बिहार में चुनावी साल में राजनीतिक सरगर्मी तेज

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बिहार में कोरोना मरीजों की संख्या बढ़कर 1900 के पार पहुंच गई है। वहीं राज्य में चुनावी साल होने के कारण राजनीतिक सरगर्मी भी बढ़ रही है। कोरोना काल में भी राजनीतिक दलों ने अपनी चुनावी तैयारियों को लेकर बैठक करना शुरू कर दी है। हालांकि नेतागण बैठक में कोरोना को लेकर विचार-विमर्श करने की बात कहते हैं।

राज्य में पहली राजनितिक बैठक महागठबंधन के तीन छोटे दलों ने मिलकर की। वीआईपी पार्टी के पटना स्थित मुख्यालय में आयोजित बैठक में वीआईपी के अध्यक्ष मुकेश सहनी, रालोसपा अध्यक्ष उपेन्द्र कुशवाहा तथा हम के सुप्रीमो पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने शिरकत की थी। बैठक के बाद मुकेश सहनी ने कहा कि सीटों के तालमेल पर तीनों पार्टियों में सहमति बन गई है, वहीं उपेन्द्र कुशवाहा ने अपने पत्ते नहीं खोले। महागठबंधन के सबसे बड़े दल राजद तथा कांग्रेस को इस बैठक की जानकारी नहीं दी गई थी। इस बैठक को लेकर राजद तथा कांग्रेस नेताओं ने अचरज व्यक्त किया।

बिहार के उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी ने आगामी विधानसभा चुनाव के डिजिटल चुनाव होने की बात कहकर चुनावी चर्चा को बल प्रदान किया। उनके अनुसार बड़ी-बड़ी सभाएं, हेलिकॉप्टर से चुनाव प्रचार बीते हुए दिनों की बात हो सकती है। सुशील मोदी के बयान पर भी जमकर राजनीतिक बयानबाजी हुई।

इस बीच भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने विडियो कान्फ्रेसिंग के जरिए प्रदेश बीजेपी कोर कमेटी के सदस्यों के साथ वार्ता कर उन्हें टास्क दिया। राष्ट्रीय अध्यक्ष ने बीजेपी कार्यकर्ताओं को राज्य के सभी 243 विधानसभा सीटों पर चुनावी तैयारी करने का निर्देश दिया। जिससे जनता दल यूनाइटेड को भी असहज स्थिति में ला दिया। हालांकि भाजपा नेताओं का कहना है कि पार्टी अपने सहयोगी दलों की सीटों पर भी तैयारी को मजबूती प्रदान करती रही है।

राजद नेता पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने भी कविता के माध्यम से राजनीतिक वार किया, जिस पर जदयू ने भी तेजस्वी यादव को भ्रष्टाचार का युवराज कह पलटवार किया।

बहरहाल राज्य में प्रशासनिक अमला कोरोना संकट से निपटने में लगी हुई है। चुनाव आयोग ने अभी तक विधानसभा चुनाव कराने के कोई संकेत नहीं दिया है, लेकिन भाजपा जैसे बड़े दल से लेकर अहिंसा पार्टी जैसे छोटे दल भी चुनावी तैयारियों को लेकर बैठकें कर रहे है।

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