भ्रष्टाचारी विरासत की गाड़ी को आगे ले जा रहे कुलपतिः NSUI

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रायपुरः कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता विश्वविद्यालय में हो रहे भ्रष्टाचार के बारे में एनएसयूआई प्रदेश सचिव  हनी बग्गा ने कुलपति पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा, ‘‘कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता विश्वविद्यालय अपने अकादमिक कार्यों को छोड़कर हमेशा से ही गलत नियुक्तियां और भ्रष्टाचार को लेकर जागरूक रहा है। यह जागरूकता विश्वविद्यालय को अपनी विरासत में मिली है। पिछले कुलपतियों ने यहां जमकर भ्रष्टाचार किया है।’’ 

प्रदेश सचिव ने आरोप लगाते हुए कहा, ‘‘विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रोफेसर मानसिंह परमार द्वारा रूसा से आवंटित राशि से लगभग 6 करोड़ रुपये की खरीदी करने के लिए समिति गठित की गई थी। जिसमें सदस्य के रूप में कुलसचिव डॉ. अतुल तिवारी, सहायक प्रोफेसर नृपेन्द्र शर्मा, सहायक प्रोफेसर आशुतोष मंडावी विशेष आमंत्रित सदस्य सेवानिवृत वित्त अधिकारी के.के. सिन्हा एवं अन्य सदस्य सेवानिवृत वित्त अधिकारी पी.सी. डहरजी को किसी शामिल किया गया था।

उन्होंने कहा, ‘‘नियमतः सेवानिवृत अधिकारी या कर्मचारी वित्त संबंधी समिति के सदस्य नहीं हो सकते न ही इनमें से कोई भी सदस्य जिन उपकरणों का खरीदी करना है उनके विषय में कोई जानकारी नहीं रखते। इन सदस्यों के अनुसंशा को आधार मानकर वर्तमान कुलसचिव डॉ. आनंद शंकर बहादुर ने रूसा के प्रभारी डॉ. नरेन्द्र त्रिपाठी, क्रय समिति के सदस्य डॉ. नृपेन्द्र शर्मा एवं सेवानिवृत वित्त अधिकारी से पुनः अनुशंसा कराकर पुराने उपकरणों को अनुपयोगी बताकर लगभग 6 करोड़ रुपये की खरीदी करने को आतुर हैं। 

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हनी बग्गा ने कहा, ‘‘उक्त खरीदी को संवैधानिक जामा पहनाने के लिए कुलपति महोदय ने 4 जुलाई को विश्वविद्यालय के कार्यपरिषद के सदस्यों की बैठक रखी है। उल्लेखनीय है कि पत्रकारिता विश्वविद्यालय के कार्यपरिषद के सदस्य सत्ता पक्ष के विधायक कुलदीप सिंह जुनेजा, धनेन्द्र साहू एवं अनीता शर्मा भी बैठक में शामिल हो सकते हैं। 

उन्होंने आगे कहा, ‘‘ज्ञात हो कि विश्वविद्यालय में टीवी और रेडियो स्टूडियों का निर्माण में भी भ्रष्टाचार किया गया हैं, जिसमें छात्रों को न किसी प्रकार का प्रशिक्षण दिया जाता हैं और न ही कोई उच्च स्तरीय कार्यक्रम ही हुआ हैं। ऐसे में कोरोना जैसी विश्वव्यापी महामारी के बहाने करोड़ों रुपये की खरीद, जिसकी वर्तमान में कोई आवश्यकता दिखाई नहीं पड़ रही है, की गई। 

प्रदेश सचिव ने कहा, ‘‘इससे पहले विश्वविद्यालय में लगभग 7 करोड़ रूपये सिर्फ रंगाई-पुताई और टाईल्स बदलने के लिए इस्तेमाल हुए। वर्तमान कुलपति विश्वविद्यालय में हो रहे भ्रष्टाचार को लगातार बढ़ावा दे रहें हैं। भ्रष्टाचार के विषय पर पूछने पर वह पूर्व में हुई स्वीकृति का हवाला देकर बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार कर रहे हैं। ऐसे में सत्ता पक्ष के प्रतिनिधियों एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं को विश्वविद्यालय को बचाने के लिए जल्द-से जल्द कदम उठाने होंगे।

Comments   

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