Nivar

जलवायु परिवर्तन घातक कर सकता है निवार का वार?

in Op-ed

कल रात पुडुचेरी के तटों से टकराता हुआ चक्रवाती तूफान निवार (Cyclone Nivar) आज उत्तर-पश्चिम की ओर फ़िलहाल रुख कर चुका है। लेकिन पुडुचेरी और तमिलनाडु में कई हिस्सों में लगातार बारिश का दौर जारी है और इस तूफ़ान ने इस क्षेत्र में काफी नुकसान पहुंचाया है। तमिलनाडु के एडिशनल चीफ सेक्रेट्री अतुल्य मिश्रा के मीडिया को दिए बयान के मुताबिक़, इस तूफान की वजह से राज्य में अब तक 3 लोगों की मौत हो गई है और 3 और लोगों के घायल होने की फ़िलहाल सूचना है।

Coal

घट रहा है भारत में कोयला बिजली परियोजनाओं को मिलने वाला बैंक लोन

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कोयले के लिए फाइनेंस मिलने में गिरावट का मतलब है कि वित्तीय संस्थानों को कोयले में निवेश से जुड़े जोखिमों का एहसास होने लगा है। लगातार दूसरे साल कोयला वित्त पोषण में गिरावट दर्ज की गयी है। एक ताज़ा रिपोर्ट की मानें तो पिछले साल दिए गए ऋणों में से 95 फीसद रिन्युबल ऊर्जा परियोजनाओं के लिए थे और महज़ 5 फ़ीसद ही कोयला बिजली परियोजनाओं के लिए थे।

इस तथ्य का ख़ुलासा हुआ तीसरी वार्षिक कोयला बनाम रिन्यूएबल वित्तीय विश्लेषण 2019 रिपोर्ट में। रिपोर्ट की मानें तो 2018 की तुलना में वाणिज्यिक बैंकों से कोयले की फंडिंग में 126% की गिरावट पाई गई है।
सेंटर फॉर फाइनेंशियल अकाउंटेबिलिटी (CFA/सीएफए) और क्लाइमेट ट्रेंड्स द्वारा तैयार की गई यह रिपोर्ट भारत में 43 कोयला-आधारित और रिन्यूएबल ऊर्जा परियोजनाओं के 50 प्रोजेक्ट फाइनेंस लोन प्रोपोसल्स पर  पर आधारित है।

Greenhousegas

लॉकडाउन से बस प्रदूषण हुआ कम, ग्रीनहाउस गैसें अब भी लहरा रहीं परचम

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विश्व मौसम विज्ञान संगठन (डब्लूएमओ) की आज जारी रिपोर्ट के अनुसार, कोविड-19 महामारी के कारण हुई औद्योगिक मंदी ने ग्रीनहाउस गैसों के रिकॉर्ड स्तर पर कोई अंकुश नहीं लगाया है। ये गैसें, जो वातावरण में गर्मी को बढ़ा रहीं हैं, अधिक चरम मौसम, बर्फ के पिघलने, समुद्र के स्तर में वृद्धि और महासागरीय अम्लीकरण के संचालन के लिए ज़िम्मेदार हैं।

लॉकडाउन ने कार्बन डाइऑक्साइड जैसे कई प्रदूषकों के उत्सर्जन में तो कटौती की, लेकिन CO2 सांद्रता पर उसका कोई प्रभाव नहीं पड़ा। डब्लूएमओ ग्रीनहाउस गैस बुलेटिन के अनुसार, कार्बन डाइऑक्साइड के स्तर में 2019 में तो वृद्धि बनी ही रही, वो वृद्धि 2020 में भी जारी है।

Exercise

कोरोना वायरस के दौरान लगे लाॅकडाउन में हमने क्या सीखा!

in Op-ed

देशभर में कोरोना वायरस संक्रमण फैलने के बाद लगे संपूर्ण लाॅकडाउन के बाद से लोग अपने घरों में कैद हो गए। शुरू में तो लोगों की समझ में आया ही नहीं कि घर पर रहकर आखिर करें क्या। जो आदमी पूरा दिन घर से बाहर अपने ऑफिस में समय बिताता था, उसे लाॅकडाउन के दौरान घर पर रहने को मजबूर होना पड़ा। घर में समय काटने के लिए उसके पास एक ही चारा था कि या तो पूरे दिन मोबाइल से चिपके रहे या फिर टीवी से। लेकिन कब तक आखिर इंसान मोबाइल और टीवी देख सकता है। इसलिए कामकाजी आदमी और महिलाओं ने घर पर रहकर कैसे इस लाॅकडाउन में समय का सदुपयोग किया आइये जानते हैं।

Fc

जलवायु सम्बन्धी मुक़दमे में फ़्रांसिसी अदालत ने लिया क्रन्तिकारी फ़ैसला

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फ्रांस में एक अत्यंत महत्वपूर्ण जलवायु परिवर्तन संबंधी मुकदमे में, नीदरलैंड सरकार ने उत्सर्जन में कटौती के नए उपायों को अपनाने पर अपनी सहमति व्यक्त की है। इस सहमति में  सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के अनुसार कोयले के उपयोग में भारी कटौती भी शामिल है।

अदालत का यह निर्णय हर लिहाज़ से महत्वपूर्ण है और फ्रांसीसी सरकार की जलवायु निष्क्रियता के सामने एक निर्णायक कदम है। अब फ्रांस के जलवायु उद्देश्य, और उन्हें प्राप्त करने की उसकी योजना, को अब कानूनी रूप से बाध्यकारी माना जायेगा।