RBI Policy: ब्याज दरों में नहीं होगा बदलावः शक्तिकांत दास

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नई दिल्ली: 9 अक्टूबर, 2020 को भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने अपनी चैथी द्विमासिक मौद्रिक बैठक में रेपो दर को फिर से एक स्थिर रुख के साथ कोई बदलाव नहीं करने का निर्णय लिया। फिलहाल रेपो रेट 4 फीसदी है। इस बीच, आरबीआई गवर्नर, शक्तिकांत दास ने कहा, ‘‘एमपीसी ने मौद्रिक नीति के वर्तमान रुख को कम से कम चालू वित्तीय वर्ष और अगले वर्ष के माध्यम से आवश्यक रखने का निर्णय लिया।’’ भारतीय रिजर्व बैंक ने लगातार दूसरी बार यह निर्णय लिया है। MPC ने बैठक में सर्वसम्मति से ये फैसला लिया है। रिवर्स रेपो रेट भी 3.35 फीसदी पर बरकरार है।

आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा, ‘‘हाल में आए आर्थिक आंकड़ों से अच्छे संकेत मिल रहे है। ग्लोबल इकोनॉमी में रिकवरी के मजबूत संकेत मिल रहे हैं। मैन्युफैक्चरिग, रिटेल बिक्री में कई देशों में रिकवरी दिखी है। खपत, एक्सपोर्ट में भी कई देशों में सुधार दिखा है।

उन्होंने कहा, अर्थव्यवस्था में तेजी की उम्मीद बनी हुई है। हम बेहतर भविष्य के बारे में सोच रहे हैं। सभी सेक्टर में हालात बेहतर हो रहे है। ग्रोथ की उम्मीद दिखने लगी है। रबी फसलों का आउटलुक बेहतर दिख रहा है। महामारी के इस संकट अब कोविड रोकने से ज्यादा फोकस आर्थिक सुधारों पर है।

रेपो दर में बदलाव नहीं, इसका क्या है मतलब 
वर्तमान में, आरबीआई ने रेपो दर में कोई बदलाव नहीं किया है, जिसका अर्थ है कि ऋण पर ब्याज दर समान रहेगी। इसलिए, रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं होने से मार्जिनल कॉस्ट बेस्ड लेंडिंग रेट (MCLR) से जुड़े लोन समान रहेंगे। यह उन कई लोगों के लिए राहत की बात होगी, जो कर्ज की ब्याज दरों में बढ़ोतरी से चिंतित थे।

अपरिवर्तित रेपो दर से सावधि जमा दरों में और कमी आएगी। जमाकर्ताओं के लिए यह एक अच्छी खबर होगी। वर्तमान में, आरबीआई की रेपो दर 4 प्रतिशत है, जिसका अर्थ है कि बैंक कम लागत पर अधिक पैसा उधार ले सकते हैं। इसलिए, बैंक मुख्य रूप से जमाकर्ताओं को सावधि जमा पर कम ब्याज देते हैं क्योंकि आरबीआई कम ब्याज पर धनराशि प्रदान करता है।

रेपो दर भी मुद्रास्फीति को प्रबंधित करने में मदद करती है। जबकि कम मुद्रास्फीति उपभोक्ताओं के लिए अच्छी है, लेकिन बहुत कम मुद्रास्फीति माल और सेवाओं की कम मांग को भी दर्शाती है। उच्च मुद्रास्फीति के दौरान, लागत में वृद्धि होती है, कम मुद्रास्फीति के मामले में, वस्तुओं की कीमतें बढ़ जाती हैं।

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