Karwachauth

Karwa Chauth 2021: क्यों माना जाता है अखंड सुहाग का प्रतीक- ‘करवा चौथ’

व्रतेन दीक्षामाप्नोति दीक्षयाऽऽप्नोति दक्षिणाम् ।
दक्षिणा श्रद्धामाप्नोति श्रद्धया सत्यमाप्यते ।। 

अर्थ : व्रत धारण करने से मनुष्य दीक्षित होता है। दीक्षा से उसे दक्षता, निपुणता प्राप्त होता है। दक्षता की प्राप्ति से श्रद्धा का भाव जागृत होता है और श्रद्धा से ही सत्य स्वरूप ब्रह्म की प्राप्ति होती है। 

ThiruvarppuTemple

'भूखे हैं भगवानः कान्हा की अनोखी भक्ति’

अगर इस मंदिर का प्रसादम चख लिया, तो आप जीवनपर्यंत भूखे नहीं रहेंगे            

तिरुवरप्पु कृष्णा मंदिर दुनिया का सबसे असामान्य मंदिर है। यह मंदिर 23.58 x 7 खुला रहता है। यहाँ भगवान कृष्ण हमेशा ही विराजमान रहते हैं। डेढ़ हजार वर्ष पुराना यह मंदिर केरल के कोट्टायम जिले में तिरुवरप्पु में स्थित है। मान्यता है कि यहां भगवान श्रीकृष्ण के प्रतिष्ठित विग्रह हमेशा भूख में रहते हैं इसलिए यह मंदिर 23.58 घंटे, 365 दिन खुला रखा जाता है।

PapankushaEkadashi

Papankusha Ekadashi 2021: जानिए! पापांकुशा एकादशी के व्रत का महत्व और व्रत कथा

आश्विन मास के शुक्ल पक्ष में पड़ने वाली एकादशी को पापंकुशा एकादशी के नाम से जाना जाता है। हिंदू धर्म में एकादशी का बहुत महत्व है। एकादशी के दिन विधि-विधान से भगवान विष्णु की पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार एकादशी का व्रत करने से मृत्यु के बाद मोक्ष की प्राप्ति होती है। आज पापंकुशा एकादशी का व्रत है। आइए जानते हैं पापंकुशा एकादशी में व्रत का महत्व और इसकी व्रत कथा।

Durgapuja

विजयादशमी और दशहरा में क्या है अंतर, जानें यहां!

प्रत्येक वर्ष शारदीय नवरात्रि के खत्म होते ही दशहरे का पर्व मनाया जाता है। तो वहीं धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इसे विजयादशमी के नाम से भी जाना जाता है। हिंदू धर्म के ग्रंथों व शास्त्रों में वर्णन मिलता है कि इस दिन श्रीराम ने रावण का वध कर उस पर विजय प्राप्त की थी। जिस कारण देश के कोने-कोने में लोग रावण दहन कर बुराई पर अच्छाई की विजय का झंडा लहराते हैं। इसके अलावा इस शारदीय नवरात्रि का पर्व समाप्त होता है, इसलिए दशहरे के दिन देवी दुर्गा की प्रतिमा का विसर्जन किया जाता है। कुछ लोग इसे दशहरे के नाम से जानते हैं तो कुछ लोग विजयदशमी कहते हैं। मगर इस दिन को 2 नामों से क्यों जाना जाता है और क्या इनमें कोई फर्क है, क्या इन नामों से कोई अन्य मान्यता जुड़ी है। अगर आपके मन में भी ये सवाल आ रहे हैं, तो चलिए हम आपको बताते हैं कि दशहरा और विजयदशमी में क्या कोई अंतर है या नहीं।

Dussehra

दशहरे पर बन रहे तीन शुभ योग, इस तरह करें शुभ मुहूर्त में पूजा

दशहरे के दिन को बुराई पर अच्छाई की जीत के रूप में मनाया जाता है। हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, असुर महिषासुर ने देवताओं के बीच आतंक पैदा किया था, इसलिए उन्होंने भगवान महादेव की मदद मांगी। तब भगवान शिव ने माता पार्वती को प्रबुद्ध किया और उनके पास असुर को समाप्त करने की शक्ति थी। ये नवरात्रि का आखिरी दिन था। माता दुर्गा ने महिषासुर का वध किया और देवताओं को उसके प्रकोप से बचाया। वहीं, ये दिन रावण पर भगवान राम की जीत का प्रतीक भी है। जैसा कि पवित्र पुस्तक रामायण में भी लिखा है कि प्रभु श्रीराम के हाथों रावण का वध होने के बाद से ही दशहरे को मनाने की परंपरा शुरू हुई थी।