Sharad Purnima: शरद पूर्णिमा में चंद्रमा 16 कलाओं से युक्त पृथ्वी पर करता है अमृत वर्षा: आचार्य शुभ दर्शन

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आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की जो पुर्णिमा होती है उसे शरद् पुर्णिमा कहा जाता है। शरद् पूर्णिमा को हरियाणा व अन्य कुछ क्षेत्रों में महारास पूर्णिमा के नाम से जाना जाता है, तो वहीं उत्तर मध्य भारत में कोजागर पुर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है।

युं तो वर्षभर में बारहों पुर्णिमा का का अपना अलग शास्त्रीय और पौराणिक महत्त्व है, किन्तु शरद् पुर्णिमा का हमारे शास्त्रों में विशेष महत्व बताया गया है।

इस रात्रि में हीं चन्द्रमा सोलह कलाओं से युक्त हो कर पृथ्वी के कक्षा के बेहद निकट आ कर अमृत की वर्षा करते हैं। इसलिए इस दिन किए गए सभी कार्य भी विशेष सिद्धिदायक होते हैं। 

भगवती लक्ष्मी का प्राकट्य समुद्र मंथन से इसी दिन हुआ था।

श्रीमद्भागवत महापुराण के अनुसार इसी रात्रि से एक वर्ष पर्यन्त भगवान् श्री कृष्ण ने वृंदावन के निकुंज वन में महारास किया था।

ऐसी मान्यता है कि इस पूरी रात्रि यदि निद्रा का त्याग कर माता लक्ष्मी की आराधना की जाए तो निःसंदेह व्यक्ति के जीवन में धन की कभी कमी नहीं रहती।

कहते हैं कि भगवती लक्ष्मी इस रात्रि में धरा भूमि पर विचरण करती हैं और कहतीं हैं " को जाग्रत:? "
अर्थात् कौन जाग रहा है। और जो भी व्यक्ति जाग कर माता लक्ष्मी की आराधना करते हैं उन्हें माता के आशीर्वाद से जीवन में सभी प्रकार के भौतिक सुखों, व धन संपदाओं की प्राप्ति होती है।

इस रात्रि का वैदिक और तांत्रिक महत्व होने के कारण यदि इस रात्रि को कुछ विशेष उपायों को करें तो बडे़ से बड़ा रोग, दोष, दुःख और दरिद्रता से आसानी से छुटकारा पाया जा सकता है, तो आइए आज हम आपको बताने जा रहे हैं ऐसे हीं कुछ विशेष उपायों के बारे में जिनको अपनाकर अद्भुत चमत्कारिक लाभ प्राप्त किया जा सकता है:--

➤ शरद् पुर्णिमा के संध्या में प्रदोषकाल में कमल के पुष्पों से माता लक्ष्मी, और कुबेर का पुजन कर श्रीसुक्त, कनकधारा स्तोत्र, दारिद्र्यदहन शिव स्तोत्र और शिव ताण्डव स्तोत्र का पाठ कर श्रीसुक्त द्वारा होम करने से दरिद्रता का समूल नाश होता है, और स्थिर लक्ष्मी की प्राप्ति होती है।

➤  शरद् पुर्णिमा के प्रदोषकाल में कमल के पुष्पों से माता लक्ष्मी, और कुबेर का पुजन कर श्रीसुक्त, कनकधारा स्तोत्र, दारिद्र्यदहन शिव स्तोत्र और शिव ताण्डव स्तोत्र का पाठ कर श्रीसुक्त द्वारा होम करने से दरिद्रता का समूल नाश होता है, और स्थिर लक्ष्मी की प्राप्ति होती है।

➤ कुछ कमलगट्टे को पीले रंग के वस्त्र में बांध कर उसपर पांच केसरयुक्त अष्टगंध तिलक कर धन के स्थान पर रख देने से कुबेर और लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है।
कमलगट्टे के जगह कौड़ी का भी प्रयोग किया जा सकता है।

➤ इस दिन एक या आठ कन्या को खीर का प्रसाद खिला कर यथासंभव दक्षिणा अर्पित करने से माता लक्ष्मी की विशेष कृपा प्राप्त होती है।

➤ पाँच पीपल के पत्ते लेकर उसके ऊपर खीर डालकर रात भर छोड़ दें और प्रातः काल श्रीकृष्ण आरोग्य मंत्र 11 बार उच्चारण कर सूर्योदय से पूर्व सेवन करने से दमा व अन्य वात रोगों में आश्चर्यजनक लाभ मिलता है।

➤ जिन बालकों को जन्म से हीं कोइ नेत्र रोग हो, अथवा किसी भी व्यक्ति को चमक रोग हो तो उस बालक अथवा व्यक्ति को पाँच से सात मिनट तक एकटक चंद्र दर्शन कराएं प्रयास करें की पलक कम से कम झपके उसके बाद पान के पत्ते पर रखी खीर बालक को चटाएं और अगर कोइ युवा हो तो पान के जगह पीपल का पत्ता उपयोग में लें, फिर पाँच से सात मिनट चंद्रमा को एकटक दिखावें उसके बाद अगले दिन सूर्योदय के पश्चात त्रिफला चूर्ण को जल में डालकर कर फुहारों से आँखों को धो लें नेत्र विकार दूर हो जाएगा।

➤ अगर निंद ना आने कि समस्या हो तो पीपल के पत्ते पर खीर रखकर चंद्रमा के समक्ष ठीक मध्य रात्रि तक एक घंटे तक रखें उसके पश्चात उस खीर को उक्त मंत्र से 21 बार अभिमंत्रित करें-
 
नीद्रां भगवतीं विष्‍णो:
अतुल तेजस: प्रभो: नमामि 
का 21 बार जप कर अभिमंत्रित करें और उस खीर का सेवन प्रातः काल सूर्योदय से पूर्व करें और सूर्योदय से पूर्व स्नान कर लें बहुत लाभदायक होगा।

➤ दाद, खाज, खुजली या गाँठ हो तो चन्द्रदेव के सामने छत पर 21 दीपक जलाकर कर उसका काजल इकट्ठा कर लें और प्रतिदिन उस जगह पर लगाकर आधे घंटे बाद स्नान कर लें 5 से 7 दिनों में हीं समस्या दूर हो जाएगी।

➤ जिन लोगों की नेत्र ज्योति कमजोर हो या आंखों में कोई समस्या है वे लोग चंद्रमा की रोशनी में यदि सुई में धागा पिरोए तो 1 माह तक त्राटक क्रिया करने का लाभ एक रात में हीं मिल जाता है और नेत्र पीड़ा में लाभ मिलता है।

शरद पूर्णिमा
19 अगस्त 2021 दिन मंगलवार
पूजन -लक्ष्मी ,कुबेर  देवादि का
शुभ मुहूर्त - संध्या 07.13 से 09.09 बजे रात्रि तक l
सत्यनारायण कथा और पूजन 20 अक्टूबर 20 21 को संपन्न होना विधान सम्मत है l