाता है, अतएव सुहागिनों की अपेक्षा कुमारिकाओं में कुल शक्ति अधिक होती है। इसलिए कुमारिकाओं की ही कंजक पूजन के दिन पूजा की जाती है।

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नवरात्रि में होनेवाले अनुचित कृत्यों को रोककर उत्सव को पवित्रता बनाए रखें!

नवरात्रि में विभिन्न प्रांतों में किए जानेवाले धार्मिक कार्यक्रमों की एक महत्त्वपूर्ण विधि है, गरबा । पूर्वकाल में ‘गरबा’ नृत्य के समय देवी, कृष्णलीला एवं संतरचित गीत ही गाए जाते थे । वर्तमान काल में भगवान के इस सामूहिक नृत्य की उपासना में विकृतियां आ गई हैं । ‘रिमिक्स’, पश्चिमी संगीत अथवा चलचित्रों के गीतों की ताल पर अश्लील हावभाव में मनोरंजन के लिए गरबे के स्थान पर ‘डिस्को-डांडिया’ खेला जाता है । गरबे को निमित्त बनाकर व्याभिचार आदि भी किया जाता है । पूजास्थल पर तंबाकू सेवन, मद्यपान, ध्वनि प्रदूषण आदि अनुचित कृत्य भी किए जाते हैं । मूलत: एक धार्मिक उत्सव के रूप में मनाए जानेवाले इस कार्यक्रम को व्यायसायिक रूप प्राप्त हुआ है । ये अपप्रकार अर्थात धर्म एवं संस्कृति की हानि करना है । इन अपप्रकारों को रोकने हेतु उचित कृत्य करना अर्थात कालानुसार आवश्यक धर्मपालन करना ही है।

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जानिये! नवरात्रि में घटस्थापना के उपरांत, पंचमी से नवमी तक का विशेष महत्त्व

नवरात्रि के 9 दिनों में घटस्थापना के उपरांत पंचमी, षष्ठी, अष्टमी एवं नवमी का विशेष महत्त्व है। पंचमी के दिन देवी के 9 रूपों में से एक श्री ललिता देवी अर्थात महात्रिपुर सुंदरी का व्रत होता है। शुक्ल अष्टमी एवं नवमी ये महातिथियां हैं। इन तिथियों पर चंडीहोम करते हैं। नवमीपर चंडीहोम के साथ बलि समर्पण करते हैं।