Corona Pandemic: नीतीश कुमार स्वास्थ्य सचिव की कार्यशैली से नाराज, हटाने के दिए संकेत

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पटनाः बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शनिवार को कैबिनेट बैठक के अलावा बाढ़ और कोरोना की समीक्षा बैठक की। लेकिन, कैबिनेट बैठक के दौरान नीतीश कुमार स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव उदय सिंह कुमावत के काम करने के तरीके से नाराज हो गए और उन्हें हटाने तक की चेतावनी दे डाली। दरअसल, हुआ ये कि बिहार के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडे ने बिहार सरकार के प्रधान सचिव, उदय सिंह कुमावत की शिकायत दर्ज की, वह भी कैबिनेट बैठक के दौरान बिहार के सीएम नीतीश कुमार और सभी कैबिनेट मंत्रियों की मौजूदगी में।

मीटिंग के दौरान नीतीश कुमार के बगल में बैठे मंगल पांडे ने खुले तौर पर उदय सिंह कुमावत को निशाने पर लिया और कहा, ‘‘अधिकारी उनकी बात नहीं सुनते हैं और केवल वही करते हैं जो वह चाहते हैं।’’

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दरअसल इस कैबिनेट बैठक के दौरान राज्य के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने टेस्टिंग क्यों कम हो रही हैं उस पर सफाई देते हुए कहा कि प्रधान सचिव उदय सिंह कुमावत उनकी बात नहीं सुनते। पांडेय ने ये भी कहा कि लोगों को टेस्टिंग कराने में काफी कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है। डॉक्टर भी नदारद रहते हैं।

इस पर उदय सिंह कुमावत ने एक वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए कहा, ‘मुझे भी कुछ कहना है।’ कुमावत ने आईसीएमआर के दिशानिर्देश की चर्चा शुरू कर दी, जिस पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जो हर दिन पूरे देश में टेस्टिंग और राज्य के स्वास्थ्य सेवाओं की बुरी हालत के कारण आलोचना झेल रहे हैं, उन्होंने कहा कि अगर आपसे काम नहीं होता तो राज्य के मुख्य सचिव से कह कर आपके खिलाफ कारवाई शुरू करने का आदेश दे देते हैं। उन्होंने राज्य में फिर से टेस्टिंग बीस हजार तक करने के अलावा सभी इच्छुक लोगों का टेस्टिंग करने का भी आदेश दिया।

हालांकि, नीतीश कुमार के रूख से लगा कि उन्हें स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय और उपमुख्य मंत्री सुशील मोदी के दबाव में मई महीने में पूर्व प्रधान सचिव संजय कुमार के तबादला पर अपनी गलती का एहसास हो गया। खासकर कुमावत और मंगल पांडेय के रिश्ते सामान्य ना रहने के कारण विभाग का कामकाज पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है, ये बात जगजाहिर हो चुकी है। 

वहीं जानकार लोगों का कहना हैं कि संजय कुमार को हटाने का फैसला मंगल पांडेय का था, इसलिए खामियाजा भी वहीं भुगत रहे हैं। हालांकि उनके समर्थक मानते हैं कि उन्हें इस बात का बिल्कुल भी अंदाजा नहीं था कि कुमावत उनकी बात नहीं सुनेंगे।

खैर, बिहार में जैसे-जैसे कोरोना संक्रमण फैल रहा है अब राज्य सरकार के लिए चुनौती ना केवल सबका टेस्ट कराने की है बल्कि इस वायरस को फैलने से रोकने की भी है। हालांकि शनिवार को बिहार कैबिनेट ने ये फैसला किया हैं कि अब कोई भी डॉक्टर या स्वास्थ्यकर्मी की ड्यूटी के दौरान मौत होती है तो उसके परिवार को नौकरी या उसके रिटायरमेंट तक पूरा वेतन दिया जाएगा।