मनरेगा से बड़ेबेंदरी के दिव्यांग श्याम सुंदर को मिली जीने की नई राह, डबरी निर्माण कर मछली एवं बत्तख पालन से बढ़ रही आय

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कोण्डागांव: जिला मुख्यालय से 17-18 किमी दूर ग्राम पंचायत बडेबेंदरी मे निवासरत दिव्यांगजन श्याम सुंदर कोर्राम पिता स्वर्गीय भगत राम कोर्राम जो बांये पैर से दिव्यांग है। वर्षों से वह अपनी पुश्तैनी भूमि पर मौसमी खेती करते आ रहे थे साथ ही उनके परिवार के लिए खेती से पर्याप्त आय न होने के कारण कृषि श्रमिक के रूप में अन्य लोगों के खेतों में भी कार्य किया करते थे। मनरेगा योजना के आने के बाद उन्होंने जॉबकार्ड बनाकर मनरेगा अंतर्गत कार्य प्रारंभ किया। मनरेगा से उन्हें अपने परिवार के भरण-पोषण के लिए वर्षभर अतिरिक्त आमदनी प्राप्त होती रही। इस दौरान उन्होंने अपनी आय में वृद्धि के लिए अन्य विकल्पों पर विचार प्रारंभ किया। जिसमें उन्होंने अपने ग्राम के तकनीकी सहायक वीरेन्द्र साहू से सम्पर्क कर आय वृद्धि के स्त्रोतों के संबंध में चर्चा की। जिसमें तकनीकी सहायक द्वारा श्याम सुंदर की बंजर भूमि के उन्नयन के लिए निजी डबरी निर्माण का सुझाव दिया। जिसपर तकनीकी सहायक के मार्गदर्शन में तकनीकी प्राकल्लन कर निजी डबरी निर्माण हेतु प्रशासकीय स्वीकृति कलेक्टर पुष्पेन्द्र कुमार मीणा एवं जिला कार्यक्रम समन्वयक से अनुमोदन मिलने के उपरांत सीईओ जिला पंचायत डीएन कश्यप द्वारा दी गई।

इसके तहत् 2.78 लाख रूपये की राशि से मनरेगा के मद से श्याम सुंदर के खेत में डबरी का निर्माण किया जाना था। जिसमें ”निजी डबरी निर्माण कार्य श्यामसुंदर“ का निर्माण 1.92 लाख में हीं पूर्ण हो गया। जिसके निर्माण में कुल 1041 मानव दिवस सृजित हुये। इन सृजित मानव दिवसों में से 150 मानव दिवस का रोजगार श्याम सुंदर कोर्राम के परिवारजनों को भी प्राप्त हुआ। जिसके द्वारा उनके परिवार को कुल 26400 रूपये का लाभ प्राप्त हुआ। डबरी निर्माण से ग्राम पंचायत के अन्य जॉबकार्डधारी परिवारों को भी 891 मानव दिवसों का रोजगार प्राप्त हुआ।

श्याम सुंदर के लिए डबरी निर्माण एक वरदान शाबित हुआ। इससे उन्हें सिंचाई हेतु जल के साथ मत्स्य, बत्तख पालन के रूप में आय के नये साधन भी प्राप्त हुए। एक एकड़ की बंजर भूमि में निर्मित डबरी से उनकी बंजर भूमि से भी उन्हें अब लाभ प्राप्त हो रहा है। वर्तमान में उन्हें मत्स्य विभाग द्वारा मछलियों के 07 किलो बीज प्राप्त हुए हैं। जिनसे उनके डबरी में मत्स्य पालन से 15 से 20 हजार रूपये के मत्स्य उत्पादन की संभावना है साथ ही अब उन्होंने बत्तख पालन का कार्य भी प्रारंभ किया है। जिसके लिए उन्होंने 08 बत्तख भी पाले हैं। इसके अतिरिक्त अब वे पारम्परिक धान उत्पादन के अलावा बैगन, मेथी, लौकी, करेला, टमाटर आदि साग-सब्जियों के उत्पादन से भी जुड़ गये हैं। जिनसे उन्हें अतिरिक्त आर्थिक लाभ प्राप्त हो रहा है।

ज्ञात हो कि वित्तीय वर्ष 2020-21 में 31 मार्च 2021 तक श्याम सुंदर द्वारा स्वयं 53 मानव दिवसों में कार्य कर 10070 रूपये का लाभ प्राप्त किया साथ ही पूरे परिवार नें 94 मानव दिवस प्राप्त कर कुल 17860 रू का आर्थिक लाभ किया है। इस दौरान दिव्यांग होने के बावजूद उन्होंने ग्राम पंचायत एवं ग्रामीण यांत्रिकी विकास विभाग द्वारा ग्राम विकास हेतु निर्माण किये जा रहे चबूतरे निर्माण, डबरी निर्माण एवं अन्य निर्माणों में भी अपनी सक्रिय सहभागिता दी।

उल्लेखनीय है कि महात्मा गांधी नेशनल रूरल एम्प्लॉयमेंट गारंटी योजना (मनरेगा) पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की एक अतिमहत्वपूर्ण योजना है। जिसके द्वारा जिला अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्रों में जॉबकार्डधारी परिवारो को रोजगार प्रदाय करनें के साथ-साथ ग्रामीण विकास के लिए सतत प्रयास किया जाता है। इसी क्रम में मनरेगा ने दिव्यांग श्याम सुंदर कोर्राम के जीवन में भी बदलाव लाये। दिव्यांग होने के बावजूद उनके दृढ़निश्चय को अंजाम तक पहुंचाने के लिए मनरेगा उनका साथी बना। आज श्याम सुंदर को देख परिवार एवं ग्रामीणजन गर्व महसूस करते हैं। आज भी श्याम सुंदर आगे बढ़ने का निरंतर प्रयास कर रहे हैं साथ ही वे अपने ग्रामीण बंधुओं को भी आगे बढ़ने एवं शासकीय योजनाओं का लाभ लेने के लिए प्रेरित करते हैं।

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