Nag Panchami

आज है नाग पंचमी, जानें कौन सी राशियां होंगी प्रभावित

सावन के पवित्र महीने में मनाया जाने वाला नाग पंचमी का त्यौहार नाग देवता की पूजा के लिए समर्पित है। द्रिक पंचांग के अनुसार, नाग पंचमी श्रावण मास के चन्द्र मास में उज्ज्वल अर्ध (शुक्ल पक्ष) के पांचवें दिन पर पड़ती है, जो जुलाई और अगस्त के महीने में होती है। यह हरियाली तीज के दो दिन बाद दिन मनाया जाता है।

हालांकि, भारत के कुछ राज्यों में जैसे गुजरात में, नाग पंचमी 8 अगस्त को मनाई जाएगी। आंध्र प्रदेश में नाग चतुर्थी या नागुल चैविती को दीपावली के ठीक बाद मनाया जाता है और तमिलनाडु में छह दिनों तक चलने वाले सोहराय समरोह के उत्सव के साथ मेल खाता है। 

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जानें सावन की शिवरात्रि का महत्त्व, पूजा का समय और विधि

19 जुलाई यानि कल सावन महीने की शिवरात्रि का उत्सव मनाया जाएगा। आमतौर पर शिवरात्रि तो हर महीने आती है, लेकिन सावन और फाल्गुन के मास में आने वाली शिवरात्रि का विशेष महत्त्व होता है। सावन के महीने में भगवान शिव की पूजा-आराधना की जाती है और उनका जलाभिषेक किया जाता है। मान्यता है कि और दिनों के मुकाबले सावन के महीने में शिवरात्रि पर जल चढ़ाने से भगवान शिव अति प्रसन्न हो जाते हैं।

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6 जुलाई से शुरू हो रहा सावन, जानें इस मास की महिमा

सावन का महीना 6 जुलाई यानि आने वाले सोमवार से शुरू हो रहा है, जो 3 अगस्त, सोमवार को समाप्त होगा। सावन के पर्व को लेकर मंदिरों में तैयारियां शुरू हो गईं हैं। लेकिन इस बार लाॅकडाउन की वजह से भक्तों को जलाभिषेक घर पर ही करना पड़ेगा। इस बार सावन में पांच सोमवार होंगे। हिंदू पंचांग के अनुसार चौथा महीना श्रावण (सावन) का होता है। 

पंडित विद्यासागर शर्मा ने बताया कि एक जुलाई को देवशयनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु क्षीर सागर में निंद्रा में चले गए हैं। इसके बाद देवोत्थान एकादशी 25 नवंबर को निंद्रा से जागेंगे। मान्यता है कि इस दौरान भगवान शिव सृष्टि का संचालन करेंगे। सावन के महीने में भगवान शिव और विष्णु की आराधना बहुत फलदायी मानी जाती है। पूरे श्रावण मास में 6, 13, 20, 27 जुलाई और 3 अगस्त को सावन के सोमवार हैं। लोग घरों पर ही जलाभिषेक कर पुण्यलाभ लें। 

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कल गुरू पूर्णिमा पर लगेगा चंद्रग्रहण, जानिए क्या होगा असर

एक मास पूरा होने पर पुनः रविवार 5 जुलाई को चंद्रग्रहण लग रहा है। आषाढ़ मास की पूर्णिमा सुबह 8.38 बजे से 11.21 बजे तक चंद्र ग्रहण रहेगा। यह इस वर्ष का तीसरा चंद्रग्रहण और सूर्य ग्रहण सहित इस मास का तीसरा ग्रहण होगा। उपच्छाया ग्रहण होने के कारण इसका प्रभाव भारत में बहुत कम रहेगा। यह चंद्र ग्रहण अमेरिका, यूरोप और अफ्रीका के कुछ हिस्से में दिखाई दे सकता है। 

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Eclipse: वर्षों बाद ऐसा योग, एक माह में लगेंगे 3 ग्रहण, जाने क्या होगा इसका प्रभाव

सन् 1962 में 17 जुलाई से 17 अगस्त के मध्य तीन ग्रहण लगे थे। अब करीब 58 वर्ष बाद ठीक वैसा ही योग बनने जा रहा है, जब केवल 30 दिनों अर्थात एक माह के भीतर तीन ग्रहण लगेंगे।