सपा के पूर्व नेता अमर सिंह का सिंगापुर के अस्पताल में निधन, कई दिनों से चल रहा था इलाज

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नई दिल्लीः राज्यसभा सांसद अमर सिंह का शनिवार को 64 वर्ष की आयु में निधन हो गया। अभी कई महीनों से सिंगापुर के एक अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था। कुछ दिनों पहले ही उनका किडनी ट्रांसप्लांट किया गया था। शनिवार दोपहर उनका निधन हो गया। वे 64 वर्ष के थे। इससे पहले मार्च 2020 में जब अमर सिंह की मौत के बारे में अफवाहें सामने आई थीं, तो समाजवादी पार्टी के पूर्व नेता ने कहा था। ‘टाइगर जिंदा है’। कई नेताओं ने उनके निधन पर शोक जताया है।

जानकारी के अनुसार, अमर सिंह ने हाल ही में एक दूसरे गुर्दे का प्रत्यारोपण किया गया था। प्रत्यारोपण सफल भी रहा था और वह ठीक हो रहे थे। हालांकि, उनके पेट में एक घाव था जो ठीक नहीं हो पाया था और संक्रमण फैल गया था। यह संक्रमण ने उनकी मुश्किलें बढ़ा दी थी। डॉक्टरों ने उन्हें ठीक करने की पूरी कोशिश की लेकिन असफल रहे। आज दोपहर उनका देहांत हो गया।

रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने ट्वीट कर संवेदना व्यक्त की और कहा, ‘‘वरिष्ठ नेता एवं सांसद श्री अमर सिंह के निधन के समाचार से दुःख की अनुभूति हुई है। सार्वजनिक जीवन के दौरान उनकी सभी दलों में मित्रता थी। स्वभाव से विनोदी और हमेशा ऊर्जावान रहने वाले अमर सिंहजी को ईश्वर अपने श्रीचरणों में स्थान दें। उनके शोकाकुल परिवार के प्रति मेरी संवेदनाएँ।’’

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उत्तरप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी के संस्थापक मुलायम सिंह यादव के बहुत करीबी माने जाने वाले अमर सिंह समाजवादी पार्टी के संस्थापक माने जाते थे। जब से पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव बनाये गए थे, तब से अमर सिंह और मुलायम सिंह में दरार पैदा हो गई थी। 2016 में अमर सिंह सपा से राज्यसभा सांसद बनाये गए थे। इसके बाद जब अखिलेश यादव अध्यक्ष बने तब उन्हें पार्टी में दरकिनार कर दिया गया था।

पार्टी को नई ऊंचाई पर ले गये
समाजवादी पार्टी में आने के बाद अमर सिंह नई ऊंचाइयां हासिल करते गए। 1996 में वह पहली बार राज्यसभा में भेजे गए। 2002 में पार्टी ने उन्हें फिर राज्यसभा में भेजा। इसके साथ ही उन्हें पार्टी महासचिव बनाया गया। उन्होंने एक क्षेत्रीय पार्टी को पूरे देश में स्थापित किया। फिल्मी सितारों से लेकर कॉरपोरेट जगत को पार्टी से जोड़ने में अमर सिंह का बड़ा हाथ रहा।

2003 से 2007 के बीच जब मुलायम यूपी के सीएम थे, अमर सिंह ने यूपी में उद्योगपतियों और बॉलिवुड के सितारों को कई बार बुलाया। जया बच्चन से लेकर जया प्रदा और संजय दत्त तक को सपा में लाने का श्रेय उन्हें ही दिया जाता है। एक समय ऐसा आ गया जब अमर सिंह के बिना समाजवादी पार्टी में कोई फैसला नहीं लिया जाता था। पार्टी के सारे कद्दावर नेताओं को किनारे कर दिया गया। ऐसे में आजम खान और बेनी प्रसाद बर्मा जैसे नेताओं ने पार्टी छोड़ दी थी।

2007 के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी की हार के लिए अमर सिंह को जिम्मेदार ठहराया जाने लगा। 2009 के लोकसभा चुनाव तक रिश्ते और तल्ख हो गए। पार्टी में अमर सिंह का विरोध तेज हो गया। आरोप लगा कि उनकी सरपरस्ती में सपा शहरी हुई न गांव की हो पाई। हालात ऐसे बन गए कि 2010 में अमर सिंह ने सपा के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया। 

बड़ी उपलब्धि
2008 में अमेरिका से न्यूक्लियर डील से नाराज वामपंथी पार्टियों ने सरकार से समर्थन वापस ले लिया था। सरकार गिरने के कगार पर आ गई थी। कांग्रेस पार्टी ने अमर सिंह से संपर्क साधा। अमर सिंह ने मुलायम सिंह को समर्थन केे लिए राजी किया। कहा तो यह भी जाता है कि मुलायम सिंह पहले इसके लिए तैयार नहीं थे, लेकिन अमर सिंह ने उन्हें मनाने में महत्त्वपूर्ण भूमिका अदा की।

ग्लैमर से लगाव 
दिवंगत नेता को ग्लैमर से बहुत लगाव था। फिल्म इंडस्ट्री के लोग भी उनके साथ सहज महसूस करते थे। कहीं किसी को यूपी में शूटिंग में दिक्कत हो रही हो, कहीं किसी को प्रशासन से मदद न मिल रही हो, हमेशा अमर सिंह को याद किया जाता था। समाजवादी पार्टी के प्रचार के लिए वह कई सितारों को मैदान में उतार देते थे। 

अमिताभ बच्चन को लेकर एक बार अमर सिंह शाहरुख खान से भिड़ गए थे। अमिताभ के जन्मदिन पर अमर सिंह ने एक बार पार्टी दी थी और उसमें अमिताभ के साथ काम कर चुकी हर अभिनेत्री को बुलाया था। यह पार्टी चर्चा की विषय बनी थी। बोनी कपूर-श्रीदेवी से लेकर, शिल्पा शेट्टी, इम्तियाज अली से लेकर मुजफ्फर अली से उनकी पटती थी। उन्होंने उत्तर प्रदेश में फिल्म विकास परिषद की स्थापना कराई थी और कई सितारों को जोड़ा था। 2016 में जया प्रदा को उन्होंने इसका उपाध्यक्ष नामित करा दिया था।