जानिए राखी बांधने का शुभ मुहूर्त, भद्रा और राहुकाल क्यों हैं अशुभ

Rakhi

सावन महीने की पूर्णिमा यानी 3 अगस्त सोमवार के दिन रक्षाबंधन का पवित्र त्योहार मनाया जाएगा। रक्षाबंधन भाई और बहन के बीच स्नेह और विश्वास का त्योहार है, जिसमें बहन अपने भाई की कलाई पर राखी बांधती है और उनकी खुशी और दीर्घायु के लिए प्रार्थना करती हैं। बदले में, भाई अपनी बहनों को उपहार देते हैं और जीवन भर उनकी रक्षा करने का वादा करते हैं। राखी हमेशा सही मुहूर्त पर ही बांधनी चाहिए और भद्राकाल में तो बिल्कुल भी नहीं। लेकिन, इस बार रक्षाबंधन पर भद्रा का साया ज्यादा देर के लिए नहीं रहेगा। 3 अगस्त को सुबह 9 बजकर 29 मिनट तक भद्रा रहेगी। भद्राकाल के समाप्त होते ही पूरे दिन राखी बांधी जा सकती है। 

आपको बता दें कि पौराणिक मान्यताओं के अनुसार भद्रा में राखी न बंधवाने के पीछे एक कथा प्रचलित है। जिसके अनुसार लंका के राजा रावण ने अपनी बहन से भद्रा के समय ही राखी बंधवाई थी। भद्राकाल में राखी बाधने के कारण ही रावण का सर्वनाश हुआ था। इसी मान्यता के आधार पर जब भी भद्रा लगी रहती है उस समय बहनें अपने भाइयों की कलाई में राखी नहीं बांधती है। इसके अलावा भद्राकाल में भगवान शिव तांडव नृत्य करते हैं इस कारण से भी भद्रा में शुभ कार्य नहीं किया जाता है।

दूसरी तरफ, एक और मान्यता के अनुसार भद्रा शनिदेव की बहन है। भद्रा शनिदेव की तरह उग्र स्वभाव की हैं। भद्रा को ब्रह्माजी ने शाप दिया कि जो भी भद्राकाल में किसी भी तरह का कोई भी शुभ कार्य करेगा उसमें उसे सफलता नहीं मिलेगी। भद्रा के अलावा राहुकाल में भी किसी तरह का शुभ कार्य करना वर्जित माना गया है। शास्त्रों में रक्षाबंधन का त्योहार भद्रा रहित समय में करने का विधान है। इस कारण से इस बार 3 अगस्त को भद्रा का विशेष ध्यान रखें और भद्रा की समाप्ति के बाद ही राखी बांधे। भद्रारहित काल में भाई की कलाई में राखी बांधने से भाई को कार्य सिद्धि और विजय प्राप्त होती है।

भद्राकाल का समय
विद्वानों के अनुसार 3 अगस्त को सोमवार और सोम का ही नक्षत्र होने से रक्षाबंधन का मुहूर्त बहुत ही शुभ होगा। सुबह 7 बजकर 18 मिनट पर सूर्य का नक्षत्र उत्तराषाढ़ा समाप्त हो रहा है और चन्द्र के नक्षत्र श्रवण आरम्भ होगा। इस बार रक्षाबंधन के दिन भद्राकाल ज्यादा देर के लिए नहीं रहेगा। 3 अगस्त को सुबह 9 बजकर 29 मिनट तक ही भद्रा रहेगी उसके बाद भद्रा खत्म हो जाएगी।। भद्रा की समाप्ति के बाद पूरे दिन राखी बांधी जा सकती है।

राहुकाल का समय
राहुकाल में भी किसी तरह का शुभ कार्य नहीं किया जाता है। इसलिए भद्रा के साथ राहुकाल का विशेष ध्यान रखना चाहिए। 3 अगस्त को रक्षाबंधन के दिन राहुकाल का समय सुबह 7 बजकर 30 मिनट से 9 बजे तक रहेगा।