गांव और ग्रामीणों के आर्थिक प्रगति का चक्र बन रही 'गोधन न्याय योजना'

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कोरिया: छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले के खड़गवां जनपद पंचायत के गांव सकरिया के रहने वाले जयंत राम ने गोधन न्याय योजना का लाभ लेते हुए नई भैंस खरीद ली तो वहीं इसी जनपद पंचायत के गांव पेंड्री के किसान सुखराज प्राप्त राशि से दो बकरियां खरीद पाने में सक्षम हुए। विकासखण्ड सोनहत के ग्राम पंचायत केशगवां की रहने वाली इन्द्रकुंवर ने गोधन न्याय योजना के तहत प्राप्त राशि से वेट मशीन खरीदी, जिसे वह काफी समय से खरीदना चाह रही थी। ये जरूरतें अक्सर घर की बड़ी जरूरतों की सूची में नीचे चली जाती थी क्योंकि महीने के घर खर्च हिसाब में इनके लिए रुपये नहीं बचते थे। पर अब गोधन न्याय योजना से हर 15 दिन में राशि मिल जाती है जिससे घर का खर्च भी व्यवस्थित है और ये जरूरतें भी पूरी हो रही हैं।

ऐसी कई असल कहानियां हैं जो गोधन न्याय योजना की धरातल पर सफलता का प्रमाण हैं। ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की मंशा के अनुरूप संचालित इस योजना ने कोरिया जिले में केवल पशुपालकों को ही नहीं, स्वसहायता समूहों को भी आर्थिक प्रगति का रास्ता दिखाया है। इस योजना का चक्र ही आज गांव और ग्रामीणों के आर्थिक विकास का चक्र बन रहा है।

राज्य शासन की महत्वाकांक्षी सुराजी योजना अंतर्गत नरवा, गरवा घुरवा और बाड़ी योजना से गांवों की तस्वीर बदलने लगी है। गोधन न्याय योजना का इससे जुड़ने से ग्रामीणों की आय में वृद्धि हुई। गोधन न्याय योजना के तहत अब तक आठ भुगतान किये जा चुके हैं। अंतिम भुगतान 1 नवंबर से 15 नवंबर तक के लिए जिले में 53 लाख रूपये से भी अधिक की राशि का भुगतान किया गया है। कोरिया जिले के 138 सक्रिय गौठानों में अब तक 8528 विक्रेताओं से गोबर खरीदी की गई है और इसके एवज में जिले में 2 करोड़ से भी अधिक तक की राशि का भुगतान पशुपालकों व किसानों को किया गया है।

वर्मी कम्पोस्ट निर्माण से स्वसहायता समूहों को 1.5 लाख रूपये से अधिक तक का लाभ
गोधन न्याय योजना के तहत स्वसहायता समूहों की महिलाएं वर्मी खाद का निर्माण व विक्रय कर लाभ कमा रही है। कोरिया जिले में दूसरी खेप में अब 09 गौठानों द्वारा 206.5 क्विंटल वर्मी कम्पोस्ट खाद बनाया गया है जिसे उद्यानिकी विभाग को आपूर्ति की जायेगी। जिसके एवज में समूहों को कुल 1 लाख 65 हजार तक की आमदनी प्राप्त होगी। बता दें कि गोधन न्याय योजना क्रियान्वयन के प्रथम चरण में विकासखंड सोनहत के संकुल कटगोड़ी अंतर्गत गौठान ग्राम घुघरा, पोंडी, सलगंवाकला के गौठानों से स्वसहायता समूहों द्वारा उत्पादित कुल 11 टन वर्मी खाद वन विभाग को विक्रय किया गया, वर्मी खाद निर्माण के प्रथम भुगतान के रूप में स्व सहायता समूह क्रांति महिला संकुल स्तरीय संगठन की महिलाओं श्रीमती पुष्पा देवी एवं श्रीमती यशोदा साहू को कलेक्टर श्री एसएन राठौर एवं सीईओ जिला पंचायत तूलिका प्रजापति के द्वारा कुल 93 हजार 500 रू. की राशि का चेक प्रदान किया गया।

गोबर बेचकर रामनाथ ने कमाया 27 हजार रूपए
छत्तीसगढ़ शासन की महत्वाकांक्षी ‘गोधन न्याय योजना’ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने में मददगार साबित हो रही है। गोबर बेचने से मिले रूपये को कोई अपनी खेती-किसानी में लगा रहा है, तो कोई उससे पशुधन खरीद कर दुग्ध व्यवसाय को मजबूती प्रदान करने में लगा हुआ है। 

इसी कड़ी में कांकेर जिले के चारामा विकासखण्ड के ग्राम आंवरी के भूमिहीन किसान रामनाथ ठेठवार ने भी गोबर बेचने से मिले 27 हजार रूपये से दो उन्नत नस्ल की गाय व बछिया खरीदी है, जिससे वे अपने दुग्ध व्यवसाय को बढ़ायेंगे। श्री रामनाथ ने बताया कि उनके पास देशी नस्ल की गाय थी, जिसे कृत्रिम गर्भधान कराया गया और उससे उन्नत नस्ल की बछिया पैदा हुई जो अब गाय बनकर दूध दे रही है। जिससे उन्होंने अपना दुग्ध व्यवसाय शुरू किया जो उनके परिवार के जीवन-यापन का एकमात्र साधन है। 

पशुपालक रामनाथ ठेठवार को दूध के विक्रय से प्रतिमाह लगभग 4 से 5 हजार रूपये की शुद्ध आमदनी हो जाती है। उन्होंने बताया कि उनके पास वर्तमान में उन्नत नस्ल के 19 पशुधन है, जिसके गोबर को आंवरी के गौठान में बेचने से 27 हजार रूपये की आय हुई। इन्हीं पैसों से उन्होंने ‘साहीवाल नस्ल’ की एक गाय और बछिया खरीदी। गौरतलब है कि कांकेर जिले में 4 हजार 497 पशुपालकों के द्वारा गोबर बेचकर एक करोड़ 30 लाख 66 हजार रूपए की आमदनी हुई है, जिसका उपयोग वे अपने जीवन स्तर को संवारने और बेहतर करने में लगा रहे हैं।

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