आज है न्याय के देवता की जयंती, जानें इस शनि अमावस्या को कैसे बन रहा है ग्रहों का अद्भुत संयोग

Shanidev

ज्येष्ठ मास के अमावस्या तिथि को भगवान शनि का जन्मदिन माना जाता है। जो इस वर्ष २२ मई दिन शुक्रवार को देश भर में पूरे धूमधाम से मनाया जा रहा है। ऐसी मान्यता है की आज ही के दिन भगवान सूर्य के घर भगवान शनि का जन्म हुआ था, जो जन्म से न्यायप्रिय और सत्यनिष्ठ माने जाते हैं। इसीलिए इन्हे न्याय का देवता भी कहा जाता है। मान्यता है कि शनि निष्पक्ष रूप से न्याय करते हैं और अगर वे अपने भक्तों से प्रसन्न हो जाते हैं तो उनकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं। भगवान शनि का शुभ प्रभाव पाने के लिए लोग आज की दिन विशेष पूजा करते हैं। इस दिन लोग साढ़े साती के दुष्प्रभाव को कम करने के लिए शनि शांति पूजा भी करवाते हैं। 

आज की तिथि अर्थात ज्येष्ठ मास अमावस्या को वट-सावित्री पूजा भी होती है। इस दिन सुहागन वट वृक्ष की पूजा करती है और भगवान से विशाल वट वृक्ष के समान सुहागन होने की वर मांगती है। इसलिए शनि अमावस्या के नाम से जाना जानेवाला इस दिन भगवान शनि का जन्मोत्सव वट सावित्री व्रत के साथ मनाया जाता है। इस दिन भक्त व्रत रखते हैं और शनि देव की कृपा पाने के लिए उनकी प्रतिमा का पूजा-दर्शन करते हैं।

कहते हैं की शनि देव ने अनेक वर्षों तक त्रिकालदर्शी भगवान शिव की घोर तपस्या की। शनिदेव की भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उनसे वरदान मांगने को कहा। शनिदेव ने प्रार्थना करते हुए भगवन से माँगा की ‘मै सर्व में सत्यनिष्ठ-न्यायप्रिय व पूज्य बनूं।’ तब भगवान शिव ने उन्हें  नवग्रहों में सर्वश्रेष्ठ स्थान का वरदान देते हुए कहा, ‘तुम पृथ्वीलोक के न्यायाधीश माने जाओगे।’

ग्रह-राशि चक्र के अनुसार शनि मकर और कुम्भ राशि के स्वामी है। भगवान शनि लोगों को उनके कर्मो के आधार पर फल या दंड देते हैं। जानकार मानते हैं की इस बार इस तिथि को ग्रहों क अद्भुत संयोग बन रहा है। मकर राशि में सूर्य और गुरु एक साथ रहेंगे। वृषभ में सूर्य, चंद्र और शुक्र एक साथ रहेंगे। इस संयोग से पांच (5) राशियों को लाभ के आसार बन रहे हैं। ये पांच राशियां हैं मेष, वृषभ, मिथुन, कन्या और मकर। इन पांच राशि वालों को इस भगवान शनि जयंती को विशेष लाभ मिलने के सम्भावना है। 

शनि देव के मंत्रः-
तांत्रिक मंत्र: ऊँ प्रां प्रीं प्रौं सः शनये नमः।
वैदिक मंत्र: ऊँ शन्नो देवीरभिष्टडआपो भवन्तुपीतये।
एकाक्षरी मंत्र: ऊँ शं शनैश्चाराय नमः।
गायत्री मंत्र: ऊँ भगभवाय विद्महैं मृत्युरुपाय धीमहि तन्नो शनिः प्रचोद्यात।

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