200 आतंकियों से अकेले भिड़ने वाले, शौर्य चक्र विजेता बलविंदर सिंह की गोली मारकर हत्या

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चड़ीगढ़ः शौर्य चक्र विजेता बलविंदर सिंह की पंजाब के तरनतारन में शुक्रवार को गोली मारकर हत्या कर दी गई। पंजाब के तरनतारन में 2 मोटरसाइकिल सवार लोगों ने शुक्रवार सुबह तरनतारन से 25 किमी दूर भिखीविंड में 65 वर्षीय वाम नेता बलविंदर सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी। बलविंदर सिंह को 90 के दशक में पंजाब में आतंकवाद के खिलाफ लड़ने के लिए शौर्य चक्र से सम्मानित किया गया था। आतंकवाद से ग्रस्त तरनतारन के कस्बा भिखीविंड में बलविंदर सिंह ने खालिस्तान कमांडो फोर्स के आतंकी परमजीत सिंह पंजवड़ को कड़ी चुनौती दी थी। बलविंदर सिंह ने सन् 1980 से लेकर 1993 तक आतंकवादियों से लड़ाई लड़ी थी।

पुलिस ने कहा कि बलविंदर, एक क्रांतिकारी मार्क्सवादी पार्टी ऑफ इंडिया (आरएमपीआई) के जिला कमेटी सदस्य, जो आतंकवादी संगठनों की हिट लिस्ट में थे। सुबह 7 बजे के आसपास वह अपने घर पर थे, जब 2 लोग आए ओर उन पर ताबड़तोड़ 6 गोलियां मारकर उनकी हत्या कर दी।

बलविंदर सिंह की पत्नी ने बताया कि उनका परिवार भिखीविंड में एवरग्रीन सीनियर सेकेंडरी स्कूल चलाता हैै। दिनचर्या के अनुसार, मेरे पति पहली मंजिल से बाहरी गेट खोलने के लिए नीचे उतरे। हमने महसूस किया कि 5-7 मिनट के बाद ही गोलीबारी हुई और उन्हें गेट के पास स्थित कार्यालय में खून से लथपथ हालत में बलविंदर पड़ा हुआ मिला।

1990 में 200 आतंकियों से अकेले लिया था लोहा 
सितंबर 1990 में पंजवड़ ने 200 आतंकवादियों के साथ बलविंदर सिंह के घर में हमला किया था। इसमें रॉकेट लांचर का भी इस्तेमाल किया गया था। बलविंदर के घर में पक्के बंकर बने थे। आतंकवादियों ने बलविंदर के घर को चारों तरफ से घेर लिया था, उनके घर की तरफ जाने वाले सभी रास्ते भी बंद कर दिए गए थे ताकि पुलिस व अर्धसैनिक बल मदद को न पहुंच सके। 

पांच घंटे की इस मुठभेड़ में पंजवड़ भाग खड़ा हुआ था और उसके कई गुर्गे मारे गए थे। परिवार के सभी सदस्यों ने स्टेनगन आदि हथियारों से आतंकवादियों का बहादुरी से मुकाबला किया था। इसके बाद बलविंदर सिंह का नाम राष्ट्रीय पटल पर आ गया था। इसके बाद 1993 में गृह मंत्रालय की सिफारिश पर तत्कालीन राष्ट्रपति शंकर दयाल शर्मा ने बलविंदर सिंह, उनके बड़े भाई रंजीत सिंह और उनकी पत्नियों को शौर्य चक्र से सम्मानित किया था। 

उन पर लगातार हुए हमले 
आतंकवाद के दौर में जब थानों के दरवाजे नहीं खुलते थे, तब बलविंदर सिंह ने पंजवड़ जैसे आतंकियों के साथ अपने घर में मोर्चा बना कर लोहा लेते थे। पंजवड़ और उसके गुर्गों ने बलविंदर के घर में 1980 से लेकर 1993 तक कई बार हमले किए। 1990 से लेकर 93 के बीच ही उनके घर पर 11 बार हमले हुए थे। वहीं इसी साल मार्च में पंजाब पुलिस ने बलविंदर सिंह की सुरक्षा वापस ले ली थी।

पंजवड़ अब पाकिस्तान में शरण लिए हुए है। ऐसे में पंजाब में आतंकवाद को पुनर्जीवित करने के प्रयास कर रही पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई के इशारे पर बलविंदर सिंह की हत्या तो नहीं की गई। पुलिस के सामने यह एक बड़ा सवाल है। बलविंदर ने अपनी और परिवार की सुरक्षा के लिए डीजीपी पंजाब दिनकर गुप्ता को एक पत्र भी लिखा था।

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