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इन तारीखों पर लगेगा चारधाम यात्रा पर विराम, जानें पूरा शेड्यूल

नई दिल्लीः विजयदशमी के शुभ अवसर पर, चारों धामों के कपाट बंद करने का शुभ मुहूर्त तय किया गया है। कोरोना काल के प्रकोप के दौरान भी केदारनाथ धाम (Kedarnath Temple) में भक्तों का काफी आना-जाना लगा रहा। हालांकि अब मंदिर बंद होने में कुछ दिन शेष रह गए हैं। बता दें कि चारों धामों के कपाट शीतकाल में भारी बर्फबारी के कारण बंद कर दिए जाते हैं। गंगोत्री धाम (Gangotri Temple) के कपाट बंद होने के बाद श्रद्धालु मुखीमठ (मुखवा) में अपने शीतकालीन प्रवास के लिए विदेशों में माँ गंगा के दर्शन कर सकेंगे।

Garba

जानें कैसे करें कंजक पूजन, क्या है इसका शास्त्रीय आधार, महत्त्व एवं नियम

नवरात्रि के 9 दिनों में मां दुर्गा के अलग-अलग 9 स्वरूपों की भक्त आराधना करते हैं। भक्त मां दुर्गा की विशेष कृपा पाने के लिए इन 9 दिनों का व्रत रखते हैं। व्रत के दौरान अष्टमी यानी कि व्रत के आठवें दिन 9 कन्याओं का पूजन करने का विधान है। वैसे कुछ लोग नवमीं भी पूजते हैं। अष्टमी और नवमीं को कुमारिकाओं की पूजा कर उन्हें शुद्ध घी का बना भोजन करवाएं। सुहागिन अर्थात प्रकट शक्ति व कुमारिका अर्थात अप्रकट शक्ति। प्रकट शक्ति का कुछ अपव्यय हो जाता है, अतएव सुहागिनों की अपेक्षा कुमारिकाओं में कुल शक्ति अधिक होती है। इसलिए कुमारिकाओं की ही कंजक पूजन के दिन पूजा की जाती है।

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नवरात्रि में होनेवाले अनुचित कृत्यों को रोककर उत्सव को पवित्रता बनाए रखें!

नवरात्रि में विभिन्न प्रांतों में किए जानेवाले धार्मिक कार्यक्रमों की एक महत्त्वपूर्ण विधि है, गरबा । पूर्वकाल में ‘गरबा’ नृत्य के समय देवी, कृष्णलीला एवं संतरचित गीत ही गाए जाते थे । वर्तमान काल में भगवान के इस सामूहिक नृत्य की उपासना में विकृतियां आ गई हैं । ‘रिमिक्स’, पश्चिमी संगीत अथवा चलचित्रों के गीतों की ताल पर अश्लील हावभाव में मनोरंजन के लिए गरबे के स्थान पर ‘डिस्को-डांडिया’ खेला जाता है । गरबे को निमित्त बनाकर व्याभिचार आदि भी किया जाता है । पूजास्थल पर तंबाकू सेवन, मद्यपान, ध्वनि प्रदूषण आदि अनुचित कृत्य भी किए जाते हैं । मूलत: एक धार्मिक उत्सव के रूप में मनाए जानेवाले इस कार्यक्रम को व्यायसायिक रूप प्राप्त हुआ है । ये अपप्रकार अर्थात धर्म एवं संस्कृति की हानि करना है । इन अपप्रकारों को रोकने हेतु उचित कृत्य करना अर्थात कालानुसार आवश्यक धर्मपालन करना ही है।

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जानिये! नवरात्रि में घटस्थापना के उपरांत, पंचमी से नवमी तक का विशेष महत्त्व

नवरात्रि के 9 दिनों में घटस्थापना के उपरांत पंचमी, षष्ठी, अष्टमी एवं नवमी का विशेष महत्त्व है। पंचमी के दिन देवी के 9 रूपों में से एक श्री ललिता देवी अर्थात महात्रिपुर सुंदरी का व्रत होता है। शुक्ल अष्टमी एवं नवमी ये महातिथियां हैं। इन तिथियों पर चंडीहोम करते हैं। नवमीपर चंडीहोम के साथ बलि समर्पण करते हैं।

