सितंबर माह में अप्रैल-मई जैसी गर्मी, जानें आखिर क्या है कारण...

Summer

नई दिल्लीः सितंबर का महीना आधा बीत चुका है, लेकिन गर्मी है कि पीछा छोड़ने का नाम ही नहीं ले रही है। न तो उमस कम हो रही है और न ही तापमान। बादल आते हैं और बिना बरसे ही चले भी जाते हैं और आने वाले दिनों में भी बारिश के कोई आसार दिखाई नहीं दे रहे। राजधानी में हालात ये हैं कि बिना एयर कंडीशन के गुजारा ही नहीं है। उमस का इतना बुरा हाल है कि घर से निकलो तो पसीने ही पसीने। हालांकि मानसून की विदाई का समय नजदीक आ गया है, लेकिन कहीं से भी राहत मिलती नहीं दिख रही है। जागरण के मुताबिक, मौसम के बारे में भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के महानिदेशक डा. मृत्युंजय महापात्रा विस्तार से बताया। 

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क्या मानसून की विदाई हो गई है?
इस सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि अभी मानसून की विदाई नहीं हो रही है। पंजाब, हरियाणा और राजस्थान में मानसून की गतिविधियां अभी चल रही हैं। दिल्ली में भी तेज बारिश की तो खैर अब कोई संभावना नजर नहीं आ रही, लेकिन हल्की बारिश आगे भी हो सकती है। ऐसे में माह के अंत तक ही सभी संबंधित एजेंसियों से सलाह करके मानसून की विदाई पर कोई निर्णय लिया जाएगा।

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सितंबर माह में अप्रैल-मई जैसी गर्मी?
इस सवाल के जवाब पर डा. मृत्युंजय महापात्रा ने कहा कि जब मानसून की वापसी का समय नजदीक होता है तो मौसम शुष्क होने लगता है। हवा भी पूर्वी या दक्षिणी पूर्वी होने लगती है। इससे गर्मी और तापमान दोनों में इजाफा होता है। सितंबर के उत्तरार्थ एवं अक्टूबर के पूर्वार्ध में गर्मी का एहसास असामान्य नहीं है।

सितंबर माह में इस बार बारिश भी 64 तक कम होने पर उन्होंने बताया कि सितंबर माह में अभी तक केवल 20.9 फीसदी बारिश हुई है। यह इस सामान्य माह की सामान्य बारिश यानि 58.3 मि.मी. के आंकड़े से 64 फीसद कम है। 

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उन्होंने कहा कि स्थानीय कारकों का भी प्रभाव तो पड़ता ही है। फिर वह चाहे दिल्ली का कम होता हरित क्षेत्र हो या यहां का अत्यधिक प्रदूषण। दिल्ली में कंक्रीट का जंगल भी बहुत फैल गया है। इससे धरती में जितना पानी जाना चाहिए उतना नहीं जा पाता। भूजल का स्तर भी बेहतर ढंग से रिचार्ज नहीं हो पाता।

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उन्होंने कहा कि फिलहाल तो मौसम बदलने की कोई उम्मीद नहीं लग रही। अभी पूर्वी हवाएं चल रही हैं। इससे उमस भरी गर्मी बनी रहेगी। मौसम में बदलाव की संभावना अक्टूबर माह के उत्तरार्ध तक ही की जानी चाहिए। इससे पहले नहीं। तब हवा की दिशा उत्तर पश्चिमी या पश्चिमी हो जाएगी। इन हवाओं में ठंडक एवं नमी दोनों होती है। इन्हीं के प्रभाव से तापमान में कमी आनी शुरू होगी।

कब बदलेगा मौसम?
इस पर डा. मृत्युंजय महापात्रा ने कहा कि अभी इस बारे में कुछ भी कह पाना मुश्किल होगा। फिलहाल तो पूरी तरह से मानसून ही खत्म नहीं हुआ है। हवाओं की दिशा बदलने में भी अभी समय है। लिहाजा, सर्दियों के आगमन पर अभी कुछ नहीं कहा जा सकता।

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