Pangong Lake

आखिर क्यों चाहता है चीन पैंगोंग क्षेत्र को कब्जाना! आइये जानते हैं....

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आखिर क्या वजह है कि चीन लद्दाख के पैंगोंग में लगातार अतिक्रमण करने की कोशिश रहा है। पीपल्स लिब्रेशन आर्मी (PLA) लगातार इस इलाके में घुसपैठ की कोशिश करती ही रहती है। 1962 से ही चीन की निगाहें इस इलाके पर जमी हुई हैं। ऐसा क्या है इस क्षेत्र में कि चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी इस जगह को किसी भी कीमत पर हासिल करना चाहती है। आइये जानते हैं इस क्षेत्र का आर्थिक और सामरिक महत्त्व...

ऐसा माना जाता है कि यह पूरा इलाका बेशकीमती धातुओं के भंडार से पटा पड़ा है। कई भू-गर्भीय विशेषज्ञों के अनुसार गोगरा पोस्ट के पास स्थित पहाड़ को ही ‘गोल्डन माउंटेन’ कहा जाता है। सेटेलाइट तस्वीरों से भी इस क्षेत्र में हाई गोल्ड डिपोजिट होने की पुष्टि हुई है।

CBI

SC के दखल के बाद सुशांत केस भी CBI को सौंपा, क्यों चाहते हैं लोग CBI जांच, आईये जानते हैं...

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नई दिल्लीः सुशांत सिंह राजपूत मौत के मामले की जांच सीबीआई को सौपते हुए सुप्रीम कोर्ट ने एक बड़े जनसमूह के चेहरे पर खुशियां ला दी, जो इस मामले की जांच देश के सर्वोच्च जांच संस्था सीबीआई द्वारा कराये जाने की मांग कर रहे थे। मुंबई पुलिस के जांच करने के तौर-तरीकों से सुशांत के परिजन और फैन नाखुश थे। इसलिए इस मामले की जांच सीबीआई द्वारा कराये जाने की मांग तेज हो गयी थी। लोगों को लगता है यह आत्महत्या नहीं बल्कि हत्या है, जिसकी गुत्थी दिन-ब-दिन सुलझने के बजाय उलझती ही जा रही है। आखिर क्यों लोगों में सीबीआई द्वारा निष्पक्ष जांच करने और अंजाम तक पहुँचने का भरोसा है? आईये जानते सीबीआई और उसके काम करने के तरीकों के बारे में...

Advani Modi Rath Yatra

आडवाणी की 30 साल की तपस्या का मिलेगा फल, सारथी बनेगा महानायक

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राम जन्मभूमि आंदोलन का शंखनाद करने वाली लालकृष्ण आडवाणी की रथ यात्रा जारी रही, लेकिन भूमिकाएं बदल गईं। यह रथयात्रा 30 साल बाद 5 अगस्त को अपनी मंजिल पर पंहुचेगी। इस रथ यात्रा में सारथी की भूमिका निभाने वाले नरेंद्र मोदी की खामोशी भी अब टूटेगी। प्रधानमंत्री आज तक अयोध्या विवाद पर कुछ नहीं बोले। फल की चिंता किये बिना निःस्वार्थ अपना कर्म करते रहे। आखिरकार देर से ही सही मगर, फल मिल ही गया। अब अयोध्या में राम जन्म भूमि स्थल पर भव्य राम मंदिर का निर्माण होगा। 

Ram

राम जन्म भूमि पूजन के लिए 5 अगस्त ही क्यों?

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राम जन्मभूमि पूजन के लिए 5 अगस्त की तारीख का समय तय हुआ है। इस पर देश में तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं। हिन्दु मान्यताओं के अनुसार 5 अगस्त को भाद्रपद कृष्ण पक्ष द्वितीया पंचक है, जो किसी शुभ कार्य आरम्भ करने के लिए उपयुक्त नहीं माना जाता। इसीलिए कुछ राजनीतिक दलों के साथ-साथ साधु संत भी इस तारीख पर भूमि पूजन का विरोध कर रहे हैं। लेकिन विरोध के बावजूद 5 अगस्त का दिन ही चुना गया है। आखिर क्या है इसके पीछे की वजह। 

Babri Masjid

राम मंदिर कैसे बना राजनीतिक मुद्दा, आइये जानते हैं किसकी क्या रही भूमिका

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अयोध्या में राम मंदिर के शिलान्यास समारोह की तैयारियां जोरो-शोरों से चल रही हैं। 5 अगस्त को भूमि पूजन की तिथि तय होने के बाद से ही अयोध्या को ऐसे सजाया जा रहा है, जैसे प्रभु श्रीराम के बनवास से लौटने के समय सजाया गया था। अयोध्या का माहौल देखकर ऐसा लग रहा है कि दिवाली आने वाली है। लेकिन इस दिन के राम भक्तों को बहुत लंबा इंतजार करना पड़ा। आखिर इंतजार की घड़िया खत्म होने को हैं और राम जन्मभूमि पर भव्य मंदिर की शुरूआत हो जाएगी। लेकिन ये सोचने की जरूरत है कि आखिर भगवान राम को अपने घर में वापस आने में इतना समय क्यों लगा। क्यों इस धार्मिक मुद्दे का राजनीतिकरण कर दिया गया। आइए जानते हैं राम मंदिर कैसे बना राजनीतिक मुद्दा?