केन्द्र सरकार सोशल मीडिया, डिजिटल कटेंट पर हुई सख्त, जानें क्या हैं गाइडलाइंस

Digitalmedia

नई दिल्लीः नरेंद्र मोदी सरकार (Narendra Modi Government) ने गुरुवार को फेसबुक (Facebook) और ट्विटर (Twitter) जैसे सोशल मीडिया प्लेटफार्मों (Social Media Platforms) पर अधिक से अधिक निगरानी रखने की अपनी योजना का खुलासा किया और डिजिटल मीडिया (Digital Media) और स्ट्रीमिंग प्लेटफार्मों (Streaming Platform) को एक सख्त नियामक में लाया जाएगा। केंद्र सरकार देश में डिजिटल कॉन्टेंट (Digital Content) को नियमित करने वाले कानून ला रही है और ये कानून अगले तीन महीने में लागू करेगी। केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद (Ravi Shankar Prasad) ने गुरुवार को इसकी घोषणा की। प्रसाद और प्रकाश जावड़ेकर (Prakash Javdekar) ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस (Press Conference) में कहा कि सोशल मीडिया (Social Media) कंपनियों के लिए भी एक नियम और कायदे होने चाहिए। 

नए नियमों के तहत बड़ी सोशल मीडिया कंपनियों को एक उपयुक्त सरकारी एजेंसी द्वारा अदालत के आदेश या नोटिस पर काम किए जाने के विशिष्ट समय-सीमा के भीतर गैरकानूनी सामग्री लेने की इजाजत होगी।

रविशंकर प्रसाद प्रसाद ने कहा, “भारत में व्यापार करने के लिए सोशल मीडिया का स्वागत है। उन्हें अच्छा व्यवसाय मिला है। उन्हें अच्छी संख्या में यूजर्स मिले हैं और उन्होंने आम भारतीयों को भी सशक्त बनाया है।’’ आईटी उपयोगकर्ताओं के मंत्री रविशंकर प्रसाद ने गुरुवार दोपहर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में सोशल मीडिया के दुरुपयोग के खिलाफ समयबद्ध तरीके से अपनी शिकायतों के समाधान के लिए यूजर्स को उचित मंच दिया जाना चाहिए।

यह उन लोगों को ट्रैक करने के उद्देश्य से है जो भ्रामक समाचार फैलाने या गैरकानूनी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए व्हाट्सएप या दूसरे सोशल मीडिया प्लेटफार्म का उपयोग करते हैं, लेकिन यह भी है कि साइबर विशेषज्ञों को डर है कि कंपनियों को अपने एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन प्रोटोकॉल को तोड़ने और इसके लिए रास्ता प्रशस्त करना होगा। 

ओटीटी और डिजिटल मीडिया
आईटी मध्यस्थ नियमों में नए बदलावों में ’कोड ऑफ एथिक्स एंड प्रोसीजर एंड सेफगार्ड्स इन रिलेशन टू डिजिटल/ऑनलाइन मीडिया’ शामिल हैं। इस कोड के तहत नियम ऑनलाइन समाचार और डिजिटल मीडिया संस्थाओं से लेकर नेटफ्लिक्स और अमेजॅन प्राइम जैसे ओटीटी प्लेटफार्मों तक सभी पर लागू होंगे।

क्या हैं गाइडलाइंस
- सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को निगरानी के लिए अफसरों की तैनाती करनी होगी।

- किसी भी आपत्तिजनक कंटेंट को 24 घंटे में हटाना होगा।

- प्लेटफॉर्म्स को भारत में अपने नोडल ऑफिसर, रेसिडेंट शिकायत अधिकारी की तैनाती करनी होगी।

- हर महीने कितनी शिकायतों पर एक्शन हुआ, इसकी जानकारी देनी होगी।

- अफवाह फैलाने वाला पहला व्यक्ति कौन है, उसकी जानकारी देनी जरूरी है क्योंकि उसके बाद ही लगातार वो सोशल मीडिया पर फैलता रहता है। इसमें भारत की संप्रभुता, सुरक्षा, विदेशी संबंध, रेप जैसे अहम मसलों को शामिल किया जाएगा।

- ये गाइडलाइंस सभी पर लागू होगी चाहे वो कोई पॉलिटिकल पार्टी हो या पार्टी विशेष से जुड़ा कोई भी व्यक्ति हो।

- ओटीटी प्लेटफॉर्म/डिजिटल मीडिया को अपने काम की जानकारी देनी होगी, वो कैसे अपना कंटेंट तैयार करते हैं। इसके बाद सभी को सेल्फ रेगुलेशन को लागू करना होगा। इसके लिए एक बॉडी बनाई जाएगी जिसे सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज या कोई अन्य सम्मानित व्यक्ति हेड करेंगे।

- इलेक्ट्रॉनिक मीडिया की तरह ही डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म को भी अपनी गलती पर माफी प्रसारित करनी होगी।

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