महिला कांस्टेबल के ज़ज्बे को सलाम! तीन महीन में 76 बच्चों को छुड़ाया, मिला आउट ऑफ टर्न प्रमोशन

Seemadhaka

नई दिल्लीः राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली की एक महिला पुलिस हेड कांस्टेबल ने पिछले तीन महीनों में 76 लापता बच्चों को ढूंढकर उनको सही जगह पर पहुंचाया। उनकी इस बहादुरी पर दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने उन्हें बिना बारी के पदोन्नति (Out of turn Promotiob) दिया। समयपुर बादली पुलिस स्टेशन में तैनात महिला हेड कांस्टेबल सीमा ढाका को दिल्ली और अन्य राज्यों में 76 से ज्यादा बच्चों को ढूंढ निकालने के बाद आउट-ऑफ-टर्न प्रमोशन दिया गया है। इस तरह का प्रमोशन पाने वाली वह पहली महिला पुलिसकर्मी बन गई हैं।

दिल्ली के पुलिस आयुक्त एस एन श्रीवास्तव ने पिछले तीन महीनों में कई परिवारों के बच्चों को उनसे मिलाने के लिए महिला पुलिस हेड कांस्टेबल सीमा ढाका को बुधवार को पदोन्नति दी। पुलिस अधिकारी ने बताया कि बाहरी उत्तर जिले में तैनात ढाका ने तीन महीने से कम समय में 76 बच्चों को बचाया। 76 बच्चों में से, 56 बच्चे 7-12 वर्ष के हैं।

सीमा ढाका ने बताया कि उसने दिल्ली, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, बिहार, हरियाणा और पंजाब के बच्चों को बचाया है। उसने कहा कि वह महीनों से ऐसे मामलों पर काम कर रही थी और कहा कि उसके वरिष्ठों ने उसे और अधिक मामलों को सुलझाने और परिवारों की मदद करने के लिए प्रेरित किया।

उन्होंने कहा, “मेरे सीनियर्स और टीम के सदस्यों ने मुझे यह प्रमोशन दिलाने में मदद की। मैं एक मां हूं और कभी नहीं चाहती कि कोई अपना बच्चा खोए। हमने बच्चों को बचाने के लिए लापता रिपोर्ट पर हर दिन चैबीसों घंटे काम किया।’’

सीमा ने बताया कि उनके लिए सबसे चुनौतीपूर्ण मामलों में से एक इस साल अक्टूबर में पश्चिम बंगाल से एक नाबालिग को छुड़ाना था। पुलिस दल ने नावों में यात्रा की और बच्चे को खोजने के लिए बाढ़ के दौरान दो नदियों को पार किया। तब कहीं जाकर उस बच्चे तक पहुंच सके।

सीमा ने बताया कि लड़के की मां ने दो साल पहले शिकायत दर्ज की थी, लेकिन बाद में अपना पता और मोबाइल नंबर बदल दिया। हम उसे ट्रेस नहीं कर सकते थे लेकिन जानते थे कि वे पश्चिम बंगाल से हैं। तलाशी अभियान शुरू किया गया। हम एक छोटे से गाँव में गए और बाढ़ के दौरान दो नदियों को पार किया। हम किसी तरह बच्चे को उसके रिश्तेदार के पास से छुड़ाने में कामयाब रहे। लड़का घर नहीं जाना चाहता था। 

ढाका ने कहा कि उसने कई ऐसे मामलों में भी काम किया है, जहां किशोर अपने माता-पिता के साथ छोटे-मोटे झगड़े के बाद अपना घर छोड़ देते हैं और बाद में ड्रग्स और शराब में डूब जाते हैं। जब हम बच्चों को बचाते हैं, तो हम उन्हें परामर्श देते हैं और उन्हें पुलिस स्टेशन ले जाते हैं। इनमें से ज्यादातर बच्चे रेलवे स्टेशन और बस स्टॉप के पास पाए जाते हैं। हम उनसे बात करते हैं और उनके माता-पिता के बारे में पूछते हैं।

ऐसे मामलों पर काम करते हुए, ढाका जुलाई में कोरोना से संक्रमित हो गईं। उसके बाद वह तीन सप्ताह की होम क्वारंटाइन के लिए चली गई। लेकिन, ठीक होने के बाद फिर से ड्यूटी ज्वाइन की और अपने काम में लग गईं। ढाका 2006 में दिल्ली पुलिस में शामिल हुई थी। उन्होंने बाहरी दिल्ली, रोहिणी और बाहरी उत्तर दिल्ली में काम किया है। उनके पति भी हेड कांस्टेबल हैं और रोहिणी में तैनात हैं।