कोरोना वायरस के दौरान लगे लाॅकडाउन में हमने क्या सीखा!

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देशभर में कोरोना वायरस संक्रमण फैलने के बाद लगे संपूर्ण लाॅकडाउन के बाद से लोग अपने घरों में कैद हो गए। शुरू में तो लोगों की समझ में आया ही नहीं कि घर पर रहकर आखिर करें क्या। जो आदमी पूरा दिन घर से बाहर अपने ऑफिस में समय बिताता था, उसे लाॅकडाउन के दौरान घर पर रहने को मजबूर होना पड़ा। घर में समय काटने के लिए उसके पास एक ही चारा था कि या तो पूरे दिन मोबाइल से चिपके रहे या फिर टीवी से। लेकिन कब तक आखिर इंसान मोबाइल और टीवी देख सकता है। इसलिए कामकाजी आदमी और महिलाओं ने घर पर रहकर कैसे इस लाॅकडाउन में समय का सदुपयोग किया आइये जानते हैं।

सुबह जल्दी उठकर वर्क आउट करना
रोजमर्रा की हमारी जिन्दगी में हम सुबह थकान के कारण जल्दी नहीं उठ पाते और अगर उठते भी हैं तो हम जल्दी-जल्दी में बस काम पर भागने की जल्दी में होते हैं। पर जबसे लॉकडाउन शुरू हुआ है लोगों ने रात को जल्दी सोकर सुबह को जल्दी उठना शुरू कर दिया। सुबह जल्दी उठने के कई फायदे हैं। जैसे- सुबह-सुबह प्रकृति का एक सुन्दर नजारा देखने को मिलता है। सुबह-सुबह सूरज को निकलते हुए देखने का अभूतपूर्व सुख मिलता है। सुबह जल्दी उठकर हम पार्क की सैर और वर्क आउट कर अपने आपको फिट भी रख सकते हैं।

लाइफ में चीजों की कदर करना
जब सब कुछ नार्मल था तब हमारी लाइफ में ऐसी बहुत सी ऐसी चीजें थी, जिनकी हम कदर नहीं करते थे और सब चलता है वाली थ्योरी पर हम लोग काम करते थे। लेकिन, लॉकडाउन में जब सब बंद हैं तो हम उन सब चीजों की कदर पता चल रही हैं। घर पर रहकर ही पता चला कि घर पर कितना काम होता है। इसलिए जो लोग कभी भी घर के काम को हाथ नहीं लगाते थे, लाॅकडाउन में घर का काम मिल-बांटकर कर करना सीखा। चाहे वो झाडू-पोछा हो या फिर खाना बनाना। सभी तरह का घर का काम बड़े-बड़े लोगों ने लाॅकडाउन के दौरान किया है।

परिवार के साथ समय बिताना
लाॅकडाउन से पहले हम अपने काम में इतना व्यस्त रहते थे कि अपने परिवार के लिए समय ही नहीं निकाल पाते थे। परिवार के साथ कुछ खट्टे-मीठे पल बिताने का समय भी नहीं मिलता था। पर लाॅकडाउन में सबका साथ कितना जरूरी है, इस बात का अहसास हुआ। घरवालों के साथ समय बिताकर और उन्हे यह बताकर की हम सब एक ही परिवार का हिस्सा हैं और हम हर मुश्किल की घड़ी में साथ हैं। कोरोना की इस मुश्किल घड़ी में परिवार का महत्त्व भी लोगों को पता चला।

अपने शौक पूरे करना
हम में से ऐसे बहुत सारे लोग है जिन्हे अपनी हॉबीज फॉलो करने का समय नहीं मिलता। लेकिन, इस लाॅकडाउन में सभी को अपने पुराने शौक पूरे करने का पूरा मौका मिला। लोगों ने समय का सदुपयोग करते हुए लिखने-पढ़ने, गाने, नाचने और यहां तक की खाना बनाने का शौक भी पूरा किया।

क्या है पैसे से जरूरी 
लाॅकडाउन से पहले आम आदमी की लाइफ में भागम-भाग के अलावा कुछ भी नहीं था। हर आदमी सिर्फ पैसे के पीछे भाग रहा था, लेकिन किस कीमत पर उसे ये नहीं पता था। अब जब से लाॅकडाउन आया तो लोगों को एहसास हुआ कि पैसा तो जरूरी है, लेकिन उससे जरूरी है अपनी सेहत का ध्यान रखना और सामाजिक जीवन जीना। दोस्त और रिश्तेदारों के साथ मिलकर अपने दुख-सुख बांटना और दूसरों की मदद को आगे आना। खासकर उन लोगों की जिन लोगों को ऐसे समय में मदद की सबसे ज्यादा जरूरत थी। 

भले ही कोरोना ने लोगों को आर्थिक और शारीरिक रूप से नुकसान पहुंचाया हो, लेकिन कोरोना काल में लोगों ने बहुत कुछ सीखा है या यूें कहें कि गुज़रा जम़ाना याद आ गया।