जानें वैशाख माह की महिमा, क्यों है स्नान का सार्थकता

Baisakh

धर्म कर्म हिंदू-धर्म में वैशाख (बैसाख) को एक पवित्र माह माना जाता है। वैशाख माह 08 अप्रैल 2020 से शुरू होकर 07 मई 2020 तक रहेगा। वैशाख के महीने में अक्षय तृतीया, बैसाखी, भगवान परशुराम जयंती, वरूथिनी एकादशी, वैशाख अमावस्या, सीता नवमीं, मोहिनी एकादशी, वैशाख पूर्णिमा, पुथन्डू, अम्बेडकर जयंती, सोलर नववर्ष, गंगा सप्तमी त्यौहार पड़ते हैं। इसीलिए इस माह का इतना महत्व माना गया है।

वैशाख में विष्णु जी का पूजन

वैशाख में विष्णु जी का पूजन विशेष रूप से किया जाता है। श्री हरि की कृपा से सभी दुखों से मुक्ति मिलती है और अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। इस महीने में विशेष बातों का ध्यान रखकर आप अपनी कई मुश्किलों को दूर कर सकते हैं। जानकारों का मानना है कि वैशाख के महीने में संयंमित खान-पान और सही दिनचर्या के साथ अगर नारायण की पूजा उपासना की जाए तो आपका जीवन का खुशियों से भर सकता है।

शास्त्रों में वैशाख मास को अत्यंत पवित्र और पुण्यदायी बताया गया है। सनातन संस्कृति के धर्मशास्त्रों में वैशाख मास का काफी महिमामंडन किया गया है और इसको देव आराधना, दान, पुण्य के लिए श्रेष्ठ मास बतलाया गया है। इसलिए कहा गया है कि

‘‘वैशाख के समान कोई मास नहीं है, सत्ययुग के समान कोई युग नहीं है,
वेद के समान कोई शास्त्र नहीं है और गंगाजी के समान कोई तीर्थ नहीं है।’’

महर्षि नारद ने राजा अम्बरीष को वैशाख मास का माहात्मय सुनाया था। नारदजी ने राजा अम्बरीष से कहा था कि वैशाख मास धर्म, यज्ञ, क्रिया और तपस्या सभी का सार है और समस्त देवी-देवताओं के द्वारा पूजित है। जिस तरह विद्याओं में वेद-विद्या, मंत्रों में प्रणव, वृक्षों में कल्पवृक्ष, धेनुओं में कामधेनु, देवताओं में विष्णु, वर्णों में ब्राह्मण, प्रिय वस्तुओं में प्राण, नदियों में गंगाजी, तेजों में सूर्य, अस्त्र-शस्त्रों में चक्र, धातुओं में स्वर्ण, वैष्णवों में शिव और रत्नों में कौस्तुभमणि सर्वोत्तम है, उसी तरह धर्म के साधनभूत महीनों में वैशाख मास सबसे उत्तम है। भगवान लक्ष्मीनारायण को प्रसन्न करने वाला इसके जैसा दूसरा कोई मास नहीं है।

वैशाख मास में है स्नान की सार्थकता

कहा जाता है कि वैशाख मास में देवता आदि जल में सदैव विद्यमान रहते हैं। भगवान विष्णु की आज्ञा का पालन करते हुए, मानव का कल्याण करने के लिए वे सूर्योदय से लेकर छह दंड के अंदर वहां पर उपस्थित रहते हैं। इसलि, जो व्यक्ति प्रातःकाल सूर्योदय से पहले स्नान करता है, वह भगवान विष्णु का विशेष कृृपापात्र होता है। होता है। वैशाख उत्तम महीना है और हमेशा से भगवान विष्णु को प्रिय रहा है। स्कंदपुराण में भी वैशाख मास को सभी मासों में उत्तम बताया गया है। जो पुण्य सब दानों से मिलता है और जो फल सब तीर्थों के दर्शन से प्राप्त होता है, उसी पुण्य और फल की प्राप्ति वैशाख मास में सिर्फ जल का दान करने से हो जाती है। यह समस्त दानों से बढ़कर लाभ पहुंचाने वाला है। जो मानव वैशाख मास में राह पर यात्रियों के लिए प्याऊ लगाता है, वह सब देवताओं को प्रसन्न कर देता है और वह विष्णुलोक का वासी होता है।

Comments   

0 #1 Jaspal 2020-04-30 21:23
बहुत बहुत बधाई इस प्रकार की महत्वपूर्ण जानकारी देने के लिए !
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