Delhi Riot: हाईकोर्ट ने ताहिर हुसैन को पार्षद पद से हटाने के आदेश पर लगाई रोक

Tahirhussain

नई दिल्लीः उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों से जुड़े एक मामले में गिरफ्तार किए गए आम आदमी पार्टी के नेता ताहिर हुसैन को पार्षद पद के लिए अयोग्य ठहराने के EDMC के फैसले पर रोक लगा दी है। बता दें कि दिल्ली नगर निगम द्वारा दिल्ली दंगों के आरोपी ताहिर हुसैन की सदस्यता रद्द कर दी थी, जिसके खिलाफ ताहिर हुसैन ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी।

अदालत ने निगम को उसके स्थायी वकील गौरांग कंठ का प्रतिनिधित्व करने के लिए नोटिस भी जारी किया और याचिका पर अगले साल मार्च तक अपना पक्ष रखा। हुसैन की ओर से पेश अधिवक्ता रिजवान ने पुष्टि की कि अदालत ने ईडीएमसी के फैसले पर रोक लगा दी है। पूर्व आम आदमी पार्टी के पार्षद की ओर से दलील उनकी पत्नी के माध्यम से दी गई थी।

उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुई हिंसा के आरोपी पार्षद ताहिर हुसैन की सदस्यता पूर्वी दिल्ली नगर निगम ने सदन में खत्म कर दी थी। सदन में लगातार 3 बैठकों में अनुपस्थित रहने पर यह फैसला लिया गया था। ताहिर फरवरी में हुई हिंसा से पहले जनवरी, फरवरी व बाद में जून और जुलाई में बिना किसी सूचना के सदन की बैठकों से अनुपस्थित रहे थे। 

दरअसल, नगर निगम अधिनियम की धारा 35 की उप धारा 2 में प्रावधान है कि निगम का कोई सदस्य अगर बिना पूर्व सूचना के लगातार सदन की तीन बैठकों में अनुपस्थित रहता है तो सदन के संबंधित पार्षद की सदस्यता को समाप्त किया जा सकता है। इसी प्रावधान के तहत सदन में नगर निगम सचिव ने प्रस्ताव पेश किया। चर्चा के बाद सर्वसम्मति से प्रस्ताव को सदन से मंजूरी मिल गई। प्रस्ताव के अनुसार, ताहिर हुसैन वार्ड संख्या 59ई का प्रतिनिधित्व कर रहे थे। यह सीट खाली हो गई थी।

बता दें कि मार्च से लेकर मई तक लॉकडाउन के कारण नगर निगम की कोई बैठक नहीं हो सकी थी। वहीं, तीन निगम पार्षदों ने दिल्ली विधानसभा के सदस्य निर्वाचित होने पर अपने सदस्यता पद से भी त्यागपत्र दे दिया है यानी अब निगम के पास केवल 61 पार्षद रह गए हैं। जबकि निगम के अंतर्गत 64 वार्ड आते हैं।

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