Chhath Puja 2020: जानें! खरना विधि, पूजा विधान, पूजा का समय, सूर्यास्त समय और शुभ मुहूर्त

Chhath Puja

नई दिल्लीः छठ पूजा 4 दिनों तक चलने वाला त्योहार है। यह त्योहार हर साल देशभर में बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है, खासकर उत्तर प्रदेश और बिहार-झारखंड में। इस बार छठ का त्योहार 18 नवंबर को नहाय खाय के साथ शुरू हुआ। गुरूवार को ‘खरना’ के साथ निर्जला व्रत शुरू हो जाएगा। खरना का अर्थ है शुद्धि। इस दिन, परिवार का व्रत रखने वाला व्यक्ति पूरे दिन उपवास रखता है और शरीर और मन को शुद्ध करने की कोशिश करता है। इस दिन, भक्त स्पष्ट मन से अपने कुलदेवता और छठ मइया की पूजा करते हैं और उन्हें गुड़ से बनी खीर अर्पित करते हैं।

हिंदु पंचांग के अनुसार यह कार्तिक मास की पंचमी को मनाया जाता है। गोधूली बेला में खीर और फलों का प्रसाद बनाकर व्रतियां अर्घ्य देंगी। वीरवार से खरना का प्रसाद ग्रहण करने के साथ 36 घंटे का कठिन निर्जला उपवास शुरू हो जाएगा। इसके बाद शुक्रवार को अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा।

पूजा विधि
-खरना के दिन से महिलाओं का 36 घंटे का लंबा उपवास शुरू होता है।
- उगते सूर्य को अर्घ्य देने के बाद यह व्रत समाप्त होता है।
- इस दिन व्रत रखने वाली महिलाएं शाम को स्नान करती हैं और रस्मों के अनुसार रोटी और गुड़ का हलवा का प्रसाद तैयार करती हैं।
-पूजा के प्रसाद में खीर, मूली, केला भी रखा जाता है।
- इस दिन, आमतौर पर मिट्टी के चूल्हे पर आम की लकड़ी जलाकर प्रसाद तैयार किया जाता है।
- व्रत रखने वाली महिलाएं भगवान सूर्य की पूजा करने के बाद प्रसाद ग्रहण करती हैं।
-प्रसाद में रसियाव, खीर, पूरियां, और फल होते हैं, जो पूजा के बाद केले के पत्ते पर सभी को वितरित किया जाता है।

पूजा का समयः
खरना पूजा मुहूर्त- 19 नवंबर शाम 5 बजकर 22 मिनट से शाम 7 बजकर 26 मिनट तक
खरना छठ पूजा पर सूर्योदय - प्रातः 5 बजकर 48 मिनट पर
खरना छठ पूजा पर सूर्यास्त - सायं 5 बजकर 47 मिनट पर

खरना पर, लोग, विशेष रूप से बिहार के लोग गुड़ की खीर, कद्दू-भात, और ठेकुआ-गुझिया जैसे व्यंजन बनाते हैं। 8-12 घंटे का उपवास पूरा करने के बाद, वे अपने परिवार के साथ इन व्यंजनों का लुत्फ लेते हैं। इस खुशी के मौके पर लोग नए कपड़े पहनते हैं और अपने दोस्तों और परिवार के साथ जश्न मनाते हैं।

छठ पूजा खरना कथा
ऐसा माना जाता है कि छठ मैया, जिनकी पूजा छठ के दौरान की जाती है, सूर्य देव की बहन हैं। यही कारण है कि लोग सूर्य को जल अर्पित कर छठी मैया को प्रसन्न करते हैं। वहीं, मां दुर्गा के छठे स्वरूप कात्यायनी देवी को भी छठ माता का रूप माना जाता है और उनकी पूजा की जाती है।

मिट्टी के चूल्हे पर आम की लकड़ी से बनेगी स्वादिष्ट खीर
छठ व्रत के दूसरे दिन यानी गुरुवार को खरना में शाम को मिट्टी के चूल्हे पर आम की लकड़ी से गन्ने की रस या गुड़ के साथ अरवा चावल मिलाकर खीर बनाई जाएगी। खीर के साथ घी चुपड़ी रोटी और कटे हुए फलों का प्रसाद भगवान सूर्य को अर्पित किया जाएगा। दूध और गंगा जल से प्रसाद में अर्घ्य देने के बाद व्रतियां इसे ग्रहण करेंगी। खरना के बाद 21 नवंबर की सुबह अर्घ्य देने के बाद ही व्रत करने वाले जल और अन्न ग्रहण करेंगे।

 

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