जम्मू-कश्मीर में 21 आयुष और स्वास्थ्य देखभाल केंद्रों का उद्घाटन

Ayush

नई दिल्लीः केंद्रीय आयुष मंत्री श्रीपद येसो नाईक और प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्यमंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह भद्रवाह में औषधीय पौधों की खेती के लिए पोस्ट हार्वेस्ट मैनेजमेंट सेंटर के साथ-साथ आयुष स्वास्थ्य एवं देखभाल केंद्र का जम्मू कश्मीर में शुभारंभ करेंगे। कार्यक्रम का आयोजन डिजिटल माध्यम से किया जाएगा। आयुष मंत्रालय के सचिव वैद्य राजेश कोटेचा भी इस कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे।

इस वर्ष जम्मू कश्मीर में 194 आयुष स्वास्थ्य एवं देखभाल केंद्रों को स्थापित करने का काम जारी है और इसके लिए आयुष मंत्रालय ने 12.81 करोड़ रुपए की केंद्रीय निधि उपलब्ध कराई है। केंद्र शासित प्रदेश जम्मू और कश्मीर में अगले 3 वर्षों में 319 आयुष स्वास्थ्य एवं देखभाल केंद्र स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है।इनमें से 21 आयुष स्वास्थ्य एवं देखभाल केंद्रों की शुरुआत 25 सितंबर 2020 को आयुष मंत्रालय द्वारा की जा रही है।

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भद्रवाह में पोस्ट हार्वेस्ट मैनेजमेंट सेंटर की स्थापना

औषधि से जुड़े वानस्पतिक प्रजाति के पौधों की खेती के लिए जम्मू-कश्मीर में व्यापक क्षमता है जिसकी न सिर्फ घरेलू बाजारों में बल्कि वैश्विक बाजारों में भी अच्छी मांग है। जम्मू कश्मीर के लोग पारंपरिक तौर पर औषधीय पौधों की खेती और उसका व्यापार करते रहे हैं।राज्य के लोगों की पोस्ट हार्वेस्ट मैनेजमेंट सुविधा की मांग लंबे समय से लंबित थी। पोस्ट हार्वेस्ट मैनेजमेंट सेंटर शुरू होने से किसानों को चिकित्सकीय पौधों की खेती करने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा और प्रसंस्करण की सुविधा प्राप्त होगी जिससे किसानों की आय में बढ़ोत्तरी होगी।

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पीएचएम में सुखाने,छंटाई करने, प्रसंस्करण करने और प्रमाणन तथा पैकेजिंग के साथ-साथ वैज्ञानिक विधि से हर्बल कच्चे माल के संग्रहण की सुविधा होगी। इससे उत्पाद का गुण संवर्धन होगा और किसानों को बेहतर कीमतें मिलेंगी।

पोस्ट हार्वेस्ट मैनेजमेंट सेंटर को कृषि विश्वविद्यालय के अंतर्गत आने वाले स्थानीय कृषि शोध केंद्रों से जोड़े जाने की संभावना है जिससे खेती के साथ-साथ पोस्ट हार्वेस्ट मैनेजमेंट और विपणन के बारे में किसानों का मार्गदर्शन हो। साथ ही साथ ही ई-मार्केट मंच पर भी किसानों को मदद मिले।

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आयुष स्वास्थ्य एवं देखभाल केंद्र

आयुष मंत्रालय के अंतर्गत देशभर में 12,500 स्वास्थ्य एवं देखभाल केंद्र चरणबद्ध ढंग से शुरू किए जाने को अनिवार्य किया गया है। इसके लिए 5 वर्षों यानि 2023-24 तक का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके लिए पहले से चल रही आयुष डिस्पेंसरियों और उप-स्वास्थ्य केंद्रों का भी इस्तेमाल किया जाएगा और कुल 3399.35 करोड रुपए की लागत आएगी।

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इसके पीछे समग्र स्वास्थ्य सुविधा का विकल्प देश के नागरिकों को उपलब्ध कराना है और लक्ष्य बीमारियों का बोझ कम करना तथा बीमारियों पर आने वाले खर्चों में कमी लाना है। आयुष के माध्यम से लोगों में स्वतः देखभाल के विचार को मूर्त रूप देना है ताकि बेहतर जीवनशैली, बेहतर खानपान, योग क्रियाओं और औषधीय पौधों की मदद से अनेक बीमारियों से बचाव हो सके। अनुभव और प्रमाण पर आधारित बीमारियों के प्रबंधन को भी इस कार्यक्रम का हिस्सा बनाया गया है।

इस कार्यक्रम का शुभारंभ प्रधानमंत्री द्वारा 30 अगस्त 2019 को हरियाणा में 10 आयुष स्वास्थ्य देखभाल केंद्रों के शुभारंभ के साथ किया गया था।

 

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