जानें सावन की शिवरात्रि का महत्त्व, पूजा का समय और विधि

Mahashivratri

19 जुलाई यानि कल सावन महीने की शिवरात्रि का उत्सव मनाया जाएगा। आमतौर पर शिवरात्रि तो हर महीने आती है, लेकिन सावन और फाल्गुन के मास में आने वाली शिवरात्रि का विशेष महत्त्व होता है। सावन के महीने में भगवान शिव की पूजा-आराधना की जाती है और उनका जलाभिषेक किया जाता है। मान्यता है कि और दिनों के मुकाबले सावन के महीने में शिवरात्रि पर जल चढ़ाने से भगवान शिव अति प्रसन्न हो जाते हैं।

पंडित विद्यासागर शर्मा बताते हैं कि प्रातः नित्यक्रम से निवृत्त होकर स्नान करें। उसके बाद स्वच्छ वस्त्र धारण कर मंदिर जाएं और भोले की सच्चे मन से आराधना करें, सोर बिगड़े काम बन जाएंगे। हालांकि शिवरात्री पर कोरोना संकट के कारण मंदिर बंद होने पर घर पर ही पूजा उपासना करें। शिवजी के अभिषेक के लिए शिवपुराण में बताया गया है कि दूध, घी, दही, शहद, चीनी इत्र, चंदन, केसर और भांग जो भी वस्तु उपलब्ध हो जल के साथ भगवान शिव का अभिषेक करें।

Shiv

सावन के महीने में शिवलिंग पर जलाभिषेक के लिए 19 जुलाई की प्रातः 5.40 से 7.52 बजे तक का समय शुभ फलदायी रहेगा। प्रदोष काल में जलाभिषेक करना काफी शुभ रहता है। ऐसे में 19 जुलाई की शाम के समय 7.28 से रात 9.30 बजे तक प्रदोष काल में जलाभिषेक किया जा सकता है। 

पूजा मुहूर्त
चतुर्दशी तिथि प्रारम्भ - जुलाई 19, 2020 को 12.41 पर
चतुर्दशी तिथि समाप्त - जुलाई 20, 2020 को 12.10 पर 
निशिता काल पूजा समय - 12.07 से 12.10 तक

विधि
अगर शिवरात्रि के दिन शिव की आराधना पंचामृत से करें तो अति उत्तम होता है। शिव की ही ऐसी पूजा है, जिसमंे केवल बेलपत्र, पुष्प फल और जल का अर्पण करके उसका पूर्ण फल प्राप्त किया जा सकता है। आपके पास जो भी सामग्री हो उसे लेकर श्रद्धा और विश्वास के साथ भगवान शिव की पूजा-आराधना करें। ॐ नमः शिवाय करालं महाकाल कालं कृपालं ॐ नमः शिवाय ! का जप करते रहें, साथ ही ॐ नमो भगवते रुद्राय, का जप भी कर सकते हैं। ऐसा जपते हुए बेलपत्र पर चन्दन या अष्टगंध से राम-राम लिख कर शिवलिंग पर चढ़ाएं। 

आपको बता दें कि पुत्र पाने की इच्छा रखने वाले शिव भक्त मंदार पुष्प से, घर में सुख शान्ति चाहने वाले धतूरे के पुष्प अथवा फल से, शत्रुओं पर विजय पाने वाले अथवा मुकदमों में सफलता की इच्छा रखने वाले भक्त भांग से शिव पूजा करें, तो सभी तरह की बाधाएं समाप्त हो जाएंगी। 

संपूर्ण कष्टों और पुनर्जन्मों से मुक्ति चाहने वाले मनुष्य गंगा जल और पंचामृत चढाते हुए ॐ नमो भगवते रुद्राय ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि तन्नों रुद्रः प्रचोदयात। इस मंत्र को पढ़ते हुए सभी सामग्री जो भी यथा संभव हो उसे लेकर समर्पण भाव से शिव को अर्पित करें। इस तरह आप श्रद्धाभाव और विश्वास के साथ जो भी शिव को अर्पण करेंगे उससे महादेव आपकी सभी मनोकामनायें पूर्ण करेंगे।