नवरात्रि में होनेवाले अनुचित कृत्यों को रोककर उत्सव को पवित्रता बनाए रखें!

Garba

नवरात्रि में विभिन्न प्रांतों में किए जानेवाले धार्मिक कार्यक्रमों की एक महत्त्वपूर्ण विधि है, गरबा । पूर्वकाल में ‘गरबा’ नृत्य के समय देवी, कृष्णलीला एवं संतरचित गीत ही गाए जाते थे । वर्तमान काल में भगवान के इस सामूहिक नृत्य की उपासना में विकृतियां आ गई हैं । ‘रिमिक्स’, पश्चिमी संगीत अथवा चलचित्रों के गीतों की ताल पर अश्लील हावभाव में मनोरंजन के लिए गरबे के स्थान पर ‘डिस्को-डांडिया’ खेला जाता है । गरबे को निमित्त बनाकर व्याभिचार आदि भी किया जाता है । पूजास्थल पर तंबाकू सेवन, मद्यपान, ध्वनि प्रदूषण आदि अनुचित कृत्य भी किए जाते हैं । मूलत: एक धार्मिक उत्सव के रूप में मनाए जानेवाले इस कार्यक्रम को व्यायसायिक रूप प्राप्त हुआ है । ये अपप्रकार अर्थात धर्म एवं संस्कृति की हानि करना है । इन अपप्रकारों को रोकने हेतु उचित कृत्य करना अर्थात कालानुसार आवश्यक धर्मपालन करना ही है।

क्या धार्मिक विधि में इस प्रकार गरबा खेलने से देवी मां की कृपा हम पर हो सकती है ?

देवी की उपासनास्वरूप परंपरागत गरबा

जब हम उत्कट भाव से देवता का आदर-सम्मान करेंगे, तभी उनकी कृपा प्राप्त कर पाएंगे । गरबा नृत्य में होनेवाले अनाचारों जैसे कृत्यों से नहीं, भावपूर्ण पूजन से भक्तपर देवीमां की पूर्ण कृपा होती है । इसीलिए गरबा खेलने को हिंदु धर्म में देवी की उपासना मानते हैं । इसमें देवी का भक्तिरसपूर्ण गुणगान करते हैं ।

इस समय देवी के समक्ष पारंपरिक भावपूर्ण नृत्य के साथ तालियों एवं छोटे-छोटे डंडों से लयबद्ध ध्वनि भी करते हैं । मूल पारंपरिक गरबा नृत्य में तीन तालियां बजाई जाती हैं । पहली ताली नीचे झुककर, दूसरी ताली खडे होकर और तीसरी ताली हाथ ऊपर उठाकर बजाई जाती है ।

इस समय देवी के समक्ष पारंपरिक भावपूर्ण नृत्य किया जाता हैं । नृत्यमे प्रत्येक स्तरपर तीन तालियां बजायी जाती है । एवं छोटे छोटे डंडो से लयबद्ध ध्वनि भी करते हैं । गरबा खेलते समय गोल घेरा बनाते हैं । साथही देवी के गीत अथवा भजन गाते हैं ।

इस प्रकार तालियां बजाकर भजन एवं नृत्य करना एक प्रकार से सगुण उपासना ही है । इस उपासना पद्धति में तालियों के नाद से श्री दुर्गादेवी को जागृत करते हैं । और ब्रह्मांड में कार्य करने के लिए मारक रूप धारण करने के लिए आवाहन करते हैं ।

देवी का अनादर रोकना

आजकल चित्र, नाटक, विज्ञापन इत्यादिद्वारा देवी-देवताओं का अनादर किया जा रहा है । इस से धर्महानि होती है ।

देवी के संदर्भ में अवमानना का उदाहरण :

हिन्दूद्वेषी चित्रकार म.फि. हुसेन ने हिन्दुओं के देवता के नग्न चित्र बनाकर उनकी सार्वजनिक बिक्री के लिए रखा; व्याख्यान, पुस्तक आदि के माध्यम से देवताओं की आलोचना की जाती है; व्यापारीवर्ग अपने उत्पादों के विज्ञापनों में देवताओं का मॉडेल के रूप में प्रयोग करते हैं; देवताओं की वेशभूषा कर भीख मांगी जाती है ।

ग्रीस अर्थात यूनान की ‘सदर्न कम्फर्ट विस्की’ नामक कंपनी ने एक विज्ञापन में श्रीदुर्गादेवी के आठों हाथों में विस्की की बोतल दर्शायी । हिंदू जनजागृति समिति ने भारत में ग्रीस के राजदूत को निषेध पत्र भेजा । इस विरोध के कारण यह चित्र कंपनीद्वारा हटाया गया ।

‘बायर’ नामक कंपनी के ‘सॅन्क्य् श्यूर् सॅन्क्य् (Cinq sur Cinq) ’ नामक मच्छर भगाने को औषधि के विज्ञापन में पहले चित्र में कालीमां को दस हाथों में शस्त्र दिखाया । दूसरे चित्र में देवी के दो हाथ ही शस्त्ररहित दिखाए गए हैं, क्योंकि उनके पास बायर कंपनी को मच्छर मारनेवाली दवाई है ! इस अपमान को जानकारी मिलते ही हिंदू जनजागृति समिति ने कंपनी को निषेध पत्र भेजकर रोष व्यक्त किया । निषेध को ओर तत्काल ध्यान देकर कंपनी ने क्षमायाचना की । कंपनी ने समिति को भेजे अप ने पत्र में कहा, हमारे कारण आपको हुई असुविधा एवं कष्ट के लिए हम आपकी क्षमा मांगते है । हम हिंदू धर्म का आदर करते है । आपका विश्वसनीय – मार्क क्लाफेन ।

मूर्ति शास्त्रानुसार बनाई जाए, तो ही देवता का तत्त्व आकृष्ट होता है

ध्यान रहे, जहां देवता का शब्द अर्थात नाम है, वहां उनकी शक्ति भी होती है, इसलिए ऐसा करना अनुचित है । श्रद्धा देवताओं को उपासना को नींव है । देवताओं का अनादर श्रद्धा को क्षति पहुंचाता है । इसलिए देवताओं के इस प्रकार के अनादर से धर्महानि होती है । यह धर्महानि रोकना कालानुसार आवश्यक धर्मपालन ही है । यह देवता को समष्टि स्तर को अर्थात सामाजिक स्तर को उपासना है । ऐसी घटनाओं को रोकना एवं इस संदर्भ में अन्यों को मार्गदर्शन करना ईश्वर को सेवा है । यह साधना का ही एक अंग है । इस विडंबना को रोकने के लिए सनातन संस्था एवं हिंदू जनजागृति समिति सन २ सहस्त्र से विभिन्न माध्यमोंद्वारा जनजागृति अभियान चला रही है । आप इस इस संदर्भ में जागृत रहिए तथा इस दिशा में प्रयास कीजिए । यह धर्महानि रोकने के लिए देवीमां हमें बल, बुद्धि एवं क्षात्रवृत्ति अर्थात अन्याय के विरुद्ध प्रतिकार करने को क्षमता प्रदान कर साधना में आनेवाले विघ्नों का अवश्य हरण करेंगी ।