Navratra Thali

जनिये! नवरात्र में व्रत के दौरान कैसे रखें अपने को फिट

नवरात्र शुरू हो गये हैं। ऐसे में लोग देवी माँ का आर्शीवाद पाने के लिए 9 दिन का का कठिन व्रत लेते हैं। लेकिन, उनके मन में हमेशा शंका बनी रहती हैं कि व्रत में ऐसा क्या खायें कि पूरे दिन देवी माँ की भक्ति के लिए ऊर्जा मिलती रहे। ऐसे में आजकल बाजार में तरह-तरह का खाने का सामान उपलब्ध है और घर पर भी कई तरह के पकवान बनाये जा सकते हैं। नवरात्र में भक्तो को अपने शरीर के अनुसार ही व्रत करना चाहिए। इसलिए अगर आप 9 दिन तक उपवास नहीं रख सकते तो पहले और आखिरी नवरात्र को व्रत रख सकते हैं। लेकिन व्रत कोई भी हो सावधानी बरतना भी जरूरी है। आज हम आपको बता रहें है कि व्रत में कैसे सावधानी बरती जाए, ताकि आपको व्रत में शक्ति भी मिले और आपका उद्देश्य भी पूरा हो जाए। 

ऊर्जा के लिए लें फाइबर युक्त भोजन
व्रत के दौरान हमेशा फाइबर युक्त भोजन ही करें। व्रत के दौरान आप हमेशा ऐसा भोजन लें जो फाइबर से भरपूर हो और आसानी से पच जाए। ऐसा करने से आपको लम्बे समय तक ऊर्जा मिलेगी और आप अच्छा महसूस करेंगे। व्रत के खाने में आप कुट्टु का आटा, सिंघाड़ा, साबूदाना की खीर अथवा खिचड़ी और आलू आदि शामिल करें।

अच्छी नींद है जरूरी
जब भी आप व्रत रखें नींद पूरी लें। क्योंकि व्रत के दौरान हमारा शरीर डिटॉक्स से गुजर रहा होता है, ऐसे में हमें आराम की जरूरत होती है। इसलिए आप रोज 7 से 8 घंटे की नींद अवश्य लें। साथ ही अपने शरीर को पूरी तरह से डिटॉक्सिफाई करने के लिए योग और हल्की एक्सरसाइज भी कर सकती हैं।

तरल पदार्थ ज्यादा मात्रा लें
नवरात्र में अगर आप व्रत रखते हैं तो आपको डिहाइड्रेशन से बचना होगा। व्रत के दौरान अपने शरीर में तरल की मात्रा को कम नहीं होने देना है। इसलिए खूब पानी पीने पियें और साथ ही आप अन्य प्रकार के तरल भी ले सकते हैं। पानी के अलावा आप नारियल पानी, दूध, लस्सी और ताजे फलों का रस भी ले सकती हैं जो न केवल थकान से बचाएगा बल्कि रोगों से भी दूर रखेगा। 

व्रत में ज्यादा न खायें
व्रत के दौरान भूख ज्यादा लगती है। इस कारण लोग ज्यादा खा जाते हैं, जो शरीर के लिए नुकसानदेह हो सकता है। इसलिए ज्यादा खाने से पहले एक बार जरूर सोचें। व्रत के दौरान ज्यादा खाना आपके पाचन तंत्र को प्रभावित कर सकता है। इसलिए आप चिकने और तले हुए भोजन से दूर रहें और खाने में ताजे फल और सब्जियों का इस्तेमाल करें। 

हेल्दी स्नैक्स को प्राथमिकता दें
व्रत में फलाहार के साथ स्नैक्स खाने की इच्छा होती है, लेकिन इसके लिए आप बाजार के बने हुए आलू के चिप्स न खाएं। इसके लिए आप घर पर ही मखाने और मूंगफली भून कर रख सकते हैं और जब भी आपका मन स्नैक्स खाने का करे तो इसे इस्तेमाल कर सकते हैं। मखाना विटामिन डी का अच्छा स्रोत होता है। 

आहार में ज्यादा मीठा न लें
व्रत के दौरान मीठे खाने की तीव्र इच्छा होती है। बाजार में व्रत में खाने के लिए मीठे की बहुत वैरायटी उपलब्ध होती है। ये जितने भी पैक्ड स्नैक्स होते हैं उनमें प्रोसेस्ड चीनी और रिफाइंड का इस्तेमाल होता है, जो आपकी सेहत खराब कर सकता है। इसलिए अगर व्रत के दौरान कुछ मीठा खाने की इच्छा करे तो घर पर बने मीठे का इस्तेमाल कर सकते हैं। इसके लिए घर पर ही आप घीये की बर्फी बना सकते है, जो खाने में स्वादिष्ट भी होगी और सेहत के लिए भी अच्छी 

इन बातों का भी रखें ध्यान:
घर में बना भोजन ही खाएं
पानी और दूसरे तरह की लिक्विड लगातार लेते रहें
उपवास के दौरान डेयरी प्रोडक्ट का करें इस्तेमाल 
मौसमी फल आहार में करें शामिल
एक साथ ज्यादा पानी पीने के बजाए, थोड़े अंतराल पर पानी पीते रहें
सिंघाड़े और कुट्टू के आटे से बनी हुई चीजें करें इस्तेमाल
पानी में नींबू और शहद मिलाकर पियें, इससे भूख को कंट्रोल करने में मदद मिलेगी