Shanidev

आज है न्याय के देवता की जयंती, जानें इस शनि अमावस्या को कैसे बन रहा है ग्रहों का अद्भुत संयोग

in religious

ज्येष्ठ मास के अमावस्या तिथि को भगवान शनि का जन्मदिन माना जाता है। जो इस वर्ष २२ मई दिन शुक्रवार को देश भर में पूरे धूमधाम से मनाया जा रहा है। ऐसी मान्यता है की आज ही के दिन भगवान सूर्य के घर भगवान शनि का जन्म हुआ था, जो जन्म से न्यायप्रिय और सत्यनिष्ठ माने जाते हैं। इसीलिए इन्हे न्याय का देवता भी कहा जाता है। मान्यता है कि शनि निष्पक्ष रूप से न्याय करते हैं और अगर वे अपने भक्तों से प्रसन्न हो जाते हैं तो उनकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं। भगवान शनि का शुभ प्रभाव पाने के लिए लोग आज की दिन विशेष पूजा करते हैं। इस दिन लोग साढ़े साती के दुष्प्रभाव को कम करने के लिए शनि शांति पूजा भी करवाते हैं। 

Written by RAKESH RANJAN
Hits: 222
Tirupati Temple

भारतीय समाज और मंदिरों की प्रासंगिकता

in religious
    
भारतीय समाज एक ऐसे विशाल सागर की तरह है, जो न जाने कितनी संस्कृतियों को अपने अंदर समेटे हुए है। ये संस्कृतियां न केवल सुरक्षित रहीं हैं, बल्कि इनमें विकास की अविरल धारा भी निर्बाध रूप से बहती रही है। आज चर्चा का विषय यही है कि युग परिवर्तन के बावजूद भारतीय समाज की यह विशेषता समय के साथ और मजबूत हुई है। यह समाज में होने वाले परिवर्तन को न केवल आत्मसात करता है, वरन् उस परिवर्तन के फलस्वरूप समाज में जो भिन्नता आती है, उसे भी सकारात्मक तरीके से ग्रहण कर लेता है। 
Written by नीरज कौशिक
Hits: 359
Baisakh

जानें वैशाख माह की महिमा, क्यों है स्नान का सार्थकता

in religious

धर्म कर्म हिंदू-धर्म में वैशाख (बैसाख) को एक पवित्र माह माना जाता है। वैशाख माह 08 अप्रैल 2020 से शुरू होकर 07 मई 2020 तक रहेगा। वैशाख के महीने में अक्षय तृतीया, बैसाखी, भगवान परशुराम जयंती, वरूथिनी एकादशी, वैशाख अमावस्या, सीता नवमीं, मोहिनी एकादशी, वैशाख पूर्णिमा, पुथन्डू, अम्बेडकर जयंती, सोलर नववर्ष, गंगा सप्तमी त्यौहार पड़ते हैं। इसीलिए इस माह का इतना महत्व माना गया है।

वैशाख में विष्णु जी का पूजन

वैशाख में विष्णु जी का पूजन विशेष रूप से किया जाता है। श्री हरि की कृपा से सभी दुखों से मुक्ति मिलती है और अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। इस महीने में विशेष बातों का ध्यान रखकर आप अपनी कई मुश्किलों को दूर कर सकते हैं। जानकारों का मानना है कि वैशाख के महीने में संयंमित खान-पान और सही दिनचर्या के साथ अगर नारायण की पूजा उपासना की जाए तो आपका जीवन का खुशियों से भर सकता है।

शास्त्रों में वैशाख मास को अत्यंत पवित्र और पुण्यदायी बताया गया है। सनातन संस्कृति के धर्मशास्त्रों में वैशाख मास का काफी महिमामंडन किया गया है और इसको देव आराधना, दान, पुण्य के लिए श्रेष्ठ मास बतलाया गया है। इसलिए कहा गया है कि

‘‘वैशाख के समान कोई मास नहीं है, सत्ययुग के समान कोई युग नहीं है,
वेद के समान कोई शास्त्र नहीं है और गंगाजी के समान कोई तीर्थ नहीं है।’’

महर्षि नारद ने राजा अम्बरीष को वैशाख मास का माहात्मय सुनाया था। नारदजी ने राजा अम्बरीष से कहा था कि वैशाख मास धर्म, यज्ञ, क्रिया और तपस्या सभी का सार है और समस्त देवी-देवताओं के द्वारा पूजित है। जिस तरह विद्याओं में वेद-विद्या, मंत्रों में प्रणव, वृक्षों में कल्पवृक्ष, धेनुओं में कामधेनु, देवताओं में विष्णु, वर्णों में ब्राह्मण, प्रिय वस्तुओं में प्राण, नदियों में गंगाजी, तेजों में सूर्य, अस्त्र-शस्त्रों में चक्र, धातुओं में स्वर्ण, वैष्णवों में शिव और रत्नों में कौस्तुभमणि सर्वोत्तम है, उसी तरह धर्म के साधनभूत महीनों में वैशाख मास सबसे उत्तम है। भगवान लक्ष्मीनारायण को प्रसन्न करने वाला इसके जैसा दूसरा कोई मास नहीं है।

