सभी को स्वामी विवेकानंद की विचारधारा पर गर्व है, पीएम मोदी ने प्रतिमा का किया अनावरण

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नई दिल्लीः जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में अपने संबोधन के दौरान दक्षिण दिल्ली में स्वामी विवेकानंद की एक प्रतिमा का अनावरण करने के बाद, प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन के दौरान विचारधारा को राष्ट्रीय हित में एक साथ आने का  आह्वान किया। उन्होंने कहा कि देश के लोगों को स्वामी विवेकानंद की विचारधारा पर गर्व है। प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में अपनी सरकार की ओर से लाए बदलावों का जिक्र करते हुए विचारधाराओं में मतभेद पर विस्तार से अपनी बात रखी। पीएम मोदी ने कहा, “हर कोई अपनी विचारधारा पर गर्व करता है और यह स्वाभाविक है। हमारी विचारधारा को राष्ट्र के साथ खड़ा होना चाहिए और राष्ट्रीय हित के मामलों के खिलाफ नहीं होना चाहिए।’’

उन्होंने स्वतंत्रता के लिए संघर्ष और आपातकाल के खिलाफ लड़ाई को उजागर करने की बात कही कि कैसे विभिन्न वैचारिक सोच वाले लोग ‘राष्ट्रीय हित’ के लिए एक साथ आए, लेकिन अपनी विचारधाराओं से समझौता किए बिना। उन्होंने कहा, ‘‘आजादी की लड़ाई में महात्मा गांधी के नेतृत्व में हर विचारधारा के लोग एक साथ आए थे। उन्होंने देश के लिए एक साथ संघर्ष किया था। इमर्जेंसी के दौरान भी देश ने यही एकजुटता देखी थी। इमर्जेंसी के खिलाफ उस आंदोलन में काँग्रेस के पूर्व नेता और कार्यकर्ता भी थे। आरएसएस के स्वयंसेवक और जनसंघ के लोग भी थे। समाजवादी लोग भी थे। कम्यूनिस्ट भी थे। इस एकजुटता में, इस लड़ाई में भी किसी को अपनी विचारधारा से समझौता नहीं करना पड़ा था। बस उद्देश्य एक ही था- राष्ट्रहित। इसलिए साथियों, जब राष्ट्र की एकता अखंडता और राष्ट्रहित का प्रश्न हो तो अपनी विचारधारा के बोझ तले दबकर फैसला लेने से, देश का नुकसान ही होता है।’’

पीएम मोदी ने कहा, ‘‘जब सवाल राष्ट्रीय अखंडता और हित के बारे में है, तो एक विचारधारा के बोझ के तहत निर्णय लेने से राष्ट्र को नुकसान होता है।’’ पीएम ने कहा, ‘‘यह विश्वास करना गलत है कि कोई व्यक्ति राष्ट्रीय हित के मामलों में एक निश्चित ढांचे में सोचेगा और कार्य करेगा, क्योंकि यह एक विचारधारा है।’’ उन्होंने कहा कि ये बड़े गर्व की बात है कि स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा का अनावरण जेएनयू में किया जा रहा है।

जेएनयू में परंपरागत रूप से वाम समर्थित छात्र दल परंपरागत रूप से मजबूत रहे हैं। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के छात्र संगठन एबीवीपी भी जेएनयू के छात्रसंघ में प्रभाव हासिल करने की कोशिश कर रहा है।

आपको बता दें कि जेएनयू में कई दशकों से लेफ्ट की विचारधारा प्रभावी है। पिछले कुछ वर्षों में देश की सबसे प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटीज में से एक, जेएनयू नकरात्मक कारणों से सुर्खियों में रही। इसकी शुरुआत 2016 से हुई। जब संसद पर आतंकी हमले के दोषी अफजल गुरु की फांसी के खिलाफ एक कार्यक्रम को लेकर विवाद हुआ। 9 फरवरी 2016 को एक कार्यक्रम के दौरान जेएनयू छात्रों पर कथित रूप से देश-विरोधी नारे लगाने का आरोप लगा। यह घटनाक्रम पूरे देश में जेएनयू के लिए निगेटिव पब्लिसिटी की वजह बना।

जेएनयू के भीतर यूं तो लेफ्ट का दबदबा है लेकिन धीरे-धीरे दक्षिणपंथी संगठन भी अपनी पैठ जमा रहे हैं। जब दो परस्पर विरोधी विचारधाराएं आमने-सामने आती हैं तो जेएनयू अक्सर विवादों का केंद्र बन जाता है। इस साल जनवरी में कुछ ऐसा ही हुआ। कई दर्जन नकाबपोश लोगों ने जेएनयू छात्रों पर हमला बोल दिया था। विपक्ष और लेफ्ट पार्टियों का आरोप था कि यह हरकत बीजेपी की छात्र इकाई अखिल भारतीय विद्याथी परिषद की है। हालांकि ये साबित नहीं हो पाया।

बता दें कि स्वामी विवेकानंद की जिस मूर्ति का प्रधानमंत्री ने अनावरण किया, उसपर पिछले साल नंबर में आपत्तिजनक बातें लिख दी गई थीं। हालांकि, यह पता नहीं चल पाया था कि ऐसा किसने किया। जेएनयू के पूर्वांचल एरिया में वीडी सावरकर के नाम की रोड है। इसके साइन बोर्ड पर इसी साल कालिख पोत दी गई थी और उस पर बीआर अम्बेडकर लिख दिया गया था। जेएनयू छात्रसंघ की अध्यक्ष आइशी घोष ने बकायदा ट्विटर पर ऐलान किया था कि यह उनकी विचारधारा के लोगों ने किया है।

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