वैशाख मास में है स्नान की सार्थकता

कहा जाता है कि वैशाख मास में देवता आदि जल में सदैव विद्यमान रहते हैं। भगवान विष्णु की आज्ञा का पालन करते हुए, मानव का कल्याण करने के लिए वे सूर्योदय से लेकर छह दंड के अंदर वहां पर उपस्थित रहते हैं। इसलि, जो व्यक्ति प्रातःकाल सूर्योदय से पहले स्नान करता है, वह भगवान विष्णु का विशेष कृृपापात्र होता है। होता है। वैशाख उत्तम महीना है और हमेशा से भगवान विष्णु को प्रिय रहा है। स्कंदपुराण में भी वैशाख मास को सभी मासों में उत्तम बताया गया है। जो पुण्य सब दानों से मिलता है और जो फल सब तीर्थों के दर्शन से प्राप्त होता है, उसी पुण्य और फल की प्राप्ति वैशाख मास में सिर्फ जल का दान करने से हो जाती है। यह समस्त दानों से बढ़कर लाभ पहुंचाने वाला है। जो मानव वैशाख मास में राह पर यात्रियों के लिए प्याऊ लगाता है, वह सब देवताओं को प्रसन्न कर देता है और वह विष्णुलोक का वासी होता है।

Written by RAJ KUMAR
Hits: 410
Akshay

अक्षय तृतीया 2020: क्यों है महत्वपूर्ण?

in religious

राकेश रंजन

भारत में वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया को अक्षय तृतीया के रूप में मनाई जाती है। जैसा की नाम से प्रतीत होता है अक्षय अर्थात जिसका क्षय न हो। इसीलिए इस तिथि को बेहद शुभ माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन सौभाग्य का कभी क्षय नहीं होता है, वहीँ दूसरी तरफ ये भी मान्यता है कि इस दिन किया हुआ कार्य काफी फलदायक होता है। इस वर्ष यह दिन 26 अप्रैल, रविवार को पड़ रहा है।
शास्त्रों के अनुसार अक्षय तृतीया को बिना मुहूर्त देखे कोई भी कार्य किया जा सकता है और इस दिन किये गए प्रत्येक कार्य का पूरा फल मिलता है। यही कारण है की हमारे देश  में विवाह, गृह प्रवेश, व्यापर का शुभारम्भ तथा दूसरे मंगल कार्य जैसे धार्मिक अनुष्ठान इसी दिन किये जाते हैं। इस दिन कोई भी मंगल कार्य के लिए बिना मुहूर्त शुरू किया जाता है।
अक्षय तृतीया 2020: तिथि और शुभ मुहूर्त
हिन्दू पंचांग के अनुसार वैशाख माह के शुक्ल पक्ष तृतीया को मनाई जाती है। कई जगह इसे आखा तीज भी कहते हैं जो कि प्रत्येक वर्ष अंग्रेजी कैलेंडर के अप्रैल महीने में आता है।
अक्षय तृतीया 2020 विवरण: 
-अक्षय तृतीया तिथि: 26 अप्रैल 2020, रविवार
-अक्षय तृतिया तिथि आरम्भ: 25 अप्रैल 2020 शनिवार सुबह 11.51
-अक्षय तृतिया तिथि समाप्त: 26 अप्रैल 2020 रविवार दोपहर 12.18
-पूजा मुहुर्त: 26 अप्रैल 2020 सुबह 5.50 से 12.15 तक

अक्षयतृतीया, शास्त्रानुसार:
अक्षय तृतीया के दिन मिला था द्रौपदी को अक्षय पात्र
महाभारत में जब पांडवों को 13 साल का वनवास मिला था तो एक दिन दुर्वासा ऋषि उनकी कुटिया में आए। उस समय पांडव घर पर नहीं थे और द्रौपदी ने घर में मौजूद सामान से ऋषि का सत्कार किया। इससे दुर्वासा ऋषि बहुत प्रसन्न हुए और उन्होंने द्रौपदी को अक्षय पात्र प्रदान किया। साथ ही दुर्वासा ऋषि ने कहा कि अक्षय तृतीया के दिन जो भी भक्त विष्णु भगवान की पूजा कर गरीबों को दान देगा उसे अक्षय फल प्राप्त होगा। 

-इस दिन को सतयुग और त्रेता युग का आरम्भ माना जाता है।
-इस दिन को महर्षि परशुराम की जयंती के रूप में मनाया जाता है।
-वृंदावन के श्री बांकेबिहारी जी के मंदिर में श्रीविग्रह के चरण दर्शन केवल इसी दिन को होते हैं अन्यथा पूरे वर्ष वस्त्रों से ढके रहते हैं।
इस दिन माता लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए पूजा की जाती है। श्रद्धालु माता लक्ष्मी जी की प्रतिमा को दुग्ध, गंगाजल आदि से स्नान कराकर उनकी विधिवत पूजा इस मंत्र 
ॐ ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद महालक्ष्म्यै नमः 
के शुद्ध उच्चारण के साथ करते हैं।
अक्षय तृतीया को श्रद्धालु क्या करते हैं?
सबसे पहले गंगा अथवा दूसरे पवित्र नदियों में स्नान करते हैं,  फिर पूजा ध्यान तथा ब्राह्मणों को पंखा, अनाज, घी, शक्कर, फल, वस्त्र आदि दान करते हैं।
इस दिन समृद्धि और सौभाग्य की इच्छा रखनेवाले श्रद्धालु  भगवान विष्णु जी और माता लक्ष्मी जी की एक साथ पूजा करते हैं। पूजा में पवित्र तुलसी पत्र का उपयोग का विशेष महत्तव है।

Written by Rakesh Ranjan
Hits: 614